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धनक डायरीः ETF रिटर्न बढ़ाने को यह बदलाव करेगा EPFO! काम की खबरें

EPFO ने सब्सक्राइबर्स के रिटर्न में सुधार के लिए ETFs से जुड़ी रिडेम्पशन पॉलिसी में बदलाव करने का प्रस्ताव किया है

EPFO ने सब्सक्राइबर्स के रिटर्न में सुधार के लिए ETFs से जुड़ी रिडेम्पशन पॉलिसी में बदलाव करने का प्रस्ताव किया है

EPFO अपने सब्सक्राइबर्स के लिए रिटर्न बढ़ाने के उद्देश्य से बड़े बदलाव की तैयारी में है. इसके अलावा, इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने टैक्सपेयर्स को एक अच्छी खबर दी है. दरअसल, उसने निर्धारित समय से तीन महीने पहले ही कॉस्ट इन्फ्लेशन इंडेक्स जारी कर दिया है. जानिए आपके काम की खबरे...

ETF के लिए रिडेम्पशन पॉलिसी बदलेगा EPFO
सब्सक्राइबर्स के लिए रिटर्न में सुधार करने और उनकी इनकम को मार्केट के उतार-चढ़ाव से बचाने के लिए इम्प्लॉइज प्रॉविडेंट फंड ऑर्गनाइजेशन (EPFO) ने एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETFs) की यूनिट्स से जुड़ी रिडेम्प्पशन पॉलिसी में बदलाव करने का फैसला किया है. समझा जाता है कि EPFO के सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज की हाल की बैठक में इस पर चर्चा हुई है और इसे मंजूरी दे दी गई है. रिटायरमेंट फंड मैनेजर ने इस बैठक में ETF को रिडीम करने से पहले न्यूनतम होल्डिंग पीरियड को "चार साल से बढ़ाने" का प्रस्ताव किया है. वर्तमान में इन यूनिट्स को चार साल में भुनाया जा सकता है.

फ़ाइनेंशियल एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, EPFO, ETF यूनिट्स के रिटर्न थ्रेसहोल्ड को सरकारी सिक्योरिटीज को भी लिंक कर सकता है.

एक अन्य सुझाव ETF रिटर्न को ऐतिहासिक दीर्घकालिक औसत पर बेंचमार्क करना है. इस क्रम में, रिडीम की जाने वाली इकाइयों का होल्डिंग पीरियड का रिटर्न निफ्टी या सेंसेक्स के आधार पर पिछले 10 वर्षों में औसत पांच साल के रिटर्न से ऊपर होना चाहिए.

शॉर्ट टर्म में बाजार के उतार-चढ़ाव से रिडेम्पशन को बचाने के लिए, EPFO ने दैनिक आधार पर रिडेम्पशन का प्रस्ताव भी किया है. वर्तमान में, रिडेम्पशन कम समय में किया जाता है.

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टैक्स डिपार्टमेंट ने जारी किया Cost Inflation Index
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की ओर से वित्त वर्ष 2023-24 के लिए कॉस्ट इन्फ्लेशन इंडेक्स (CII) जारी कर दिया गया है. इसका उपयोग स्थायी संपत्तियों, सिक्योरिटीज और ज्वेलरी की बिक्री के कारण हुए लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन की गणना करने के लिए किया जाता है. सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज (CBDT) की ओर से जारी नोटिस में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2023-23 के लिए सीआईआई 348 होगा. आमतौर पर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की ओर से CII की घोषणा हर साल जून महीने में की जाती है. पिछले वित्त वर्ष के लिए सीआईआई 331 था, जबकि वित्त वर्ष 2021-22 के लिए 317 था.

टैक्सपेयर्स को होगा क्या फ़ायदाः टैक्सपेयर्स कैपिटल एसेट्स की बिक्री से हुए लाभ की गणना करने के लिए CII का उपयोग करते हैं. इसमें लाभ की गणना करते समय महंगाई को भी समायोजित किया जाता है. इस साल कॉस्ट इन्फ्लेशन इंडेक्स को तीन महीने पहले से जारी कर दिया गया है. इससे टैक्सपेयर्स को राहत मिलेगी और वे चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही के लिए लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन का आसानी से और जल्दी गणना कर पाएंगे.

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इनवेस्टर्स को डायरेक्ट प्लान्स का ऑप्शन देंगे AIF, Sebi का फैसला
SEBI ने खर्च में पारदर्शिता लाने और गलत तरीके से बिक्री पर लगाम लगाने के लिए अल्‍टरनेटिव इन्‍वेस्‍टमेंट फंड्स (Alternative Investment Funds) यानी AIF से निवेशकों को 'डायरेक्ट प्लान' का विकल्प देने को कहा है. इसके अलावा, SEBI ने कमीशन डिस्ट्रिब्‍यूशन के लिए चरणबद्ध मॉडल शुरू करने को भी कहा है और AIF के निवेश से किसी निवेशक को बाहर निकलने के संबंध में दिशानिर्देश जारी किए हैं.

जानिए क्या है इसका मतलबः डायरेक्ट प्लान्स से इन्वेस्टर्स को खर्च बचाने में मदद मिलेगी और अप्रत्यक्ष रूप से फैमिली ऑफिसेज और स्वतंत्र एडवाइजर्स को फ़ायदा होगा, जो मुख्य रूप से फीस आधारित मॉडल पर निर्भर हैं. इससे म्यूचुअल फंड्स और PMS के साथ भी समान अवसर मिलेंगे, जो ऐसे ही प्लान्स की पेशकश करते हैं.

HDFC Bank ने इन लोन्स के लिए 85 बीपीएस घटाई MCLR
प्राइवेट सेक्टर के सबसे बड़े लेंडर एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) के ग्राहकों के लिए अच्छी खबर है. बैंक ने कुछ चुनिंदा टेन्योर के लिए मार्जिनल कॉस्ट बेस्ड लेंडिंग रेट (MCLR) में 85 बेसिस प्वाइंट तक की कटौती की है. नए रेट 10 अप्रैल से ही लागू हो गए हैं. रिज़र्व बैंक (Reserve Bank) ने हाल में रेपो रेट (Repo rate) में कोई बदलाव नहीं किया था. इसके बाद एमसीएलआर में कटौती करने वाला एचडीएफसी देश का पहला बैंक है. इस कटौती के बाद ओवरनाइट एमसीएलआर 7.80 परसेंट रह गया है। पहले यह 8.65 परसेंट था. इसके अलावा, एक महीने, तीन महीने और छह महीने की अवधि के लिए भी MCLR में बदलाव किया गया है.

किसे होगा फ़ायदाः MCLR में कटौती से HDFC Bank से होम लोन लेने वालों को कोई फायदा नहीं होगा क्योंकि अधिकांश होम लोन HDFC Ltd से लिए गए हैं. इससे केवल उन्हीं लोगों को फायदा होगा जिनके लोन MCLR से जुड़े हैं. इसमें कुछ पुराने पर्सनल और ऑटो लोन (फ्लोटिंग रेट लोन्स) शामिल हैं.

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