
चर्चित फ़ंड मैनेजर प्रशांत जैन की क़रीब तीन दशक लंबी पारी के बाद म्यूचुअल फ़ंड इंडस्ट्री से अचानक अलग होने के ऐलान को एक साल से ज़्यादा समय बीत चुका है. बड़े फ़ंड्स- HDFC फ़्लेक्सी कैप फ़ंड (2003 से), HDFC टॉप 100 फ़ंड (जनवरी 2002 से) और HDFC बैलेंस्ड एडवांटेज फ़ंड (1994 से) की ₹90,000 करोड़ (एक्ज़िट से पहले) से ज़्यादा के एसेट्स संभालने वाले जैन, भारत के सबसे ज़्यादा समय तक सेवाएं देने वाले फ़ंड मैनेजरों में से एक हैं. अपने शानदार करियर में जैन ने इन्वेस्टर्स को दमदार वेल्थ खड़ी करने में मदद की. इन फ़ंड्स में अगर आपने 20 साल तक ₹10,000 की SIP की होती, तो आपके पास ₹2.3 करोड़ की भारी भरकम वेल्थ खड़ी हो जाती. ये कैलकुलेशन हमने इन तीनों फ़ंड्स के रिटर्न के औसत के तौर पर की है और इसमें SIP कॉन्ट्रीब्यूशन में हर साल 10 फ़ीसदी की बढ़ोतरी मान कर हिसाब लगाया है. अपने कार्यकाल में उतार-चढ़ाव के बावजूद, जैन उस समय अलग हुए, जब उनके फ़ंड अच्छा प्रदर्शन कर रहे थे. ग़ौरतलब है कि पिछले कुछ समय से उनके फ़ंड में ख़राब प्रदर्शन का दौर देखा जा रहा था. हालांकि, जैन के बाहर निकलने से कुछ समय पहले ही इनमें रफ़्तार आनी शुरू हो गई थी, और 'वैल्यू' थीम, 'ग्रोथ' थीम से आगे निकल गई थी. उनकी एग्ज़िट के बाद, आंतरिक स्तर पर कुछ रिस्ट्रक्चरिंग
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