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सोने की क़ीमत दोगुनी होना अच्छी बात नहीं, समस्या है

क़ीमतों में भारी उछाल ने आपके पोर्टफ़ोलियो का बैलेंस ग़लत दिशा में बदल दिया है. यहां इसे ठीक करने का तरीक़ा बताया गया है.

क़ीमतों में भारी उछाल ने आपके पोर्टफ़ोलियो का बैलेंस ग़लत दिशा में बदल दिया है. यहां इसे ठीक करने का तरीक़ा बताया गया है.Anand Kumar/AI-Generated Image

सारांशः एक रिश्तेदार ने फ़ोन करके बताया कि उनके सोने की क़ीमत दोगुनी से भी ज़्यादा हो गई है. उन्होंने इस बात पर ध्यान नहीं दिया था कि जो चीज़ लगातार बढ़ती जा रही है, उसके बारे में कभी न कभी कोई फ़ैसला लेना पड़ सकता है. यह नोट उसी खामोशी के बारे में है. और यह बात उन कई निवेशकों पर लागू होती है, जिन्हें इसका अंदाज़ा भी नहीं था.

कुछ साल पहले एक रिश्तेदार ने मुझे फ़ोन किया, उस लहजे में जैसे कोई राज़ बता रहा हो. बताया कि परिवार के लिए ख़रीदा गया सोना दोगुने से भी ज़्यादा हो गया है. मैंने बधाई दी. फ़ायदा असली था. फिर मैंने पूछा कि अब इसके बारे में क्या सोच रहे हैं, तो ख़ामोशी छा गई. उन्होंने यह नहीं सोचा था कि जो चीज़ लगातार चढ़ती रहे, वो किसी मोड़ पर एक फ़ैसले की मांग भी कर सकती है.

वो ख़ामोशी ही इस लेख का विषय है.

सबसे पहले, एक बात माननी होगी, क्योंकि इसका आगे की बातों से संबंध है. अपनी ज़्यादातर कामकाजी ज़िंदगी में मेरी राय थी कि सोना एक बेकार एसेट है. लॉकर में पड़ी धातु है, जो न डिविडेंड देती है, न कोई कारोबार बढ़ाती है, बस सेंटीमेंट और डर के बल पर टिकी रहती है. मैंने यह बात कई बार, काफ़ी दृढ़ता से कही. पिछले अक्तूबर में मैंने अपना रुख़ थोड़ा नरम किया. मैंने लिखा कि सोने का एक छोटा हिस्सा, यानी 5-10 प्रतिशत, उस तरह की मौद्रिक मुश्किलों से बचाव का बीमा हो सकता है जिनसे इक्विटी नहीं उबर पाती. बीमा, स्ट्रैटेजी नहीं है. एक ऐसे झटके के ख़िलाफ़ सुरक्षा जिसकी संभावना कम हो लेकिन असर बड़ा, ठीक वैसे जैसे आप इस उम्मीद के साथ एक टर्म प्लान रखते हैं कि इसे कभी क्लेम न करना पड़े.

मैं अभी भी उस बात पर क़ायम हूं. लेकिन बीमे के साथ एक अजीब समस्या है जब वो जीतने लगता है.

बीमा आपकी वेल्थ का वो छोटा-सा कोना होता है जिस पर आपकी नज़र शायद ही जाए. यह रसोई में रखा अग्निशामक यंत्र है, पूरी रसोई नहीं. अगर वो आधे कमरे को भर ले, तो वो सुरक्षा उपकरण नहीं रहा, ख़तरा बन जाता है. हेज इसीलिए काम करता है क्योंकि वो छोटा होता है और आपकी बाकी सारी चीज़ों से अलग दिशा में चलता है. इसे काफ़ी बड़ा होने देंगे, तो यह आपके जोख़िम को संतुलित करना बंद कर देता है. यह ख़ुद आपका जोख़िम बन जाता है. जो चीज़ आपने पोर्टफ़ोलियो की हिफ़ाज़त के लिए ख़रीदी थी, वही अब उसे डुबो सकती है.

एक समझदारी से भरी सोने की होल्डिंग के साथ, एक बड़ी रैली यही काम करती है. मान लीजिए आपने मेरी सलाह मान ली और पोर्टफ़ोलियो का 10वां हिस्सा सोने में लगाया, फिर सही काम किया और उसे छोड़ दिया. इस आकार की बढ़त उतनी ही नहीं रही. वो 10वां हिस्सा अब 5वां हो गया होगा, या उससे भी ज़्यादा. आपने कुछ नहीं किया और फिर भी आपका एलोकेशन लगभग दोगुना हो गया, क्योंकि बाज़ार ने इसे रीबैलेंस कर दिया. लेकिन, ऐसा ग़लत दिशा में हुआ.

यही हिस्सा सतर्क लोगों को भी चकमा दे देता है. यह अनुशासन जैसा लगता है. आपने हिम्मत बनाए रखी, ऐप से दूरी रखी, वो हर सलाह अपनाई जो मैं सालों से देता रहा हूं. और फिर भी, बिना ध्यान दिए, आप बदल गए. एक मामूली हेज लेने वाले एक ऐसे इंसान से, एक ऐसे इंसान में बदल गए जो अपने साइकिल के शीर्ष पर एक ही एसेट पर बड़ा, कंसंट्रेटेड दांव लगा रहा है. आप ऐसे गोल्ड बुल बन गए, जिसने कभी इसे चुना ही नहीं. हेज चुपके से बेट (जुए) में बदल गया.

और देखिए कैसे ट्रैप बंद हो रहा है. जिस 5-10 प्रतिशत को मैंने समझदारी कहा था, वो अब 15-20 प्रतिशत बन गया है जिससे मैंने आपको सावधान किया था. आपने अपना मन नहीं बदला. क़ीमत ने आपके लिए इसे बदल दिया.

उपाय उबाऊ और थोड़ा तकलीफ़देह है, और आमतौर पर इसी से पता चलता है कि यह सही है.

रीबैलेंसिंग का मतलब है अपने विनर्स को उतना बेचना कि वे उस स्तर पर वापस आ जाएं जो आपने सही फ़ैसले लेते समय निर्धारित किया था, और फिर प्राप्त रक़म को उन शेयरों में निवेश करना जो पिछड़ गए हैं. इस बेचैनी को महसूस कीजिए. सहज प्रवृत्ति हमेशा यही होती है कि जो चढ़ रहा है उसे बेचें और जो नहीं चढ़ रहा उसे ख़रीदें. और पहले के ठीक बाद एक दूसरा ट्रैप भी इंतज़ार कर रहा है. आप बेचते हैं, अगले महीने सोना 10 प्रतिशत और चढ़ जाता है, और आप ख़ुद को बेवकूफ़ समझने लगते हैं कि क्यों घटाया. नहीं, आप बेवकूफ नहीं थे. रीबैलेंसिंग यह अनुमान नहीं है कि विनर अपने शीर्ष पर पहुंच गया है. यह किसी एक एसेट को चुपके से पूरी योजना पर क़ाबिज़ होने से रोकने का फ़ैसला है. यहां, एक बार के लिए, सही क़दम यह नहीं है कि बैठे रहें. यह है कि मोमेंटम के ख़िलाफ़ चलें और उस योजना का पालन करें जो आपने शांत दिमाग़ में बनाई थी.

मैं साफ़ कर दूं कि मैं क्या नहीं कह रहा. मैं यह नहीं कह रहा कि सोना गिरेगा. मुझे नहीं पता, और न ही उन्हें पता है जो आपको अनुमान बेच रहे हैं. मैं सिर्फ़ यह कह रहा हूं: आपकी इसमें हिस्सेदारी आपकी मर्ज़ी के बिना बढ़ गई है और जो हेज आप अनजाने में बढ़ाते जा रहे थे वो अब हेज नहीं रहा.

सोना आपके पोर्टफ़ोलियो का वो हिस्सा होना चाहिए जिसे आप नज़रअंदाज़ कर सकें. जिस दिन आप इससे नज़र नहीं हटा पाते, उसी दिन यह अपना काम करना बंद कर देता है. तो इस वीकेंड अपना पोर्टफ़ोलियो खोलिए, देखिए सोना चुपके से क्या बन गया है और उसे उस हिस्सेदारी तक वापस घटाइए जो आपने शांत मन में चुनी थी.

यह भी पढ़ेंः सबसे काम का जवाब है 'मुझे नहीं पता'

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