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ऊपर जाता बाज़ार ख़तरनाक तरीक़े से लुभा रहा है

इक्विटी का ऑल-टाइम हाई होना नए-नए ट्रेडरों को मार्केट के सबसे ख़तरनाक हिस्से की तरफ़ लुभाएगा.

इक्विटी का ऑल-टाइम हाई होना नए-नए ट्रेडरों को मार्केट के सबसे ख़तरनाक हिस्से की तरफ़ लुभाएगा.Anand Kumar

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इस साल की शुरुआत में सेबी ने एक रिसर्च पेपर रिलीज़ किया, जिसका शीर्षक था 'अनालेसिस ऑफ़ प्रॉफ़िट एंड लॉस ऑफ़ इंडिविजुअल ट्रेडर्स डीलिंग इन इक्विटी F&O सेगमेंट.' इस पेपर ने खुलासा किया था कि "वित्त-वर्ष22 में इक्विटी F&O सेगमेंट के 89% (यानी 10 में से 9) इंडिविजुअल ट्रेडरों ने नुक़सान उठाया, और इस नुक़सान का औसत ₹1.1 लाख का रहा..."

अब, छः महीने बाद, हम इक्विटी मार्केट के ऐसे दौर में हैं जो पिछले कुछ सालों में सबसे ख़तरनाक कहा जाएगा. दरअसल, मार्केट जब ऑल-टाइम हाई होता है तो सब कुछ उत्साह से भरा होता है. पर बहुत से नए निवेशकों के लिए, यही उनके लालच, और उससे होने वाले नुक़सान का कारण बन जाता है. मार्केट के क्रैश को लेकर बहुत सी ज्ञान की बातें कही गई हैं. इनमें से एक ये है कि "मैंने पाया है कि जब मार्केट नीचे जाते हैं, और आप ख़रीदते हैं ... तो कभी ऐसा वक़्त आएगा, जब आप ख़ुश होंगे", ये बात महान इन्वेस्टमेंट मैनेजर पीटर लिंच ने कही थी. या उससे ज़्यादा प्रसिद्ध बात है कि "ख़रीदो जब सड़कों पर ख़ून हो, चाहे वो ख़ून तुम्हारा अपना ही क्यों न हो," ये 18वीं सदी में बैरन रॉथ्सचाइल्ड ने कहा था, जो रॉथ्सचाइल्ड बैंकिग फ़ैमिली से थे.

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हालांकि, इसका ठीक उलटा भी उतना ही सच है, पर उसे लेकर कही गई कोई चर्चित बात याद नहीं आती. अगर पीटर लिंच की कही बात को उलटा कर दें तो क्या होगा? वो शायद कुछ इस तरह हो, "मैंने पाया है कि जब मार्केट ऊपर जाते हैं, और आप ख़रीदते हैं ... तो कभी ऐसा वक़्त आएगा, जब आप नाख़ुश होंगे", क्या ये सच है? दरअसल, ये हर किसी के लिए सच नहीं, मगर बहुत से निवेशकों (ट्रेडरों?) के लिए तो बिल्कुल सच है जो मार्केट में नए हैं. जब इस सब के लिए आप बिल्कुल नए होते हैं, तो एक चढ़ते हुए मार्केट के लोभ से बचने के लिए अच्छे-खासे अनुभव की ज़रूरत होती है.

सेबी के पेपर में उजागर हुई एक और बात है जिस पर कम चर्चा हुई है. वो ये कि बहुत से ट्रेडर युवा और अनुभवहीन हैं और ट्रेडिंग की समझ से इन बातों से सीधा संबंध है. पेपर के मुताबिक़: "कुल इंडिविजुअल ट्रेडरों का नंबर जिन्होंने वित्त-वर्ष22 में टॉप 10 ब्रोकरों के सैंपल के ज़रिए इक्वटी F&O सेगमेंट में ट्रेड किया उनकी संख्या 45.2 लाख थी, जो वित्त-वर्ष19 (वित्त-वर्ष19 के मुक़ाबले वित्त-वर्ष22 में ये 500% ज़्यादा थी) में 7.1 लाख ही थी. इनमें से 88% एक्टिव ट्रेडर थे. साल 2019 से 22 के बीच ट्रेडरों की संख्या में ये बहुत बड़ा उछाल रहा. अब आप इसे अगले आंकड़े के साथ जोड़ कर देखें:

वित्त-वर्ष22 के दौरान, 30-40 साल की उम्र के इंडिविजुअल ट्रेडरों ने सभी आयु वर्ग के लोगों के मुक़ाबले ज़्यादा भाग लिया (39%). युवा इंडिविजुअल ट्रेडरों (20-30 साल) की भागीदारी में वित्त-वर्ष19 के 11% के मुक़ाबले, वित्त-वर्ष22 में 36% की बढ़ोतरी हुई.

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तो इससे आप तीन तथ्य समझ सकते हैं.
पहला, 84 प्रतिशत ट्रेडरों के पास तीन साल से कम का अनुभव था. दूसरा, 50 प्रतिशत ट्रेडर 40 साल से कम उम्र के थे. तीसरा, 89 प्रतिशत ट्रेडरों को नुक़सान हुआ. इन तथ्यों के साथ, आप आसानी से इन ट्रेडरों का मनोवैज्ञानिक प्रोफ़ाइल बना सकते हैं. जब इक्विटी मार्केट तेज़ी से बढ़ रहे हैं, तब एक बार फिर काफ़ी सारे ट्रेडर मार्केट में उतरेंगे. और जिस तरह की ट्रेडिंग इंडस्ट्री की अर्थव्यवस्था है, इनमें से काफ़ी लोग डेरायवेटिव की तरफ़ चले जाएंगे. डेरायवेटिव ट्रेडिंग में क्या होगा ये तो सेबी के पेपर में आए अनालेसिस ने पहले ही साफ़ कर दिया है.

एक इंडिविजुअल के नज़रिए से, ये काफ़ी सीधी-सादी बात है—डेरायवेटिव के खेल में कूदने से परहेज़ कीजिए. क्योंकि इस बात की काफ़ी गुंजाइश है कि इसमें आपको बड़ा नुक़सान होगा. सेबी की स्टडी के कहने के बावजूद कि 10 प्रतिशत ट्रेडर ही मुनाफ़ा कमाते हैं, हर ट्रेडर मानता है कि इस दस प्रतिशत का हिस्सा होना उसकी नियति है. आप धोखा मत खाइए. ये और कुछ नहीं बल्कि इंडस्ट्री में फैलाए गए भ्रम का असर है—आप इसमें मत फंसिए.

आजकल तेज़ी को लेकर जिस तरह का उत्साह मार्केट में है, उसमें काफ़ी सारे लोग ऐसा करेंगे ही. सवाल सिर्फ़ इतना है कि एक व्यक्ति के स्तर पर वो कौन से स्मार्ट लोग हैं जो इससे बचेंगे. मार्केट के नई ऊंचाइयों को छूने के आकर्षण के बावजूद, ज़्यादा समझदारी इसी में होगी कि आम निवेश के स्तर पर डेरायवेटिव ट्रेडिंग के लोभ से बचा जाए.

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