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अपना काम करते हैं तो आपके लिए हैं ये पेंशन स्‍कीम

स्‍कीमों के तहत असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले सब्‍सक्राइबर्स को 60 वर्ष या इससे अधिक उम्र होने पर पेंशन मिलेगी

 स्‍कीमों के तहत असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले सब्‍सक्राइबर्स को 60 वर्ष या इससे अधिक उम्र होने पर पेंशन मिलेगी

पेंशन स्कीमें

ये योजनाएं पेंशन के मक़सद से शुरु की गई हैं, जैसे - अटल पेंशन योजना (APY), प्रधान मंत्री श्रम योगी मान-धन (PMSYM) योजना, और नेशनल पेंशन फॉर ट्रेडर्स एंड सेल्फ़ इंप्लॉइड पर्सन्स योजना (NPSTSY)। ये योजनाएं असंगठित सैक्टर को ध्यान में रख कर बनाई गई हैं। PMSYM को 2019-20 (I) के बजट के दौरान, लोक सभा चुनावों के बाद लॉंच किया गया। वहीं, APY को 2015 में लॉंच किया गया था। इन सभी स्कीमों में 60 वर्ष या उससे ज़्यादा उम्र होने पर पेंशन मिलेगी।

इन पेंशन योजनाओं का मक़सद खुदरा व्यापारियों, छोटे दुकानदारों और स्व-रोज़गार में लगे लोगों को व्यवस्थित पेंशन के दायरे में लाना है। NPSTSY स्कीम, क़रीब तीन करोड़ लोगों को पेंशन के फ़ायदे देती है, ये वो लोग हैं जिनकी कमाई का सालाना टर्नओवर ₹1.5 करोड़ से कम है। अपने इसके अलावा PMSYM और NPSTSY में पात्रता का मापदंड एक ही है। हालांकि आप केवल एक का ही लाभ उठा सकते हैं, एक साथ दोनों योजनाओं का नहीं।

इन तीन योजनाओं की मुख्य विशेषताएं इस तरह से हैं:

अटल पेंशन योजना

निवेश का उद्देश्य और रिस्क
APY का मुख्य उद्देश्य, असंगठित क्षेत्र के ऐसे लोगों को तय राशि वाली पेंशन की सुविधा देना है। ये वो लोग हैं जिन्हें सामाजिक सुरक्षा की किसी दूसरी स्कीम के तहत कवरेज नहीं मिलता है।

पूंजी की सुरक्षा
इसमें न्यूनतम पेंशन की गारंटी भारत सरकार देती है।

शुरुआत की उम्र
अटल पेंशन योजना को शुरु करने की न्यूनतम उम्र 18 और अधिकतम उम्र 40 वर्ष है।

नक़दी पाने की सुविधा

60 साल की उम्र से पहले स्कीम से, स्वेच्छा से बाहर निकला जा सकता है। हालांकि, स्कीम बंद करने पर निवेशक को उसका जमा किया योगदान और उस पर हुई आमदनी ही वापस की जाती है। मगर लाभार्थी की मृत्यु होने की स्थिति में, लाभार्थी का जीवन-साथी इस स्कीम को जारी रख सकता है। यदि दोनों की ही मृत्यु हो जाए, तो इस स्थिति में नॉमिनी को जमा रक़म दे दी जाती है।

गारंटी
APY 60 वर्ष की आयु के बाद, ग्राहक को न्यूनतम निश्चित पेंशन की गारंटी देता है। ये पेंशन राशि, ग्राहक के योगदान के आधार पर ₹1,000 से ₹5,000 तक होती है। पेंशन की योगदान राशि की गणना, स्कीम में प्रवेश करने की उम्र और पेंशन की न्यूनतम गारंटी के आधार पर की जाती है। उदाहरण के लिए, एक 18 वर्षीय व्यक्ति अगर ₹1,000 की न्यूनतम पेंशन प्राप्त करने का विकल्प चुनता है, तो उसे इसके लिए हर महीने ₹42 का योगदान करना होगा। हालाँकि, अगर वो 40 वर्ष की आयु में इस स्कीम में शामिल होता है, तो उसे 60 वर्ष की आयु होने पर 1,000 की न्यूनतम पेंशन प्राप्त करने के लिए हर महीने ₹ 291 का योगदान देना होगा।
उन सभी सब्सक्राइबरों के लिए जिन्होंने स्कीम को जून 2015 और दिसंबर 2015 के बीच पांच साल के लिए शुरु किया है यानि, वित्तीय वर्ष 2015-16 से 2019-20 तक किया है-उनके लिए सरकार भी 50 प्रतिशत का योगदान करेगी।


खाता कैसे खोलें
कई राष्ट्रीयकृत और निजी बैंक APY की पेशकश करते हैं। सबस्क्राइबर के पास बैंक ख़ाता और आधार-कार्ड होना चाहिए। साथ ही आधार-कार्ड को बैंक खाते से लिंक करना जरूरी है।

प्रधान मंत्री श्रम योगी मान-धन और नेशनल पेंशन स्कीम फ़ॉर ट्रेडर्स एंड सेल्फ़ इंप्लॉएड पर्सन्स योजना

निवेश का उद्देश्य और रिस्क
प्रधान मंत्री श्रम योगी मान-धन (PMSYM) और नेशनल पेंशन स्कीम फ़ॉर ट्रेडर्स एंड सेल्फ़ इंप्लॉएड पर्सन्स योजना (NPSTSY) में न्यूनतम योगदान पर, ₹3,000 की निश्चित मासिक पेंशन की गारंटी होती है।
इन योजनाओं का मुख्य उद्देश्य असंगठित क्षेत्र के ऐसे लोगों को निश्चित पेंशन मुहैया कराना है, जो किसी दूसरी योजना के तहत सुरक्षा की गांरटी नहीं पाते हैं। हालांकि, PMSYM स्कीम उन्हीं लोगों के लिए है, जो ₹15,000 से ज़्यादा का मासिक वेतन नहीं पाते हैं। इसके अलावा NPSTSY का लाभ वही ले सकते हैं, जिनका सालाना टर्नओवर ₹1.5 करोड़ से ज़्यादा नहीं है।

पूंजी की सुरक्षा
न्यूनतम पेंशन के फ़ायदे की गारंटी भारत सरकार देती है।

शुरु करने की उम्र
PMSYM और NPSTSY शुरु करने की न्यूनतम उम्र 18 वर्ष है और अधिकतम 40 वर्ष है।

नक़दी पाने की सुविधा

स्कीम से 60 साल की उम्र से पहले स्वेच्छा से बाहर निकला जा सकता है। हालांकि, 10 साल से पहले स्वेच्छा से स्कीम बंद करने पर निवेशक को उसका योगदान और उसपर मिली हुई आय, जो एक बचत खाते के बराबर हो, वही लौटाई जाती है। अगर लाभार्थी 60 साल की उम्र से पहले, मगर स्कीम शुरु होने के 10 साल बाद बाहर निकलता है, तो उसे मिलने वाली राशि पर ब्याज बचत ख़ाते के मुताबिक़ दी जा सकती है। या फिर असल में ब्याज की रक़म वही हो सकती है जो पेंशन फ़ंड से प्राप्त की गई हो। इसके अलावा जो भी रक़म मुनाफ़े के तौर पर हासिल की गई है, चाहे वो सरकार का योगदान हो या उस मिली आय हो, वो लाभार्थी को नहीं दी जाती।
अगर पेंशन अवधि के दौरान लाभार्थी की मृत्यु हो जाती है, तो उसका जीवन-साथी आधी पेंशन पाने का हक़दार होता है।
गारंटी
ये स्कीमें लाभार्थी को 60 वर्ष की आयु के बाद, ₹3,000 की निश्चित पेंशन की गारंटी देती हैं। इसमें मासिक योगदान ₹55 से लेकर ₹200 तक हो सकता है। ये राशि, स्कीम में प्रवेश करने की उम्र और ₹3,000 की न्यूनतम पेंशन की गारंटी के आधार पर तय की जाती है। उदाहरण के लिए, एक 18 वर्षीय व्यक्ति को ₹ 55 महीने का न्यूनतम योगदान करना होगा। वहीं अगर कोई 40 वर्ष की आयु में इस स्कीम में शामिल होता है, तो उसे ₹200 का योगदान देना होगा।

इन दोनों ही स्कीमों में भारत सरकार, गांरटी के साथ 50 प्रतिशत राशि का योगदान करती है। यानि, 18 साल का व्यक्ति अगर ₹55 मासिक का योगदान दे रहा है, तो सरकार भी ₹55 मासिक का ही योगदान देती है।

अकाउंट कैसे खोलें

लाभार्थी को अपने पास के कस्टमर सर्विस सेंटर (CSC) में जाना होगा। उसे अपने साथ आधार-कार्ड और बैंक अकाउंट का विवरण ले जाना चाहिए। एक बार एनरोल हो जाने के बाद और पहली किश्त जमा हो जाने पर, मासिक किश्त रक़म अपने आप कटने की व्यवस्था (ECS) की जा सकती है।

ये लेख पहली बार मार्च 31, 2022 को पब्लिश हुआ.

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