
एक्सिस म्यूचुअल फ़ंड के कई अहम फ़ंड्स का प्रदर्शन एक अर्से से अच्छा नहीं रहा. भविष्य की स्ट्रैटजी को लेकर हमने एक्सिस म्यूचुअल फ़ंड के इक्विटी प्रमुख, श्रेयश देवलकर से बात की. इस इंटरव्यू में देवलकर ने फ़ंड पोर्टफ़ोलियो में किए जा रहे बदलावों के बारे में बताया और ये भी बताया कि हाल की घटनाओं पर उनके अनुभव क्या रहे. यहां पेश हैं इंटरव्यू के मुख्य अंश. जब अर्थव्यवस्था में ब्याज दरें या तो कम या मॉडरेट थीं, तब क्वालिटी और ग्रोथ को लेकर AMC के स्वाभाविक झुकाव की वजह से एक दशक से ज़्यादा समय तक अच्छा प्रदर्शन रहा. लेकिन, ब्याज दरों के टॉप पर पहुंचने के साथ, क्या पुरानी स्ट्रैटजी अब भी क़ारगर है? हमने हमेशा कई सेक्टरों और कंपनियों के आकलन को प्राथमिकता दी है. हमारे मिड-कैप, स्मॉल-कैप और ब्लू-चिप फ़ंड्स में शेयरों के बढ़ते हुए नंबर, इसी का नतीजा हैं. हम वैल्यूएशन को ROE (इक्विटी पर रिटर्न) और फ़्री कैश-फ़्लो के संदर्भ में देखते हैं. इसलिए, मिसाल के तौर पर, जब आप केमिकल इंडस्ट्री को लेते हैं, तो अलग-अलग चक्रों के दौरान फ़्री कैश-फ़्लो शायद कम होता है. रिटेल इंडस्ट्री में, जब कोई कंपनी नए स्टोर खोलती है तब ज़ाहिर तौर पर फ़्री कैश-फ़्लो नहीं होता. फिर, आपको कंपनी के स्तर के बजाय, एक स्टोर के स्तर पर फ़्री कैश-फ़्लो देखना होता है. तो, आप इसके आसपास ही काट-छांट करने की कोशिश कर सकते हैं, लेकिन मुद्दा ये है कि हम आम तौर पर हम ROE के संदर्भ में वैल्यूएशन को लेकर, फ
ये लेख पहली बार फ़रवरी 27, 2024 को पब्लिश हुआ.
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