Anand Kumar
कुछ दिन पहले ख़बर आई कि एक बड़े अमेरिकी इन्वेस्टमेंट मैनेजर ब्लैकरॉक (BlackRock) ने एक बार फिर बायजू (Byju's) का वैल्युशन कम कर दिया है. 2022 की शुरुआत में 22 बिलियन डॉलर के सबसे ऊंचे स्तर से, ब्लैकरॉक का बायजू के लिए वैल्युएशन अब एक बिलियन डॉलर से कम है—यानी, बहुत कम हो गया है.
इस ख़बर पर दो तरह की प्रतिक्रिया थी. एक वो जो मानते थे कि बायजू का ऐसा वैल्युएशन सही है, और दूसरे, इसे ग़लत मानने वाले थे. मैं दूसरी कैटेगरी में हूं. मुझे लगता है कि ये बेकार की बात है कि बायजू की वैल्यू एक बिलियन डॉलर की है - इसका सही नंबर ज़ीरो के आसपास कहीं होगा. कुछ शेयरहोल्डरों के लिए तो इसकी वैल्यू नेगेटिव हो सकती है, यानी कि बायजू के इन्वेस्टमेंट को अपने इन्वेस्टमेंट ट्रैक रिकॉर्ड में रखना, आपकी एक इन्वेस्टमेंट मैनेजर की क़ाबिलियत को लेकर सवाल उठा सकता है - और उठाएगा ही.
मुझे तो ब्लैकरॉक के लिए ये बात सही लगती है, और ये दुनिया का सबसे बड़ा एसेट मैनेजर है. ब्लैकरॉक क़रीब $10 ट्रिलियन के इन्वेस्टमेंट मैनेज करता है, मगर बायजू में इसका निवेश सोचने पर मजूबर कर देता है कि इसमें से कितने निवेश ऐसे होंगे जिन्हें इसीलिए हाई वैल्यू मिली है क्योंकि ब्लैकरॉक ने उसे हाई वैल्यू दी है. इस बात को दो-तीन साल हो चले हैं जब से बायजू का ये सच कई सर्किलों में चर्चित रहा है. बायजू के कस्टमरों ने इसकी सच्चाई समझ ली थी, और इसके कर्मचारी भी इसके सच को जानते रहे हैं. न सिर्फ़ इतना, बल्कि इन्वेस्टमेंट सर्किल के कई लोग तो बायजू का नाम लेने पर आखें चढ़ाने लगते थे.
ज़्यादातर लोगों ने काफ़ी पहले ही समझ लिया था कि बायजू एक 'सामान्य' स्टार्टअप फ़ेलियर नहीं होगा. इसके बजाए, लोग जानते थे कि कंपनी में कई दिक्कतें थीं जिन्हें विनम्र भाषा में 'कॉर्पोरेट गवर्नेंस इशू' कहा जाता है. तो असल में क्या हुआ कि इस कंपनी के निवेशक इसे स्वीकार करने से कतरा गए? इसके शायद तीन कारण रहे. पहला, लोगों की ज़्यादा बड़े बेवकूफ़ को पहचानने की इच्छा, दूसरा, ग़लती नहीं मानना, और तीसरा, वास्तविक अयोग्यता. इन तीनों कारणों में कुछ भी नया नहीं है - बहुत से निवेशकों में ये आम दिखाई देने वाली इंसानी कमज़ोरी है, चाहे बड़े हों या छोटे.
वैसे भी, बायजू कोई लिस्टिड कंपनी नहीं है, इसलिए मुझे और आपको इसकी चिंता नहीं होनी चाहिए. ये समस्या, ब्लैकरॉक और दूसरे निवेशकों की है, हमारी नहीं. इसके कई कारण हैं कि क्यों ये हमारी नहीं है. जो कारण सबसे ज़्यादा मायने रखता है, वो इसका स्केल और सेक्टर है जिसमें बायजू ने गड़बड़ की है. इसमें शायद ही कोई शक़ हो कि शिक्षा एक ऐसी चीज़ है जिसके लिए बहुत सारे इनोवेशन, बहुत से नए विचारों और बहुत से पैसे की ज़रूरत होती है, एक गंभीर समस्या को हल करने के लिए सभी को एक साथ आने की ज़रूरत होती है, और मेरा मतलब सिर्फ़ परीक्षा की तैयारी कराने से नहीं, बल्कि पूरी शिक्षा से है. ज़ाहिर है, बायजू के कामों से इसे झटका लगा है.
बायजू ने जो गड़बड़ी पैदा की है उसकी तुलना ख़ान अकादमी से करें. ख़ान अकादमी एक नॉन-प्रॉफ़िट संस्था है, और अपने अस्तित्व के क़रीब 16 साल में, इसे $400 मिलियन से कम का दान मिला है, जो बायजू के इस्तेमाल किए गए धन के दसवें हिस्से से भी कम है. फिर भी, ख़ान अकादमी ने जो हासिल किया है वो बायजू के मुक़ाबले कहीं, कहीं ज़्यादा है. असलियत ये है कि इंटरनेट की कम लागत, हाई स्पीड वाले ग्लोबल डेटा नेटवर्क और अरबों स्मार्टफ़ोन पहले से मौजूद हैं, यानी, हर किसी को शिक्षित करने के लिए जो कुछ भी ज़रूरी है वो पहले से है. इसके अलावा डिजिटल तरीक़े से डिलिवर की जाने वाली एजुकेशन कहीं कम पैसे में दी जा सकती है. ये कोई अतिशयोक्ति नहीं है - यहां तक कि बायजू और ख़ान अकादमी की बुनियादी तुलना भी ये साबित करती है.
ये साफ़ है कि बायजू न केवल एक समस्या से ग्रस्त बिज़नस है, बल्कि वेंचर के बूते पर एजुकेशन स्टार्टअप की सोच ही एक घोटाला है. ये शिक्षा देने के वास्तविक इरादे की ग़ैरमौजूदगी में दुनिया भर में पैसा लगाने का एक तरीक़ा भर है. दोषपूर्ण व्यवसायिक मॉडल में ख़र्च होने वाली बहुत ज़्यादा निजी पूंजी ने इंसेटिव को बिगाड़ कर रख दिया है और शिक्षा के बजाय वैल्युएशन के लिए भारी मात्रा में धन का इस्तेमाल किया है. इसके बावजूद टेकनोलॉजी से मिलने वाली सस्ती, मगर क्वालिटी एजुकेशन को VC-यूनिकॉर्न ढांचे पर निर्भर रहने की ज़रूरत नहीं है. असल में, VC-यूनिकॉर्न कॉम्प्लेक्स ऐसा कर ही नहीं सकता और न ही ऐसा करने का उसका कभी इरादा था.
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