
SEBI Mechanism for Deceased Investors: सिक्योरिटीज़ एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ़ इंडिया (SEBI) ने निवेशकों की मृत्यु की सूचना देने की प्रक्रिया को व्यवस्थित करने के लिए, एक सेंट्रलाइज़्ड मैकेनिज़्म की घोषणा की है. इसका उद्देश्य, दावेदारों के बोझ को कम करना और फ़ाइनेंशियल एसेट के तेज़ हस्तांतरण की सहूलियत देना है.
अकेले भारतीय म्यूचुअल फ़ंड्स में बिना दावे की लावारिस रक़म का आंकड़ा ₹24,000 करोड़ (ARIA के एक पेपर के अनुसार) को पार कर गया है और दूसरे फ़ाइनेंशियल एसेट पर भी विचार करें तो ये आंकड़ा और भी ज़्यादा है. SEBI का सेंट्रलाइज मैकेनिज़्म निवेशक की मृत्यु के बाद के हालात को ध्यान में रखते हुए ज़्यादा क़ारगर और संवेदनशीलता का भरोसा दिलाता है.
क्लेम पाने की मुश्किलों का हल क्या है?
इस वक़्त, किसी निवेशक की मृत्यु के बाद फ़ाइनेंशियल एसेट्स के क्लेम के तरीक़े में हर वित्तीय संस्थान के साथ अलग-अलग काग़ज़ी औपचारिकताएं करने की ज़रूरत पड़ती है. अगर कई फ़ंड हाउस से क्लेम की ज़रूरत पड़े तो क्लेम पाने का काम और भी मुश्किल हो जाता है. 01 जनवरी 2024 से लागू होने जा रहे SEBI के नए मैकेनिज़्म से इस मुश्किल को कम करने और शोक में डूबे परिवारों के लिए ट्रांसफ़र के प्रोसेस को आसान करने की कोशिश की गई है.
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कैसे काम करेगा ये सेंट्रल सिस्टम
SEBI द्वारा तैयार किया गया केंद्रीकृत तरीक़ा कुछ इस तरह से काम करेगा:
- तुरंत सूचनाः इन्वेस्टर की मृत्यु की सूचना मिलने पर, इंटरमीडियरी को इन्वेस्टर के PAN (परमानेंट अकाउंट नंबर) के साथ उसके डेथ सर्टिफ़िकेट की ज़रूरत होगी. फिर इस जानकारी को ऑनलाइन वेरीफ़ाई किया जाएगा और अपलोड किए गए दस्तावेज़ों के साथ KYC (अपने कस्टमर को जानें) रजिस्ट्रेशन एजेंसी को इसकी सूचना दी जाएगी.
- ट्रांज़ेक्शन ब्लॉक करना: इसके साथ ही, इंटरमीडियरी फ़ोलियो या खाते से जुड़े सभी विदड्रॉल ट्रांज़ेक्शन को ब्लॉक कर दिया जाएगा. ज्वाइंट खातों के मामले में, दूसरे खाताधारकों के ट्रांजेक्शन राइट बरक़रार रहेंगे.
- KYC स्टेटस अपडेट: जानकारी मिलने पर, KYC रजिस्ट्रेशन एजेंसी स्वतंत्र रूप से इसकी पुष्टि करेगी और सत्यापन या वेरिफ़िकेशन के बाद ही निवेशक के KYC स्टेटस को 'स्थायी रूप से ब्लॉक' कर देगी. इस स्टेटस अपडेट के बारे में सभी इंटरमीडियरीज़ को सूचित किया जाएगा.
- नॉमिनी नोटिफ़िकेशन: 'स्थायी रूप से ब्लॉक' स्टेटस के साथ, सभी इंटरमीडियरीज़ को किसी भी आगे के ट्रांज़ेक्शन के लिए लिंक किए गए फ़ोलियो/ खातों को तुरंत ब्लॉक करना होगा. इसके अतिरिक्त, उन्हें नॉमिनी को पांच दिन के भीतर हस्तांतरण के प्रोसेस के बारे में सूचना देनी होगी.
सेबी का सर्कुलर उन स्थितियों के लिए अलग-अलग तरीक़ों की रूपरेखा भी बताता है, जहां इंटरमीडियरीज़ को डॉक्युमेंट्स को ऑनलाइन वेरिफ़ाई करने में चुनौतियों का सामना करना पड़ता है.
सही दिशा में क़दम
अंत में, SEBI का सेंट्रलाइज़ मैकेनिज़्म म्यूचुअल फ़ंड में ट्रांसफ़र के प्रोसेस को आसान बनाने के लिए सही दिशा में एक अहम क़दम है.
हालांकि, दावेदारों को ख़ासा फ़ायदा पहुंचाने वाला एक बड़ा सुधार ये होगा कि जैसे ही डेथ सर्टिफ़िकेट पाने के लिए निवेशक की मृत्यु म्यूनिसिपल ऑफ़िस में रजिस्टर्ड हो जाती है, KYC रजिस्ट्रेशन एजेंसी और सभी इंटरमीडियरीज़ को तत्काल जानकारी दी जाएगी.
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Disclaimer: यह कंटेंट सिर्फ़ जानकारी के लिए है और इसे निवेश सलाह या रेकमेंडेशन नहीं मानना चाहिए.
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