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कितनी बड़ी मुश्किल है डेट फ़ंड टैक्स?

New debt fund tax: ये अच्छा नहीं है मगर ये आपके निवेश के लिए कितनी बड़ी समस्या है

New debt fund tax: ये अच्छा नहीं है मगर ये आपके निवेश के लिए कितनी बड़ी समस्या है

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डेट फ़ंड्स के साथ कुछ और फ़ंड्स पर लगा नया टैक्स मिला-जुला असर करने वाला है. बदलाव की इस ख़बर में कुछ अच्छा है और कुछ बुरा. या यूं कहें तो ज़्यादा ठीक रहेगा कि एक पहलू से ये ख़बर न्यूट्रल है और दूसरे पहलू से कुछ बुरी. मैं इसे अच्छी ख़बर बिल्कुल नहीं कह रहा हूं क्योंकि निवेश पर ज़्यादा टैक्स लगाना, बचत करने वालों के लिए अच्छी ख़बर कभी नहीं होती.

इसमें जो ख़बर न्यूट्रल है, वो ये कि टैक्स पहले से ज़्यादा होने के बावजूद, कम ही रीटेल निवेशकों पर इसका असर होगा. और जो होगा, वो भी सीमित ही रहेगा. अब बुरी ख़बर ये है कि असल में ये बदलाव सही नहीं है, क्योंकि ये वाजिब टैक्स (fair taxation) के बुनियादी सिद्धांत के ख़िलाफ़ है. किसी भी वाजिब टैक्स से क़दम पीछे हटा लेना, पहले क़दम पर ही नहीं थम जाता—समय के साथ और ग़ैर-वाजिब, और ग़लत होता जाता है.

तो असल में बदला क्या है? इस साल 24 मार्च को बजट पास होने के ठीक पहले, सरकार ने बजट में एक संशोधन शामिल किया है, जिसमें डेट फ़ंड्स, गोल्ड फ़ंड्स और कुछ हाईब्रिड म्यूचुअल फ़ंड्स में निवेश पर मिलने वाले इंडेक्सेशन (indexation) के फ़ायदों को ख़त्म कर दिया है. इसका नतीजा ये हुआ है कि जिन म्यूचुअल फ़ंड्स में 35 प्रतिशत से कम घरेलू इक्विटी (domestic equity) का हिस्सा था, वो कैपिटल गेन्स के लिए क्वालिफ़ाई नहीं करेंगे. अगर आप उन्हें लंबे अर्से के लिए होल्ड करते हैं तब भी नहीं. ऐसे में भी उनसे मिले किसी भी मुनाफ़े को ख़रीदे जाने वाले साल की अतिरिक्त आय के तौर पर देखा जाएगा, और आपके इनकम टैक्स ब्रैकेट के मुताबिक़ उस पर टैक्स लगेगा.

अब, इन फ़ंड्स के मुनाफ़े पर दिया जाने वाला टैक्स ज़्यादा ऊंचा होगा, क्योंकि इसमें आपके मुनाफ़े को कैलकुलेट करते समय इंडेक्सेशन का विकल्प ख़त्म हो जाएगा. यहां ये समझना ज़रूरी है कि कैपिटल गेन का इंडेक्सेशन, मुनाफ़े को महंगाई से एडजस्ट करने का एक ज़रिया भर है. ये सरकार से मिली कोई टैक्स की छूट या गिफ़्ट नहीं है. इसके बजाए, ये तो समय के साथ महंगाई से जो नुक़सान होता है, और उससे लंबे समय में मुनाफ़े का जो भ्रम होता है, उसकी भरपाई का तरीक़ा भर है. महंगाई की वजह से आपके निवेश किए पैसे की असल क़ीमत कम हो जाती है, जो सरकार के काम का साइड-इफ़ेक्ट होता है. इसलिए, महंगाई की वजह से मिलने वाले मुनाफ़े पर कोई टैक्स लगाना सही नहीं है. यही इस टैक्स को ग़लत बना देता है.

बुरी ख़बरों को छोड़ना बेहतर

हालांकि, इसका असर कम ही होगा. AMFI और इंडस्ट्री के कुछ लोगों ने मुझे जो बताया है, उसके मुताबिक़ इसके दायरे में आने वाले AUM के जिन फ़ंड्स असर होगा, वो कुल ₹4.5 लाख करोड़ के होंगे और अब तक इन्हें तीन साल हो चुके हैं. एक मोटे-मोटे संकेत के तौर पर अगर हम मान लें कि ये रिडेम्शन प्वाइंट है, जो 7.5 से 8 प्रतिशत सालाना का रिटर्न प्रोजेक्ट कर रहा है, और ये भी मान लें कि AUM का मुनाफ़ा एक चौथाई हुआ है. तो, 31 मार्च 2023 को ख़त्म होने वाले पुराने सिस्टम में, इस 25 प्रतिशत मुनाफ़े पर इंडेक्सेशन का फ़ायदा कम होकर 12 प्रतिशत रह जाएगा. ₹54,000 करोड़ पर टैक्स की रक़म ₹4.5 करोड़ होगी. 20 प्रतिशत पर, टैक्स की रक़म ₹10,800 करोड़ होगी.

नए नियमों के मुताबिक़, बिना इंडेक्सेशन के, अगर हम मान लेते हैं कि ये, अलग-अलग टैक्स स्लैब वाले निवेशकों का मिला-जुला पैसा है, और वेटेज एवरेज टैक्स प्रतिशत भी 20 प्रतिशत का है. तो, इसका मतलब होगा कि टैक्स की रक़म ₹1.13 लाख करोड़ होगी, और उस पर ₹22,500 करोड़ का टैक्स होगा. अनुपात के लिहाज़ से ये एक बड़ा फ़र्क़ है, मगर जब आप इसे पूरी इंडस्ट्री की एक सांकेतिक राशि के तौर पर देखते हैं, तो ये रक़म उतनी बड़ी भी नहीं है.

इस नंबर को देखने का एक तरीक़ा और है कि पूरी इंडस्ट्री के AUM में इंडिविजुअल निवेश पता करें. ये आंकड़ा तक़रीबन 2.25 लाख करोड़ का होता है. फिर वही कहना होगा कि ये किसी भी तरह से गेम चेंजर नहीं कहा जा सकता. तो निवेशकों को इनमें से हरेक तरह के फ़ंड को लेकर क्या करना चाहिए? जहां तक बैंक फ़िक्स्ड डिपॉज़िट का सवाल है, उनके मुक़ाबले डेट फ़ंड अब भी काफ़ी काम के लगते हैं. इसके दो कारण हैं, लिक्विडिटी और कंपाउंडिंग की ताक़त. FD में लिक्विडिटी और बुरी है, और इसमें हर क्वार्टर में टैक्स काटा जाता है. इसलिए, रिटर्न का रेट अगर नॉमिनल तरीक़े से एक सा भी है, तो भी आप फ़ंड में ज़्यादा कमाते हैं और किसी भी समय आसानी से पैसे निकाल सकते हैं. इसके अलावा कुछ और टैक्स-फ़्री विकल्प हैं, जैसे - PPF, EPF और NPS, जो आपके लिए बेहतर हो सकते हैं. जहां तक इंटरनेशनल फ़ंड्स का सवाल है, तो मैं उम्मीद करता हूं कि विदेशी इक्विटी वाले डोमेस्टिक फ़ंड ज़्यादा आकर्षक होंगे क्योंकि इनमें टैक्स कम होगा. अब इसके बाद केवल गोल्ड फ़ंड ही बचते हैं, जिनके लिए, गोल्ड बॉन्ड्स का विकल्प ज़्यादा दिलचस्प है.

सारी बातें समझने के बाद, निवेशकों पर पड़ने वाला असली असर कम ही होगा और आसानी से डील किया जा सकता है.

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