
JP मॉर्गन के बॉन्ड इंडेक्स में भारत की एंट्री, बढ़ती ब्याज़ दरों और डेट स्कीमों के भविष्य को लेकर डेट मार्केट (debt markets) में काफ़ी चर्चा है. इसे समझने के लिए, हमने चार डेट गुरुओं - बंधन AMC के सुयश चौधरी, HDFC के अनिल बंबोली, एक्सिस के देवांग शाह और HSBC के जलपान शाह से बात की. यहां, हम आपके लिए इन अनुभवी डेट फ़ंड मैनेजरों के साथ हुई बातचीत को आसान भाषा में रख रहे हैं. अहम सवाल जिनके जवाब दिए गए 1) ब्याज़ दरें शीर्ष पर बाज़ार के सेंटीमेंट की बात करें, तो जिन फ़ंड मैनेजरों से हमने बात की, उनके बीच भी इस बात पर आम सहमति है कि ब्याज़ दरें या तो अपने पीक (peak) पर हैं या इसके बहुत क़रीब हैं. इसका आपके लिए क्या मतलब है? सभी फ़ंड मैनेजरों का मानना है कि ये ड्यूरेशन स्ट्रैटजी का दौर रहने वाला है. जैसा कि हमारे कैटेगरी अपडेट में बताया गया है, हम फ़ंड मैनेजरों को लंबे समय के बॉन्ड्स में एक्सपोज़र बढ़ाकर अपने पोर्टफ़ोलियो की मेच्योरिटी (यहां तक कि हमारे रेकमंड किए फ़ंड भी) बढ़ाते हुए देख सकते हैं. दरों के अपने पीक पर होने के साथ, लॉन्ग ड्यूरेशन बॉन्ड्स से मिलने वाले सपोर्ट के दम पर, इन फ़ंड्स का रिटर्न बढ़ाने में मदद मिलेगी. हालांकि, ध्यान दें कि किसी अप्रत्याशित घटना की स्थिति में, इन फ़ंड्स में अस्थिरता भी देखी जा सकती है. फ़ंड मैनेजरों के विचार देवांग शाह: हमारा मानना है कि महंगाई और इंटरेस्ट रेट साइकल हर जगह पीक पर हैं. जब दरों में बढ़ोतरी की बात आती है, तो हमें यहां से दरों में ज़्यादा बढ़ोतरी होती नहीं दिखाई देती है. उम्मीद है, RBI मार्च 2024 तक दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा और साल 2024 में 50 BPS की कटौती की भी उम्मीद है. हमारा मानना है कि एक एसेट क्लास के तौर पर डेट आकर्षक हो सकता है, और निवेशक डेट फ़ंड के अपनी ड्यूरेशन और शॉर्ट से मीडियम टर्म के फ
ये लेख पहली बार दिसंबर 06, 2023 को पब्लिश हुआ.
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