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म्यूचुअल फ़ंड या शेयर निवेश: आपके लिए क्या बेहतर?

एक नए निवेशक के लिए Mutual Fund में निवेश करना ज़्यादा अच्छा रहेगा या सीधे Share market में उतरने में फ़ायदा है.

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Mutual Fund: नौकरी लगने के बाद पहली सैलरी के इंतज़ार का अलग ही रोमांच होता है. अक्सर पहली तनख़्वाह के ख़र्च का प्लान भी पहले से हो जाता है. हालांकि, कम ही लोग होते हैं जो पहली सैलरी से निवेश शुरू करने की बात सोचते हैं. जो सोचते हैं, उनका पहला सवाल होता है कि निवेश कहां किया जाए. सबसे ज़्यादा कन्फ़्यूज़न इन्वेस्टमेंट के दो तरीक़ों को लेकर होता है, पहला, म्यूचुअल फ़ंड और दूसरा, शेयर बाज़ार में इन्वेस्टमेंट (Equity Investment). हमारे साप्ताहिक वीडियो में, वैल्यू रिसर्च के सीईओ धीरेंद्र कुमार ने इसी कंफ्यूजन को दूर किया. यहां हम उसी बातचीत के अंश दे रहे हैं.

Mutual Fund या Stocks?
धीरेंद्र कुमार कहते हैं कि सीधे स्टॉक/ शेयर में निवेश करना और म्यूचुअल फ़ंड में निवेश करना बहुत अलग बात नहीं है. इसमें अंतर सिर्फ़ इतना है कि जब आप किसी इक्विटी म्यूचुअल फ़ंड में निवेश करते हैं, तो आप एक साथ 50, 40 या 30 शेयरों में निवेश कर रहे होते हैं. दोनों में कोई अंतर नहीं है. म्यूचुअल फ़ंड में आप अपने इक्विटी निवेश को डायवर्सिफ़ाई कर रहे हैं और इसमें ख़र्च भी होता है. वहीं, शेयरों में आप किसी एक शेयर या गिनी-चुनी कंपनियों में निवेश कर रहे होते हैं. यानी, अगर आपके पास ₹5,000 हैं और आप उन तीन कंपनियों के शेयरों में निवेश करते हैं, जिनपर आपका बहुत भरोसा होता है. मगर इसमें कम डाइवर्सिफ़िकेशन हुआ, और इसीलिए इसमें उतार-चढ़ाव ज़्यादा होगा.

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Shares या Stocks में रिस्क कम कैसे करें
धीरेंद्र कुमार के मुताबिक़, अगर आप लंबे समय के लिए शेयरों में निवेश कर रहे हैं और धीरे-धीरे निवेश कर रहे हैं, तो आपका रिस्क अपने-आप कम हो जाएगा. म्यूचुअल फ़ंड में निवेश करना और भी कम रिस्क वाला तरीक़ा है. अगर आप भारी उतार-चढ़ाव का सामना कर सकते हैं, आप निवेश की जाने वाली कंपनी की अच्छी समझ रखते हैं, कंपनियों के बारे में समझना अच्छा लगता है और बारीक़ी से उन्हें समझने में मज़ा आता है, तो आप ज़रूर शेयरों में निवेश कीजिए.

निवेश का आसान तरीक़ा क्या है
हालांकि, आसान तरीक़ा है ₹500 से इक्विटी फ़ंड में निवेश की शुरुआत करने का. इसमें सीधे स्टॉक ख़रीदने से कम उतार-चढ़ाव होगा, और साल भर के दौरान आपको मार्केट के उतार-चढ़ाव के बारे में ज़्यादा मालुम हो जाएगा. आपको पता चल जाएगा कि इसका आप पर क्या असर होता है. उन्होंने कहा कि रिस्क को सहने की बात कहना काफ़ी आसान है मगर असल में जब इससे सामना होता है तो बात कुछ अलग होती है. हालांकि, अगर आपकी उम्र कम है तो आप रिस्क सह सकते हैं. आपके लिए आगे लंबा होता है. निवेश का कोई ग़लत फ़ैसला हो जाने पर आपके पास अपना पैसा रिकवर करने का पूरा वक़्त होता है.

सबसे पहली और अहम बात
धीरेंद्र कुमार ने कहा कि खूब सारे पैसे ख़ूब जल्दी जमा करने के सपने तमाम लोग देखते हैं, लेकिन इसके लिए आपको अच्छा ख़ासा पैसा लगाना भी होगा. या फिर आपके बहुत सारा समय होना चाहिए या खूब सारा निवेश का पैसा. मगर सबसे पहले तो आप शुरुआत कीजिए. धीरे-धीरे अपनी समझ बढ़ाइए और निवेश करने की आदत डालिए. अगर कम उम्र में आप पैसा बचाना सीख जाते हैं तो ये बड़ी बात होगी.

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उन्होंने कहा कि आप कमाने के बाद पैसा बचा भी लेते हैं और इस पैसे को इन्वेस्ट कर पाते हैं तो अच्छी बात है. आप पैसे पर मत जाइए और मत सोचिए कि ₹500 से क्या होगा या ₹5,000 से क्या होगा. इसकी आदत डालिए, फिर इसका जादू देखिए. आपके पास पैसा जमा होता रहेगा जो पहले आपके पास नहीं था. फिर आपको रिटर्न मिलता है जिसकी आपको उम्मीद नहीं होती.

सरप्राइज़ के लिए रहें तैयार
धीरेंद्र कुमार ने कहा कि इस निवेश के सफ़र में आपको बड़ा सरप्राइज़ मिल सकता है या हो सकता है कि आपको निगेटिव सरप्राइज़ मिले. फिर बाज़ार आपके धीरज का इम्तिहान ले सकता है. चलते बाज़ार में कभी कभार आपको तुरंत मज़ा आने लगता है. मगर कभी-कभी नुक़सान होने लगता, बाज़ार गिरने लगता है और कभी तो गिरता ही चला जाता है. बाज़ार में गिरावट का दौर अचानक आता है और बढ़ने का दौर भी धीरे-धीरे चलता रहता है. कई बार आपको पता ही नहीं चलेगा कि क्या हुआ. आप अचानक देखेंगे कि बड़ी मुश्किल से इकट्ठे किए ₹1 लाख घटकर, ₹90,000 रह गए.

उन्होंने कहा कि ऐसे में घबराहट होती है, इसलिए इसकी आदत डालिए कि किस तरह से रिटर्न मिलता है, किस तरह से उतार-चढ़ाव आता है और इस नुक़सान से बचने का क्या तरीक़ा है. अभी शुरुआत कीजिए. छोटी रक़म से शुरू कीजिए, इक्विटी में लगाइए. और कई साल तक निवेश जारी रखने के इरादे से निवेश कीजिए.

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ये लेख पहली बार जुलाई 03, 2023 को पब्लिश हुआ.

Disclaimer: यह कंटेंट सिर्फ़ जानकारी के लिए है और इसे निवेश सलाह या रेकमेंडेशन नहीं मानना चाहिए.

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