
Mutual Fund: फंड हाउस आम तौर पर मजबूत फंडामेंटल वाले स्टॉक्स की खोज में अपना दायरा बढ़ाते जाते हैं. हालांकि, हाल के महीनों में ऐसा ज़्यादा नहीं हुआ है, क्योंकि उन्हें ऐसे स्टॉक कम ही मिले हैं. AMC के स्टॉक्स की क़ीमतों में सुस्ती के साथ उनकी कुछ पियर कंपनियां जोश में आ गई हैं. जोश में आने की वजह ये रही कि इससे उन्हें आकर्षक कीमतों पर कुछ मजबूत बिज़नेसेज में निवेश करने का मौका मिलता है.
ये बात PPFAS म्यूचुअल फंड और SBI म्यूचुअल फंड के मामले में सही बैठती है, जिन्होंने दिसंबर और मार्च के बीच क्रमशः UTI म्यूचुअल फंड और HDFC म्यूचुअल फंड में अपनी स्टेक बढ़ाई है. (इस संदर्भ में AMCs यानी एसेट मैनेजमेंट कंपनियों और म्यूचुअल फंड हाउस का एक ही मतलब है)
PPFAS म्यूचुअल फंड ने UTI AMC में हिस्सेदारी चार गुनी बढ़ा ली है यानी दिसंबर 2022 से मार्च 2023 के बीच हिस्सेदारी 0.66 फ़ीसदी से बढ़ाकर 2.52 फ़ीसदी कर ली है. वहीं, SBI म्यूचुअल फंड ने इस दौरान HDFC AMC में हिस्सेदारी छह गुनी करते हुए 0.46 फ़ीसदी से बढ़ाकर 2.97 फ़ीसदी कर ली है.
म्यूचुअल फंड बिज़नेस में, इतने कम समय के दौरान ओनरशिप में इतनी ज़्यादा बढ़ोतरी कोई सामान्य पैटर्न नहीं है.
ये भी पढ़िए- निवेश की चार सामान्य गलतियां
सभी की हुई पिटाई
कुल मिलाकर, स्टॉक एक्सचेंज में चार फंड हाउस UTI AMC, HDFC AMC, आदित्य बिड़ला सन लाइफ़ AMC और निप्पॉन लाइफ़ इंडिया AMC लिस्ट हैं. इनके स्टॉक्स की क़ीमतें बीते एक साल के दौरान लगभग 10-29 फ़ीसदी के बीच टूटी हैं. आगे दी गई टेबिल में गिरावट स्पष्ट रूप से देख सकते हैं.
कमजोरी की वजह
ये बात सही है कि बीते साल स्टॉक मार्केट का प्रदर्शन कमज़ोर रहा है, लेकिन AMC स्टॉक्स में गिरावट ख़ासी ज़्यादा रही है. इसकी वजह मुख्य रूप से इंटरेस्ट रेट में बढ़ोतरी रही, जिसके चलते डेट फंड (debt fund) की तगड़ी निकासी देखने को मिली.
मार्केट रेग्युलेटर SEBI द्वारा एक्सपेंस रेशियो में बदलाव की योजना से जुड़ी अफवाहों से भी सभी फंड हाउस को झटका लगा. इस संबंध में एक जाने-माने फंड एनालिस्ट ने कहा था, "AMC के मजबूत स्ट्रक्चरल बिज़नस के बावजूद, लगातार रेग्युलेटरी बदलावों के रूप में समस्याएं बनी हुई हैं."
गिरावट के बावजूद हैं मौके
हालांकि, उनके बिज़नस मजबूत बने हुए हैं, जिसके चलते दूसरे फंड हाउस स्टॉक की कीमतों में गिरावट को ख़रीदारी के मौके के तौर पर देख रहे हैं. नाम ज़ाहिर नहीं करने की शर्त पर एक फंड मैनेजर ने कहा, "AMC स्टॉक्स में ख़ासी गिरावट आई है और वर्तमान में उनकी कीमतें आकर्षक दिख रही हैं."
ये भी पढ़िए-ख़रीद लिए हैं ज़्यादा म्यूचुअल फ़ंड्स, तो ऐसे क्लीन करें पोर्टफ़ोलियो
इसके अलावा, इन AMCs के फंडामेंटल्स में ख़ास बदलाव नहीं हुआ है. फंड मैनेजर ने कहा कि वे लगातार इनफ्लो आकर्षित कर रहे हैं, उनकी एक उचित डिविडेंड पेआउट पॉलिसी है और ROCE (लगाई गई पूंजी पर रिटर्न) मजबूत बना हुआ है.
भले ही हाल के महीनों में शेयर बाज़ार में गिरावट के बावजूद AMC का बिज़नस मजबूत बना हुआ है, लेकिन पिछली बार हमने देखा था कि उनका प्रॉफ़िटेबिलिटी रेशियो मिलाजुला रहा. ये बात आगे दी गईं दो टेबिल्स 'AMC स्टॉक्स: लगाई गई पूंजी पर रिटर्न' और 'AMC स्टॉक्स: इक्विटी पर रिटर्न' से स्पष्ट होती है.
मजबूत डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन
इसके अलावा, AMCs अभी भी ख़ासा डिविडेंड दे रहे हैं, जिससे पता चलता है कि वे कैश की भूख़ी कंपनियां नहीं हैं.
निप्पॉन लाइफ़ इंडिया AMC के चेयरमैन संदीप सिक्का ने कंपनी की 2022 की सालाना रिपोर्ट में कहा था, "बोर्ड की मंजूरी के तहत, हमारी डिविडेंड पॉलिसी इनकम का 60 से 90 फ़ीसदी साझा करने की है." इत्तिफ़ाक़ से UTI AMC ने अपने नेट प्रॉफ़िट का 63.75 फ़ीसदी डिविडेंड के रूप में शेयरहोल्डर्स के साथ साझा किया था.
क्या ख़रीदारी का है मौका
प्रदर्शन के आधार पर देखें तो AMC स्टॉक्स निचले स्तरों पर मिल रहे हैं. लेकिन इन स्टॉक्स पर ये थीम काम कर रही है कि किसी की बदकिस्मती दूसरे शख्स के लिए मौका है. यही वजह है कि प्रतिस्पर्धी फंड हाउस इस मौके को भुना रहे हैं और फंडामेंटल्स के लिहाज से मजबूत कंपनियों के स्टॉक्स ख़रीद रहे हैं.
ये भी पढ़िए- क्या BSE100 में शामिल होते ही 'रॉकेट' बन जाते हैं शेयर?
Disclaimer: यह कंटेंट सिर्फ़ जानकारी के लिए है और इसे निवेश सलाह या रेकमेंडेशन नहीं मानना चाहिए.
शिकायतों के लिए संपर्क करें: [email protected]







