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EPS: रिटायरमेंट के बाद की मुश्किलों से बचना है तो...

EPFO अपने 94% पेंशनर्स को ₹3,000 से कम पेंशन दे रहा है, आगे भी बहुत से रिटायर होने वालों के लिए ये एक हक़ीक़त हो सकती है, मगर शायद नहीं भी

EPFO अपने 94% पेंशनर्स को ₹3,000 से कम पेंशन दे रहा है, आगे भी बहुत से रिटायर होने वालों के लिए ये एक हक़ीक़त हो सकती है, मगर शायद नहीं भी

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अगर आपकी नौकरी प्राइवेट सेक्‍टर की है, तो इम्प्लॉइज़ पेंशन स्‍कीम (EPS) आपकी पेंशन का ज़रिया हो सकती है. अब अगर आप सोचेंगे कि रिटायर होने पर इस स्कीम से आपको पेंशन मिलेगी और उससे कम से कम आपकी बुनियादी ज़रूरतें तो पूरी हो जाएंगी, तो शायद आप जन्‍नत की हक़ीक़त से वाकिफ नहीं हैं.

जन्‍नत की हक़ीक़त यानी?
कल क्‍या होगा इसकी गारंटी तो कोई नहीं दे सकता. लेकिन आज जो हो रहा है, उससे कल के बारे में मोटा-मोटा अंदाज़ा लगाया ही जा सकता है. तो जन्‍नत की हक़ीक़त ये है कि इस वक़्त EPS से पेंशन पाने वाले 72 लाख लोग हैं. EPFO के आंकड़े कहते हैं कि इन 72 लाख पेंशनर्स में से 94% को ₹3,000 से कम पेंशन मिल रही है.

कम पेंशन की वजह
EPFO के एक अधिकारी ने इसकी वजह, कम कॉन्ट्रीब्‍यूशन और PF फ़ंड से प्री-मैच्‍योर पैसे निकालना बताया है, और साथ ही इसके लिए जमा किए गए PF पर कम रिटर्न को भी ज़िम्मेदार ठहराया है. असल में आज से नहीं, पिछले क़रीब दो दशकों से EPFO इन दिक्‍कतों की बात कर रहा है. और इसमें सुधार के लिए क्‍या किया गया, तो इसका जवाब है-कुछ नहीं. अधिकारियों का कहना है कि सरकार पिछले दो दशकों से NPS को बढ़ावा देने में जुटी है. सरकार इस स्‍कीम को इसलिए आकर्षक नहीं बनाना चाहती क्‍योंकि इससे NPS की संभावनाओं पर असर पड़ेगा. EPS स्‍कीम में सरकार की लायबिलिटी है. यानी, सरकार हर EPFO मेंबर के EPS अकाउंट में 1.16% कॉन्ट्रीब्यूट करती है, और सरकार नहीं चाहती कि उसकी ये ज़िम्मेदारी और बढ़े. वहीं, NPS में प्राइवेट सेक्‍टर के कर्मचारियों के लिए सरकार को अपने पास से कुछ नहीं देना होता.

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इसका हल क्या है
EPFO की अपनी स्‍टडी रिपोर्ट में इस परेशानी को दूर करने का रास्‍ता भी बताया गया है. रास्‍ता ये है कि सब्‍सक्राइबर की कुल सैलरी पर ही PF कटे. इस तरह से PF में योगदान बढ़ेगा. इससे रिटायरमेंट फ़ंड की रकम बढ़ जाएगी. लेकिन इससे पेंशन नहीं बढ़ेगी. पेंशन बढ़े इसके लिए जरूरी है कि सरकार EPS में कॉन्ट्रीब्‍यूशन की अधिकतम सीमा को बढ़ाए। अभी ये सीमा ₹1,250 है। लेकिन यहां परेशानी ये है कि इससे सरकार को EPS में ज़्यादा पैसा देना होगा. EPFO के पूर्व सेंट्रल PF कमिश्‍नर के. के. जालान ने क़रीब एक दशक पहले पूरी सैलरी पर PF काटने का सुर्कलर जारी किया था. लेकिन इंडस्‍ट्री के दबाव में सरकार ने इस सुर्कलर को रोक दिया. असल में होता ये है कि लंबे समय से कर्मचारियों की सैलरी के एक बड़े हिस्‍से को अलाउंस में बांट दिया जाता है, और बेसिक सैलरी जानबूझ कर कम रखी जाती है. PF कॉन्ट्रीब्यूशन बेसिक सैलरी पर ही होता है, इसलिए PF अकाउंट में कम पैसा जमा होता है, और रिटायरमेंट कॉर्पस भी कम बनता है.

हमारी राय
अब अगर आप अपना रिटायरमेंट ग़रीबी में नहीं बिताना चाहते, तो आपके पास दो विकल्‍प हैं. एक तो आप PF अकाउंट में अपना कॉन्ट्रीब्यूशन बढ़ा सकते हैं. और ऐसा आप VPF यानी वॉलेंटरी प्रॉविडेंट फ़ंड के तहत कर सकते हैं. इसके तहत आप अपना कॉन्ट्रीब्यूशन बेसिक सैलरी और DA का 100 फ़ीसदी तक कर सकते हैं. लेकिन इसमें इम्‍पलॉयर कंट्रीब्‍यून नहीं बढ़ेगा. इस तरीक़े से आपकी इन-हैंड सैलरी कम हो जाएगी लेकिन रिटायरमेंट कॉर्पस बढ़ जाएगा.

इक्विटी है दूसरा ऑप्‍शन
दूसरा विकल्प ये है कि आप इक्विटी म्‍यूचुअल फ़ंड में SIP शुरू करें. अगर आपका रिटायरमेंट अभी दूर है, जो ये आपके लिए बेहतर ऑप्‍शन हो सकता है. इक्विटी इकलौती एसेट क्‍लास है, जो लंबे समय में रियल रिटर्न दे सकती है. रियल रिटर्न यानी महंगाई दर से 3-4% ज़्यादा रिटर्न. आप इस रक़म को रिटायरमेंट कॉर्पस के तौर पर इस्‍तेमाल करें. इस तरह से आप रिटायरमेंट के बाद ग़रीबी से बच सकते हैं.

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ये लेख पहली बार अप्रैल 05, 2023 को पब्लिश हुआ.

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