
बातचीत के इस हिस्से में भरत शाह बता रहे हैं कि भले ही P/E के लिहाज़ से वैलुएशन ज़्यादा लगे लेकिन असलियत काफ़ी अलग हो सकती है. वो नए निवेशकों के लिए भी कुछ सलाह दे रहे हैं. क्या क्वालिटी वाली कंपनियां आम तौर पर महंगे वैलुएशन पर ट्रेड नहीं करतीं? आप इसे कैसे देखते हैं वैलुएशन को लेकर आपका तरीक़ा क्या है? क्या ये पूरी तरह से गणित पर आधारित है या आप क्वालिटेटिव पहलू पर भी विचार करते हैं? जैसा कि पहले भी बताया जा चुका है इन्वेस्टिंग कला और विज्ञान दोनों है. इसके साथ ही ये गणित और भाषा भी है, जो इन्वेस्टिंग की कई तरह बारीकियां, मनोविज्ञान और भावनात्मक मेकअप बताती है.ये दोनों का मिश्रण है ये कभी भी एक नहीं है. भविष्य के बारे में अनुमान लगाना और इस पर विचार करना काफ़ी हद तक कला का मामला है और इससे निकलने वाले नतीजों को आंकड़ों में बयान किया जाता है. इसी तरह से मैनेजमेंट का आकलन करना विज्ञान कम और कला ज़्यादा है. वहीं कंपनी का आकलन करना एक अलग ही बात है. इन्वेस्टिंग की कला और भाषा निवेश की तकनीक और आंकड़ों के जरिए खुद को अभिव्यक्त करती है. ग्रोथ का स्तर, उसका स्थायित्व, पैटर्न और संभावनाएं आंकड़ों के आधार पर तय होती हैं . कैपिटल एफिशिएंसी और ग्रोथ की गुणवत्ता नतीजे हैं और इन नतीजों के निष्कर्ष को आंकड़ों के ज़रिए बयां किया जाता है. ये आकस्मिक, कई तरह के, लेकिन आपस में जुड़े हुए आंकड़ों का विज्ञान है जिसके ज़रिए इन्वेस्टिंग की कला और भाषा ख़ुद को सामने लाती है. लेकिन जैसा कि पहले बताया गया है, लोग उस चीज़ के साथ आसानी से जुड़ते हैं, जिसे मापा जा सके, ये ज़्यादा वास्तविक भी लगती है. लेकिन इन्वेस्टिंग में ऐसी चीज़ ज़्यादा मायने रखती है जिसे मापा न जा सके. इन्वेस्टिंग का गुणवत्ता वाला पहलू, मात्रा वाले पहलू से ज़्यादा अहम है. मैनेजमेंट के चरित्र का आकलन करना काफ़ी हद तक क्वालिटी के दायरे में आता है, लेकिन इसका एक हिस्सा गणित से भी जुड़ा है. जैसा कि फ़िलिप ने कहा है "इक्विटी पर शानदार रिटर्न अच्छे मैनेजमेंट का सबसे बड़ा पुरस्कार है." कंपनी की विशेषताओं के आकलन से कई पहलू जुड़े हैं जिनमें, अनुमान और विश्लेषण भी शामिल हैं. इसके साथ ही कई
ये लेख पहली बार मई 08, 2023 को पब्लिश हुआ.
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