
निवेश की इस प्रतिस्पर्धी दुनिया में, ये फ़ंड वेल्थ बनाने का ख़ासा लोकप्रिय ज़रिया रहा है. इस बात में कोई दोराय नहीं है कि ये फ़ंड निवेशकों को चुंबक की तरह अपनी ओर खींचता है. इस बात का सबूत फ़ंड के 'एसेट्स अंडर मैनेजमेंट' (AUM) में तेजी से हुई बढ़ोतरी है, जो पिछले तीन साल में आठ गुना बढ़ गई है! वर्तमान में, ₹52,000 करोड़ से ज़्यादा के एसेट साइज़ के साथ, पराग पारिख फ़्लेक्सी कैप अपनी कैटेगरी में सबसे बड़ा फ़ंड है और सक्रिय रूप से मैनेज किए जाने वाले सभी इक्विटी फंड्स में इसकी रैंकिंग नंबर 2 है. ये फ़ंड न सिर्फ़ क़ामयाब और लोकप्रिय है बल्कि हमारी लॉन्ग-टर्म रेकमेंडेशन में भी शामिल है. जब किसी फ़ंड का साइज़ बढ़ता है तो अनालिस्ट भी उस पर पैनी नज़र रखते हैं और उसकी ज़्यादा जांच-पड़ताल करते हैं. जैसा कि ये फ़ंड लगातार ग्रो कर रहा है, तो इसके काम करने की शैली, स्थिरता और प्रदर्शन के बारे में निवेशक हमसे काफ़ी सवाल भी पूछ रहे हैं. इसलिए, हमने इस लेख में, पराग पारिख फ़्लेक्सी कैप फ़ंड के बढ़ते साइज़ के मद्देनज़र इसकी वर्तमान पोर्टफ़ोलियो पोज़िशनिंग के बारे में पांच चिंताओं पर चर्चा की है. 1. शेयरों की बढ़ती संख्या 27-32 स्टॉक वाला पोर्टफ़ोलियो मैनेज करके फ़ंड ने शुरुआत से ही निवेश की एक फ़ोकस्ड शैली अपनाई हुई है. हालांकि, पिछले एक साल में होल्डिंग्स की संख्या बढ़कर 48 हो गई है. ये बदलाव विशेष रूप से तब शुरू हुआ जब फ़ंड के एसेट्स की वैल्यू लगभग ₹30,000 करोड़ तक पहुंच गई. भले ही, ये एक बड़ा बदलाव है, पर पोर्टफ़ोलियो कंसंट्रेशन काफ़ी हद तक वही बना हुआ है. इसकी टॉप 15 होल्डिंग्स अभी भी कुल एसेट्स की 60 फ़ीसदी वैल्यू होल्ड करती हैं, जिसका मतलब है कि उसका बस साइज़ ही बड़ा हुआ है. इसलिए, ये फ़ंड वैसे ही चलता रहेगा जैसे पहले चलता था. 2. हाई कैश पोज़िशन वर्तमान में, फ़ंड के पास कैश और डेट में 15 फ़ीसदी हिस्सेदारी है. साल 2020 और 2021 के दौरान ये एक्सपोज़र औसतन केवल 5 फ़ीसदी था. क्या इसका मतलब ये है कि फ़ंड को अपने एसेट्स इस्तेमाल करने में मुश्किलें हो रही हैं? नहीं. इससे पहले, फ़ंड का कैश एलोकेशन 25-30 फ़ीसदी तक जा चुका है. वो भी तब, जब इसका AUM ₹1,500 करोड़ से कुछ कम था. ऐसा क्यों? अपनी वैल्यू-ओरिएंटेड शैली के कारण ये फ़ंड हाई कैश पोज़िशन रखने से कतराता नहीं है (जब वैल्यूएशन फ़ंड के हक़ में न लगे). फ़ंड इस पैसे का इस्तेमाल सिर्फ़ तब करता है जब मार्केट करवट बदलता है या स्टॉक के तौर पर
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