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Lakshya AMC को SEBI की मंज़ूरी, जानें ETF के कौन-से दिग्गज कर रहे वापसी?

इसकी टीम में Benchmark AMC के वो संस्थापक हैं, जिन्होंने भारत में ETFs की नींव रखी थी

इसकी टीम में Benchmark AMC के वो संस्थापक हैं, जिन्होंने भारत में ETFs की नींव रखी थीVinayak Pathak/AI-Generated Image

सारांशः Lakshya AMC को SEBI की मंज़ूरी मिल गई है और वो जल्द ही म्यूचुअल फ़ंड कारोबार शुरू करेगी. यह भारत के एसेट मैनेजमेंट इंडस्ट्री में एक अहम दस्तक है. आख़िर इसमें ऐसा क्या ख़ास है और क्या यह भारतीय निवेशकों के लिए पैसिव इन्वेस्टिंग को नए सिरे से परिभाषित कर सकती है? आइए नज़दीक से देखते हैं.

भारतीय म्यूचुअल फ़ंड इंडस्ट्री में एक नया नाम जुड़ गया है. नए फ़ंड हाउस Lakshya AMC को SEBI (सिक्योरिटीज़ एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ़ इंडिया) से म्यूचुअल फ़ंड ऑपरेशन शुरू करने की मंज़ूरी मिल गई है. इसे Wealth First Portfolio Managers स्पॉन्सर करेगी, जो एक लिस्टेड वेल्थ मैनेजमेंट फ़र्म है और अहमदाबाद में स्थित है.

हालांकि, Lakshya AMC कोई आम फ़ंड हाउस नहीं है. इसकी फ़ाउंडिंग टीम में संजीव शाह, राजन मेहता और संजय गाइटोंडे शामिल हैं, यानी वही दिग्गज जो Benchmark AMC के पीछे थे और जिन्होंने भारत में ETFs (exchange-traded funds) की शुरुआत की थी. Nifty BeES, Gold BeES और Liquid BeES जैसे प्रोडक्ट्स इन्हीं की देन हैं.

2001 में स्थापित Benchmark, पैसिव और क्वांटिटेटिव इन्वेस्टिंग पर आधारित कारोबार खड़ी करने वाली शुरुआती कंपनियों में से एक थी. 2011 में Goldman Sachs Asset Management ने Benchmark Mutual Fund का अधिग्रहण किया और 2015 में इसके प्रोडक्ट्स Nippon Life India Asset Management के पास चले गए.

Lakshya AMC के डायरेक्टर और Benchmark Asset Management के पूर्व को-फ़ाउंडर संजीव शाह ने कहा, "जैसे Benchmark ने किया था, Lakshya में भी हमारा तरीक़ा इनोवेशन पर टिका होगा. हम ऐसे इन्वेस्टमेंट सॉल्यूशन तैयार करना चाहते हैं, जो असली निवेश चुनौतियों को सुलझाएं और ज़्यादा से ज़्यादा निवेशकों के लिए निवेश को आसान बनाएं."

यह वक़्त भी ख़ास है. भारत की म्यूचुअल फ़ंड इंडस्ट्री 2001 में क़रीब ₹1 लाख करोड़ से बढ़कर आज ₹82 लाख करोड़ से भी ज़्यादा हो चुकी है, फिर भी पैसिव स्ट्रैटेजी की हिस्सेदारी कुल एसेट्स की तुलना में सिर्फ़ 20 प्रतिशत के आसपास है.

निवेशकों के लिए Lakshya AMC की एंट्री सिर्फ़ एक और फ़ंड हाउस के आने की बात नहीं है, बल्कि असली सवाल यह है कि जिस टीम ने एक बार भारत में पैसिव इन्वेस्टिंग को परिभाषित किया था, क्या वो इस बार भी ऐसा कर पाएगी, और वो भी एक कहीं ज़्यादा गहरे और प्रतिस्पर्धी बाज़ार में.

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