
इस ख़बर का अंदाज़ा पहले से ही था कि LIC म्यूचुअल फ़ंड, IDBI म्यूचुअल फ़ंड का अधिग्रहण करेगी. क्यों? क्योंकि LIC, IDBI बैंक की बड़ी शेयरहोल्डर बनने के बाद से (IDBI म्यूचुअल फ़ंड की स्पॉन्सर), दो फ़ंड हाउस - LIC म्यूचुअल फ़ंड और IDBI म्यूचुअल फ़ंड की प्रमोटर बन गई थी, जिसकी क़ानूनी तौर पर इजाज़त नहीं है. सेबी के नियमों के मुताबिक़, कोई पेरंट ग्रुप (parent group) कई AMCs में 10 प्रतिशत से ज़्यादा हिस्सेदारी नहीं रख सकता. इसलिए ये मर्जर होना ही था. दो मध्यम दर्जे के और कम पॉपुलर फ़ंड हाउस का एक साथ आना, किसी स्ट्रेटेजिक फ़ैसले के बजाए एक रेग्युलेटरी दायरे में रहने की ज़रूरत ज़्यादा है. एक इंडस्ट्री जिसमें 40 म्यूचुअल फ़ंड हाउस हैं, वहां IDBI की एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) की मौजूदा रैंकिंग 31वीं है. वहीं, LIC 24वें नंबर पर होकर इससे कुछ ही बेहतर है. इनके एक हो जाने से भी कोई ज़्यादा फ़र्क़ नहीं पड़ने वाला. एक साथ आकर भी इनका AUM सिर्फ़ ₹22,500 करोड़ का होगा, जो इन्हें 24वें नंबर पर ही रखेगा. अगर आप सोच रहे थे कि इन्हें बड़े स्केल का फ़ायदा मिलेगा, तो ऐसा नहीं है. मर्जर की मुख्य बातें ये मर्जर जुलाई 2023 तक पूरा होने की उम्मीद है. LIC अब 10 IDBI म्यूचुअल फ़ंड्स को अपने में शामिल कर लेगी, जिनके निवेश का मैंडेट मौजूदा LIC फ़ंड से मिलता-जुलता है. और 10 IDBI फ़ंड, जो LIC फ़ंड्स से अलग हैं वो बने रहेंगे, मगर इनमें LIC का नाम जुड़ जाएगा. बची हुई स्कीमों का डिटेल अनालेसिस जानने के लिए हमारे एनेलिस्ट की तैयार की हुई टेबल देखें. मर्ज होने वाली स्कीमों की डिटेल ट्रांसफ़र स्कीम बची हुई स्कीम धनक कैटेगरी एनेलिस्ट की राय IDBI बैंकिंग एंड फ़ाइनेंशियल सर्विसेज़ LIC MF बैंकिंग एंड फ़ाइनेंशियल सर्विसेज़ सेक्टोरल-बैंकिंग छोड़ने योग्य (Avoidable) IDBI क्रेडिट रिस्क LIC MF मी
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