
अगर डेट फंड्स से इंडेक्सेशन के फ़ायदे हटने से किसी का खेल बेहतर हुआ है, तो वो कमज़ोर दिखने वाली हाइब्रिड कैटेगरी- इक्विटी सेविंग को हुआ है. इस साल मार्च में ₹16,000 करोड़ के एसेट साइज़ के साथ, इन फ़ंड्स में अच्छी मज़बूती दर्ज की गई. इनका AUM अब ₹24,000 करोड़ से ज़्यादा हो गया है. हम पहले भी बता चुके हैं कि डेट फंड्स के लिए नए टैक्स क़ानूनों को देखते हुए, इक्विटी सेविंग फ़ंड ही एकमात्र ऐसे फ़ंड हैं, जो दोनों हालात में, यानी एक मॉडरेट इक्विटी एक्सपोज़र (क़रीब 30-40% का सीमित एलोकेशन) और इक्विटी के समान टैक्स व्यवहार की स्थिति में सबसे अच्छा रिटर्न देते हैं. पिछले पांच साल के दौरान इस कैटेगरी की ज़्यादातर अनदेखी को देखते हुए निवेशकों की दिलचस्पी में बढ़ोतरी से हमें तसल्ली हुई है. अब निवेश की बात इक्विटी सेविंग फ़ंड एक इन्वेस्टमेंट को रेडीमेड एसेट एलोकेशन पाने में सक्षम बनाते हैं (ये फ़ंड आपके पैसे का क़रीब एक तिहाई इक्विटी, डेट और आर्बिट्राज में निवेश करते हैं). इसके अलावा ऑटोमेटेड रिबैलेंसिंग के चलते ये टैक्स के लिहाज़ से बेहतर होते हैं. रिबैलेंस
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