
आप ऐसे लोगों को जानते ही होंगे जो ठेले वालों और ऑटो-रिक्शा वालों को कम पैसे देने के लिए मोल-भाव करते हैं, और फिर उससे कहीं ज़्यादा पैसे बेकार की शॉपिंग में उड़ा देते हैं. चंद पैसे बचाने और बड़ी नोट उड़ाने की ये आदत अक्सर निवेश में भी दिखाई दे जाती है, ख़ासतौर पर जब आप एक ETF (exchange-traded fund) निवेशक हों. पिछले कुछ साल में, पैसिव इन्वेस्टर्स के बीच ETFs काफ़ी पसंद किए जाते हैं, इसकी असल वजह ETF का सस्ता होना है. पांच टॉप निफ़्टी-50 ETF का मीडियम एक्सपेंस रेशियो 0.07 परसेंट है, वहीं इंडेक्स फ़ंड इसके लिए 0.18 परसेंट चार्ज करते हैं. मगर क्या ETF का एक्सपेंस रेशियो कम होना उसे इंडेक्स फ़ंड से बेहतर बना देता है? चलिए देखते हैं. ETF vs Index Fund: बराबरी की टक्कर सही तुलना के लिए, हमने टॉप तीन निफ़्टी-50 ETF और पिछले पांच साल में उसी AMC के इंडेक्स फ़ंड को एनेलाइज़ किया. ETF के केस में, हमने एक दिन की एवरेज और लो प्राइस वाला आंकड़ा लिया, जो निवेशक के ट्रांज़ैक्शन प्राइस की तरह होता. इस प्रॉक्सी प्राइस के आधार पर मिलने रिटर्न की तुलना इंडेक्स फ़ंड से की गई, और हमें ये नतीजे मिले: ग़ौर करने वाली बात है कि सस्ते होने के बावजूद ETF ने हमेशा इंडेक्स फ़ंड से बेहतर परफ़ॉर्मेंस नहीं किया है. मगर हां, अलग-अलग ETF के लिए और टाइम होरा
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