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स्मॉल कैप के लिए मुश्क़िल रहा साल, फिर कैसे इस फ़ंड ने दिया 20% का रिटर्न?

TRUSTMF स्मॉल कैप फ़ंड और उसके बेंचमार्क के बीच यह फ़र्क़ क़िस्मत नहीं बल्कि यह स्ट्रैटेजी थी.

TRUSTMF स्मॉल कैप फ़ंड और उसके बेंचमार्क के बीच यह फ़र्क़ क़िस्मत नहीं बल्कि यह स्ट्रैटेजी थी.Vinayak Pathak/AI-Generated Image

सारांशः एक स्मॉल-कैप फ़ंड ने पिछले साल 20 प्रतिशत रिटर्न दिया. कैटेगरी का औसत 6% था. बेंचमार्क ने 3 प्रतिशत रिटर्न दिया. इतना बड़ा फ़र्क़ सिर्फ़ क़िस्मत से नहीं आता. लेकिन यह एक सवाल ज़रूर उठाता है जिसका जवाब हर बेहतर प्रदर्शन करने वाले फ़ंड को आख़िरकार देना पड़ता है.

TRUSTMF स्मॉल कैप फ़ंड ने पिछले साल क़रीब 20% रिटर्न दिया. स्मॉल-कैप कैटेगरी का औसत क़रीब 6% रहा. बेंचमार्क BSE 250  स्मॉल कैप TRI ने 3.19% दिया.

फ़र्क़ इतना बड़ा हो तो पूछना ज़रूरी हो जाता है: फ़ंड के लिए क्या सही रहा?

TRUSTMF स्मॉल कैप फ़ंड के बेहतर प्रदर्शन की वजह

यह बेहतर प्रदर्शन किसी क़िस्मत के भरोसे लगाए गए दांव या कुछ ही जगहों पर केंद्रित निवेश का नतीजा नहीं था. बल्कि, यह उस समय में ज़्यादा ग्रोथ वाली कंपनियों की ओर लगातार झुकाव रखने का नतीजा था, ऐसे वक़्त में जब बाज़ार हर दूसरी चीज़ से ज़्यादा एक ही बात को महत्व दे रहा था: कमाई की विज़िबिलिटी, यानी यह भरोसा कि कंपनी का प्रॉफ़िट उम्मीद के मुताबिक़ बढ़ता रहेगा.

फ़ंड का पोर्टफ़ोलियो अर्निंग में सालाना 25 से 30 प्रतिशत ग्रोथ को लक्ष्य बनाता है, जो लार्ज कैप के क़रीब 13% और स्मॉल-कैप बेंचमार्क के 19 से 20 प्रतिशत से काफ़ी आगे है. इसी ग्रोथ के फ़र्क़ ने मुख्य काम किया.

इसका फ़ायदा कई सेक्टर में मिला. कैपिटल गुड्स और कंस्ट्रक्शन ने अच्छा प्रदर्शन किया. कंज़्यूमर डिस्क्रेशनरी, कैपिटल मार्केट से जुड़े कारोबार और चुनिंदा NBFC ने अच्छा योगदान दिया. फ़ार्मास्यूटिकल्स और ऑटो एंसिलरी में स्टॉक के चुनाव से भी फ़ायदा हुआ. यह बेहतर प्रदर्शन सिर्फ़ बड़े आर्थिक अनुमानों से नहीं, बल्कि कंपनियों के चुनाव से आया.

GARV पर ज़ोर

फ़ंड के तरीक़े की बुनियाद में है GARV, यानी उचित वैल्यूएशन पर ग्रोथ. सीधे शब्दों में: लंबे समय में ज़्यादा ग्रोथ की क्षमता वाले कारोबार पहचानें, लेकिन पहले नहीं उन्हें तभी ख़रीदें जब क़ीमत उस वैल्यू को दर्शाए.

यह सोच जानी-पहचानी है. लेकिन इसे लागू करने में एक अलग पेंच है.

ज़्यादातर फ़ंड अपनी वैल्यूएशन को दो से तीन साल की कमाई के अनुमानों पर आधारित करते हैं. TRUST म्यूचुअल फ़ंड उस पर काफ़ी ज़ोर देता है जिसे एनालिस्ट टर्मिनल वैल्यू कहते हैं, यानी वो वैल्यू जो कोई बिज़नेस, नज़दीकी भविष्य के अनुमानों से कहीं आगे जाकर, कभी-कभी तो दशकों बाद तक भी पैदा करता है.

TRUST म्यूचुअल फ़ंड के CIO मिहिर वोरा इस तर्क को समझाते हैं: "लंबे समय तक बढ़ने की क्षमता वाली कंपनियों के लिए, वैल्यूएशन का एक बड़ा हिस्सा, जो अक्सर 70 से 80 प्रतिशत होता है, अगले 5 से 8 साल से भी आगे की कमाई से आता है." 

व्यवहार में, यह निवेश का सवाल बदल देता है. इसके बजाय कि कोई कंपनी अगले दो साल में बढ़ सकती है या नहीं, फ़ंड पूछता है कि मौक़ा कितना बड़ा है, प्रतिस्पर्धा में बढ़त कितनी मज़बूत है और ग्रोथ कितने लंबे समय तक चल सकती है. यह लंबा और मुश्किल सवाल है. इससे चुनाव भी काफ़ी कम हो जाता है.

पोर्टफ़ोलियो स्ट्रैटेजी: फ़ंड किस पर दांव लगाता है और क्या छोड़ता है

फ़ंड जानबूझकर एनर्जी और यूटिलिटीज़ से दूर रहता है, जो ऐसे सेक्टर हैं जहां कमाई कमोडिटी साइकिल और किसी भी कंपनी के बाहर के नियामकीय फ़ैसलों पर निर्भर है. झुकाव उन कारोबारों की तरफ़ है जो लंबे समय से लगातार बढ़ रहे हैं: NBFC, कैपिटल मार्केट से जुड़े कारोबार, प्रीमियम कंज़म्पशन और ऑनलाइन रिटेल.

इनमें भी पोज़िशनिंग सक्रिय रही है. जब वैल्यूएशन में गिरावट के बाद एंट्री का मौक़ा बेहतर हुआ तो फ़ाइनेंशियल एक्सपोज़र बढ़ाया गया. टेक्नोलॉजी में, जब AI से बाधा का जोख़िम बड़ा लगा तो एक्सपोज़र कम किया, फिर मिड और स्मॉल-कैप IT के उन नामों में तेज़ गिरावट के बाद चुनिंदा तरीक़े से वापस बनाया जिनमें असली ग्रोथ की संभावना बची थी.

फ़ंड की ख़ूबी है कि यह बदलाव की थीम जल्दी पकड़ता है, जैसे रिन्यूएबल एनर्जी, डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म, बदलते कंज़म्पशन पैटर्न. साथ ही, थीसिस के साकार होने का इंतज़ार करते हुए भरोसे के साथ टिका रहता है.

क्या यह बेहतर प्रदर्शन दोहरा सकता है?

जिस साल बेंचमार्क सिर्फ़ 3 प्रतिशत कमाए उस साल 20% रिटर्न एक अच्छा नतीजा है. इससे वो सवाल भी उठता है जिसका सामना हर बेहतर प्रदर्शन करने वाले फ़ंड को करना पड़ता है.

GARV फ्रेमवर्क और लॉन्ग-ड्यूरेशन वैल्यूएशन का नज़रिया असली अंतर पैदा करने वाले हैं, जो एक साल का दांव नहीं है. लेकिन ग्रोथ-ओरिएंटेड स्मॉल-कैप फ़ंड तब बेहतर करते हैं जब कमाई की संभावनाओं को इनाम मिलता है और तब पिछड़ते हैं जब बाज़ार वैल्यू या डिफ़ेंसिव सेक्टर्स की तरफ़ मुड़ता है. प्रक्रिया एक जैसी है. एक जैसी रहती है, लेकिन बाज़ार का माहौल हमेशा एक जैसा नहीं रहता.

यह जानना कि इस तरह का फ़ंड आपके पोर्टफ़ोलियो में होना चाहिए या नहीं, और कितना, यह एक अच्छे साल से ज़्यादा पर निर्भर करता है. वैल्यू रिसर्च फ़ंड एडवाइज़र आपको बताता है कि कौन से फ़ंड रखें, कौन से छोड़ें और आगे क्या ख़रीदें.

जो निवेशक पहले से ही इस फ़ंड में में निवेशित हैं, उनके लिए प्रोसेस की कंसिस्टेंसी किसी एक साल के रिटर्न से ज़्यादा मायने रखती है. जो इस पर विचार कर रहे हैं, उनके लिए ज़्यादा काम का सवाल यह नहीं है कि क्या फ़ंड ने पिछले साल अपने बेंचमार्क को मात दी या नहीं. बल्कि, यह है कि क्या यह निवेश की सोच अगले पांच साल के लिए सही है.

GARV तरीक़े को एक साल के अच्छे प्रदर्शन पर नहीं, पांच साल के नज़रिए पर आंकें.

यह भी पढ़ें:  साल भर में 252% रिटर्न, लेकिन नए निवेशक नहीं लगा सकते पैसा, क्यों?

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