
मार्च महीने में म्यूचुअल फंड्स इक्विटी मार्केट में दांव लगाने में ख़ासे व्यस्त रहे. इसकी मुख्य कारण निफ़्टी और सेंसेक्स का लगभग 6 महीने के निचले स्तर पर आने से इक्विटी मार्केट की आकर्षक वैल्युएशन रहा. यही वजह है कि देश के टॉप 10 म्यूचुअल फंड्स की कैश होल्डिंग नौ महीने के निचले स्तर पर पहुंच गई.
मार्च 2023 के अंत में टॉप 10 म्यूचुअल फंड्स की कैश होल्डिंग 40,880 करोड़ रुपये के स्तर पर थी, जो फ़रवरी 2023 के 43,672 करोड़ रुपये की तुलना में 6.40 फ़ीसदी कम रही. इससे पहले, जून 2022 में इन म्यूचुअल फंड्स की कैश होल्डिंग 40,011 करोड़ रुपये रही थी.
पिछले एक साल में सबसे ज़्यादा 58,535 करोड़ रुपये की कैश होल्डिंग सितंबर 2022 में रही थी. इसके अलावा नवंबर-दिसंबर 2022 की कैश होल्डिंग 50,000 करोड़ रुपये के आसपास बनी हुई थी. ख़ास बात ये है कि 1 दिसंबर के आसपास ही सेंसेक्स 63,000 के ऊपर जा कर अपने ऑल-टाइम हाई पर पहुंचा.
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क्यों घट रही कैश होल्डिंग
साफ़ है कि म्यूचुअल फंड्स, बाज़ार में तेज़ी के दौरान कैश रखने को तरजीह दे रहे हैं. इसी तरह, मार्च में बाज़ार में गिरावट के दौरान कैश होल्डिंग में ख़ासी कमी देखने को मिली है. मार्च में अमेरिका और यूरोप में बैंकिंग संकट के चलते ग्लोबल मार्केट में भारी बिकवाली के बीच S&P BSE सेंसेक्स 57,085 के स्तर पर और निफ़्टी ने 17,000 का स्तर तोड़ दिया था. वहीं, मार्च में निफ़्टी 50 का प्राइस-टू-अर्निंग (P) रेशियो घटकर 21 गुने पर आ गया था, जबकि सितंबर 2021 में ये 32 गुने के आसपास था.
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जनवरी-मार्च तिमाही में लगाए 55,000 करोड़ रुपये
2022-23 की जनवरी-मार्च तिमाही के दौरान म्यूचुअल फंड्स घरेलू स्टॉक्स में 55,000 करोड़ रुपये लगाए, जबकि इससे पिछली तिमाही यानी अक्टूबर-दिसंबर के दौरान महज़ 22,700 करोड़ रुपये निवेश किए थे.
पिछले महीने म्यूचुअल फंड स्कीम्स में बड़ी मात्रा में निवेश से इक्विटी में इनफ़्लो को सपोर्ट मिला. मार्च में एक्टिव इक्विटी स्कीमों में कुल निवेश बढ़कर 20,500 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया, जो लगभग 12 महीने का हाई है. ये निवेश SIP और एकमुश्त दोनों तरीक़ों से किया गया था.
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