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क्‍या करेगा यह बुजुर्ग आदमी

वारेन बफ़ेट एक समय चार्ट के प्रशंसक थे। इस बात का अंदाजा कितने लोगों को रहा होगा?

क्‍या करेगा यह बुजुर्ग आदमी

मैंने पिछले हफ्ते बर्कशायर शेयरहोल्‍डर्स की सालाना बैठक को देखते हुए कुछ नया और चौंकाने वाली चीज सीखी। एक समय ऐसा था जब वारेन बफ़ेट टेक्निकल एनालिसिस में बहुत गहरे डूबे हुए थे। जो भी बफ़ेट के बारे में कुछ भी जानता है और यह भी समझता है कि टेक्निकल एनालिसिस बकवास है, उसके लिए यह चौंकाने वाली बात होगी। हालांकि, यह बताता है कि नई चीजों को देखने और नई जानकारी को पचाने की क्षमता और इसके बाद किसी के दिमाग को बदलना स्‍मार्ट निवेशक बनने के लिए अहम है।

इस बार, दो वर्ष के अंतराल के बाद हो रही शेयरहोल्‍डर्स की सालाना बैठक में सभी प्रतिभागी फिजिकली मौजूद थे। जैसे यह बैठक 2019 तक होती थी। बैठक अमेरिका के ओमाहा में हुई, जहां बर्कशायर बेस्‍ड है। दुनिया की तमाम कंपनियों की वर्चुअल बैठक के विपरीत, बर्कशायर की बैठक हमेशा दिलचस्‍प रही है, न सिर्फ बैठक में मौजूद शेयरहोल्‍डर्स के लिए, बल्कि दुनिया के हर निवेशक के लिए। इसकी प्रमुख वज़ह दो महानुभाव के साथ सवाल-जवाब का सत्र है, जो कंपनी चलाते हैं। चेयरमैन वारेन बफेट और उनके डिप्‍टी चार्ली मंगर। यह बैठक कई घंटे चलती है। और ऐसा बफेट और मंगर की उम्र क्रमश: 91 साल और 98 साल होने के बावजूद होता है। पूरा शो इसलिए खासा दिलचस्‍प रहता है, क्‍योंकि बफेट और मंगर प्‍वाइंट पर बने रहते हैं। उनके जवाब किस्‍से-कहानियों, सामान्‍य टिप्‍पणी, हाजिर जवाबी और समझदारी से भरपूर होते हैं और अक्‍सर उनकी बातें बर्कशायर के दायरे से बहुत दूर चली जाती हैं।

इस बार, बफेट ने बताया, उन्‍होंने कैसे 11 साल की उम्र में बहुत थोड़ी रकम से स्‍टॉक्‍स में निवेश शुरू कर दिया था। और यह रकम उन्‍होंने छोटे-मोटे काम करके कमाई थी। और कैसे अगले कुछ वर्षों में वे ‘सबकुछ सीख’ गए जो स्‍टॉक इन्‍वेस्टिंग में मददगार साबित हो सकता था। बफ़ेट ने सीखा कि कैसे स्‍टॉक एक्‍सचेंज काम करते हैं, फाइनेंस की हिस्‍ट्री क्‍या है और सबसे बड़ी बात वे टेक्निकल एनॉलिसिस में ज्‍यादा ही दिलचस्‍पी लेने लगे। उन्‍होंने चार्ट, हेड ओर शोल्‍डर्स के बारे में घंटो पढ़ना शुरू कर दिया। इसके बाद जब वे 19 या 20 साल के थे, तो उन्‍होंने एक बुक उठाई और सिर्फ एक पैराग्राफ पढ़ने पर ही उनको पता चल गया कि वे जो कुछ भी कर रहे थे वह सब गलत था। वे उन स्‍टॉक्‍स को चुनने का प्रयास कर रहे थे, जो ऊपर जाने वाले थे लेकिन बुक ने बताया कि कैसे यह गलत तरीका था। यह बुक बेंजमिन ग्राहम की ‘द इंटेलीजेंट इन्‍वेस्‍टर’ थी। और जैसा कि कहा जाता है, बाकी सब इतिहास है।

यहां सबसे दिलचस्‍प चीज- आत्‍मसात करने लायक बात- सबकुछ आजमाना नहीं है, बल्कि यह स्‍वीकार करने के लिए खुद को तैयार करना है कि आप गलत हैं और इस बात को समझने के बाद दिशा बदल लेना है। हजारों लोगों ने ‘द इंटेलीजेंट इन्‍वेस्‍टर’ पढ़ी है। बहुत से लोग इसकी वजह से बेहतर निवेशक बन सके और शायद कुछ सही मायने में सफ़ल निवेशक बन पाए।

इस बात को स्‍वीकार करना कि ऊपर जाने वाले स्‍टॉक चुनने का प्रयास करना एक गलती थी वास्‍तव में बहुत गहरी बात थी। बाद में सवाल-जवाब के एक सत्र में बफेट ने कहा कि वे कभी भी किसी चीज को टाइम नहीं कर पाए और न ही यह जान पाए कि अर्थव्‍यवस्‍था में क्‍या होने जा रहा है! किसी पारंपरिक फाइनें‍शियल एडवाइजर या इन्‍वेस्‍टमेंट मैनेजर के लिए ऐसा कहना अजीब लगेगा। ऐसे स्‍टॉक चुनना जो ऊपर जाने वाले हों, खरीद को सही तरह से टाइम करना और इस बात की अच्‍छी समझ होना कि अर्थव्‍यवस्‍था किस दिशा में जा रही है, इक्विटी इन्‍वेस्टिंग में यही बातें तो सबकुछ हैं। आप कुछ दिन पहले मुड़ कर देखें, खास कर 4 मई को। इस दिन रिजर्व बैंक ने ब्‍याज दरों में बदलाव की घोषणा की। जैसे ही रिजर्व बैंक ने कहा, चैयरमैन प्रेस कांफ्रेंस करने जा रहे हैं, इक्विटी मार्केट ईधर से उधर भागने लगा। मार्केट में अफरा-तफरी मच गई। मीडिया में इस पर तमाम तरह के सवाल पूछे जाने लगे। इस तरह के दिनों में आपको खुद से एक सवाल पूछना चाहिए। ऐसे दिनों में बफेट और मंगर क्‍या करेंगे? इसका जवाब आप जानते हैं। कुछ नहीं। न सिर्फ कुछ नहीं करेंगे बल्कि इस घटना पर गौर भी नहीं करेंगे। अगर आपने अपने स्‍टॉक्‍स अच्‍छी तरह से चुनें हैं और असेट अलॉकेशन सटीक है तो ऐसी गति‍विधियों को देखिए और मजा लीजिए।

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