SIP सही है

रेकरिंग डिपॉज़िट या म्यूचुअल फंड SIP: क्या बेहतर है?

पोस्ट ऑफिस के Recurring Deposit की ब्याज दर में हाल में बढ़ी है. पर क्या SIP से उसकी तुलना सही है?

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मार्च 2023 में सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के ज़रिये म्यूचुअल फंड का इनफ़्लो क़रीब 3 फ़ीसदी बढ़कर ₹14,276 करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया. ये पहली बार है कि किसी एक महीने में आंकड़ा ₹14,000 करोड़ से ज़्यादा हुआ है. वहीं, म्यूचुअल फंड्स के कुल एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) में SIP की हिस्सेदारी बढ़कर, रिकॉर्ड 17.3 फ़ीसदी पर पहुंच गई. हालांकि, म्यूचुअल फंड्स के AUM में SIP वाली स्कीमों का लॉन्ग टर्म एवरेज शेयर 11.8 फ़ीसदी है.

साफ़ है कि ब्याज दरें बढ़ने के बावजूद, म्यूचुअल फंड्स में निवेश को लेकर इन्वेस्टर्स के जोश पर कुछ ख़ास फ़र्क़ नहीं पड़ा है. हालांकि, SIP की तरह, हर महीने निवेश के दूसरे विकल्प, पोस्ट ऑफिस रेकरिंग डिपॉजिट (Post Office RD) को सरकार की तरफ से तगड़ा बूस्ट मिला. दरअसल, अप्रैल-जून 2023 तिमाही के लिए RD की ब्याज दर 5.8 फ़ीसदी से बढ़ाकर 6.2 फ़ीसदी कर दी गई. ऐसे में ये सवाल उठ रहा है कि मौजूदा वक़्त में Post Office RD और Fund SIP में से बेहतर क्या है.

पोस्ट ऑफ़िस RD
Post Office RD: ये काफ़ी हद तक SIP की तरह काम करती है. इसमें निवेशक हर महीने एक फ़िक्स्ड रक़म निवेश करते हैं और अपनी ज़रूरतों के लिए एक पूंजी जोड़ते हैं. आमतौर पर इनमें हर महीने की आखिर में निवेश किया जाता है.

RD पर टैक्स भी लगता है. न तो इसमें किए गए निवेश पर और न ही इस पर मिले ब्याज पर टैक्स छूट मिलती है. इस पर टैक्स स्लैब के आधार पर टैक्स देना होता है.

RD एक तरह का डेट इंस्ट्रुमेंट (debt instrument) है. पोस्ट ऑफ़िस RD को कभी भी बंद किया जा सकता है और पैसा निकाला जा सकता है. हालांकि, बीच में बंद करने पर आपको पोस्ट ऑफ़िस सेविंग अकाउंट के बराबर ही ब्याज मिलता है.

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सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP)
RD की तुलना में MF SIP में ज़्यादा लचीलापन है. आप इसमें रोज़, हफ़्तावार, हर 15 दिन, हर महीने, तिमाही या सालाना निवेश कर सकते हैं. जहां RD एक डेट इंस्ट्रुमेंट है, वहीं म्यूचुअल फंड आपको SIP के ज़रिये इक्विटी में निवेश का मौक़ा देते हैं.

RD की तुलना में आप SIP को आसानी से बंद कर सकते हैं या पैसा निकाल सकते हैं. सिर्फ़ इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम्स (ELSS) से जुड़ी SIP में ही तीन साल का लॉक-इन होता है. वो फ़ंड्स जो ELSS नहीं हैं, उनमें आमतौर पर कोई लॉक-इन नहीं होता, लेकिन एक साल से कम समय में पैसा निकालने पर आप पर एग्ज़िट लोड लग सकता है.

इसके अलावा, SIP में आपकी पूंजी को कोई सुरक्षा नहीं मिलती. दरअसल, आपका रिटर्न इक्विटी यानी शेयर बाज़ार से लिंक होता है. इसलिए कम समय में आपको नुक़सान भी हो सकता है, जैसा हमने कोविड के दौरान देखा.

RD Vs SIP: किसका रिटर्न कैसा है?
हम आपको बता चुके हैं कि RD में किया गया निवेश और उस पर हासिल ब्याज दोनों पर टैक्स लगता है. वहीं, लंबे समय में मिलने वाला रिटर्न भी आम तौर पर इनफ्लेशन से कम रहा है. इस तरह से, टैक्स के बाद के इस पर रिटर्न निगेटिव हो सकता है. तो, लंबे समय के निवेश के लिए इसे सही ज़रिया नहीं कहा जा सकता.

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दूसरी तरफ, SIP से मिलने वाला रिटर्न मार्केट से जुड़ा होता है. जब मार्केट बढ़ता है, तो आपकी म्यूचुअल फंड स्कीम ज़्यादा पैसा बनाती है और मार्केट में गिरावट पर नुक़सान होता है. हालांकि लंबे समय में डेट फंड्स की तुलना में इक्विटी फंड्स बेहतर प्रदर्शन करते रहे हैं.

धनक की राय
भले ही RD पर गारंटी के साथ रिटर्न मिलता है, लेकिन इस पर आपके टैक्स स्लैब के आधार पर टैक्स की मार भी पड़ती है. RD में इंटरेस्ट इनकम पर टैक्स के अलावा पोस्ट ऑफ़िस भी TDS काट लेते हैं. इससे कम्पाउंडिंग पर असर पड़ता है.

धनक की राय में, अगर लंबी अवधि यानी 5 साल से ज़्यादा समय के लिए निवेश करना चाहते हैं, तो आपको SIP के ज़रिये म्यूचुअल फंड्स को तरजीह देनी चाहिए. इससे आपको एक बड़ी पूंजी तैयार करने में मदद मिलेगी. टैक्स बचत के साथ-साथ कम्पाउंडिंग का फ़ायदा भी मिलेगा.

देखिए ये वीडियो- क्या नाती-पोतों को गिफ़्ट कर सकते हैं म्यूचुअल फ़ंड?

ये लेख पहली बार अप्रैल 26, 2023 को पब्लिश हुआ.

Disclaimer: यह कंटेंट सिर्फ़ जानकारी के लिए है और इसे निवेश सलाह या रेकमेंडेशन नहीं मानना चाहिए.

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