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ETF Investment: पैसे लगाने से पहले पढ़ना ज़रूरी है

इनके ट्रेडिंग प्राइस के साथ समस्‍या है. लेकिन हमारे पास इस मुश्किल का हल है.

ETF Investment: पैसे लगाने से पहले पढ़ना ज़रूरी है

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ETF यानी एक्‍सचेंज ट्रेडेड फ़ंड. इन फ़ंड्स ने अपने लिए काफ़ी नाम कमाया है. ETF, म्‍यूचुअल फ़ंड का ही एक टाइप है, जो स्‍टॉक एक्‍सचेंज-Stock Exchange पर लिस्‍ट होते हैं और ट्रेड किए जाते हैं.

अगर आप इनमें निवेश करने का प्लान बना रहे हैं, तो हम आपको सतर्क करना चाहते हैं कि ETF की क़ीमतें अनुभवी निवेशकों को भी चकरा देने वाली हो सकती हैं. आइये समझते हैं कि ऐसा क्‍यों है?

ETF में क़ीमतों की असमानता की वज़ह
ETF, को पारंप‍रिक म्‍यूचुअल फ़ंड के सस्‍ते विकल्‍प के तौर पर देखा जाता है. इनको इस तरह से डिज़ाइन किया गया है कि ये निफ़्टी और सेंसेक्‍स जैसे इंडेक्स के प्रदर्शन को दोहराते हैं.

इसके बावज़ूद, ETF की दुनिया इतनी सीधी-सरल नहीं है, जितनी लगती है.

ऐसा इसलिए क्‍योंकि , ETF ट्रेडिंग क़ीमतें कभी-कभी बाज़ार में मांग और आपूर्ति की वज़ह से अपने NAV से काफ़ी ज्‍़यादा अलग हो जाती हैं. और ये अंतर, आपके रिटर्न पर बड़ा असर डाल सकता है. आइये देखते हैं, कैसे.

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केस स्‍टडी
आइये IDBI गोल्‍ड ETF के मामले पर विचार करें.

स्‍क़ीम का नाम दिनांक NAV (₹) क्‍लोजिंग प्राइस(₹) प्राइस - Nav (₹)
IDBI गोल्‍ड ETF 11/04/2023 5561.08 5725.1 164.01
IDBI गोल्‍ड ETF 08/05/2023 5635.35 5596.05 -39.3

प्रीमियम पर ट्रेडिंग
11 अप्रैल, 2023, को फ़ंड का NAV ₹5,561.08 था, लेकिन इसका क्‍लोज़िंग ट्रेडिंग प्राइस उसी दिन के लिए ₹5,725.10 था. एक ही दिन में क़ीमतों में ₹164 का ये अंतर बड़ा है.

इसलिए, अगर आपने उसी दिन फ़ंड की यूनिट ख़रीदी थी, तो आपने ₹164 के प्रीमियम का भुगतान किया होगा. इससे जब आप बाद में यूनिट बेचेंगे तो आपके मुनाफ़े पर इसका असर पड़ेगा.

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डिस्‍काउंट पर ट्रेडिंग
आइये, 8 मई, 2023 पर आते हैं. यहां स्थिति बदल जाती है. इस डेट पर, IDBI गोल्‍ड ETF की क्‍लाेजिंग प्राइस और NAV के बीच अंतर ₹-39 था. इसका मतलब है कि ये डिस्‍काउंट पर उपलब्‍ध था. हो सकता है कि ख़रीदारी के समय डिस्‍काउंट से आपको फ़ायदा हुआ हो, लेकिन इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि आप इसे और ज्‍यादा डिस्‍काउंट पर नहीं बेचेंगे, भले ही बाद में इसका NAV बढ़े. ऐसा इसलिए है क्‍योंकि NAV का डाटा अगले दिन सुबह आएगा. आसान शब्‍दों में कहें, तो ETF निवेशकों को इस बात को लेकर कोई साफ़ समझ नहीं थी कि वे ETF प्रीमियम पर या डिस्‍काउंट पर ख़रीद बेच रहे हैं. इसकी वजह से हाल के समय तक उनके रिटर्न पर असर पड़ा.

क्‍या कर सकते हैं आप
सेबी ने जुलाई, 2022 से इंट्रा-डे नेट एसेट वैल्‍यू ( i-NAV) पेश किया है. i-NAV के ज़रिए, निवेशक बहुत तेज़ी से ये तय कर सकते हैं कि ETF अपने NAV के प्रीमियम पर ट्रेड कर रहा है या डिस्‍काउंट पर. ट्रेडिंग डे के दौरान हर 15 सेकेंड पर अपडेट के साथ, i-NAV ने ये पक्का करता है कि निवेशक ये जानें कि वे ETF प्रीमियम पर ख़़रीद बेच रहे हैं या डिस्‍काउंट पर. अब सवाल उठता है कि आप ETF का NAV कहां पा सकते हैं. आप किसी फ़ंड हादस की वेबसाइट पर जाएं. उदाहरण के लिए, अगर आप मिराए एसेट निफ़्टी 50 में निवेश की प्‍लानिंग कर रहे हैं, तो हमारा सुझाव होगा कि i-NAV जानने के लिए आप मिराए की वेबसाइट पर जाएं. जैसा नीचे स्‍क्रीनशॉट में दिखाया गया है.

Read this right before investing in ETFs

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Disclaimer: यह कंटेंट सिर्फ़ जानकारी के लिए है और इसे निवेश सलाह या रेकमेंडेशन नहीं मानना चाहिए.

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