
लिक्विड और अल्ट्रा-शॉर्ट-ड्यूरेशन फ़ंड कैटेगरी काफ़ी अच्छी स्थिति में है. जी हां, ये सच है. साल 2023 को 7 फ़ीसदी से ज़्यादा रिटर्न के साथ एक अच्छे नोट पर ख़त्म करते हुए, ये फ़ंड्स आगे भी तेज़ी बनाए रखने के मूड में हैं. अगर आप अपने बैंक डिपॉज़िट की तुलना में इनका रिटर्न देखें, तो लिक्विड, ओवरनाइट और अल्ट्रा-शॉर्ट ड्यूरेशन फ़ंड्स मीलों आगे दिखेंगे. दिलचस्प ये है कि इनका प्रदर्शन कॉर्पोरेट बॉन्ड, शॉर्ट टर्म और मीडियम टर्म के फ़ंड्स को टक्कर दे रहा है. चूंकि ब्याज़ दरें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं, इसलिए लिक्विड और अल्ट्रा-शॉर्ट ड्यूरेशन फ़ंड्स का प्रदर्शन शॉर्ट-ड्यूरेशन फ़ंड्स के प्रदर्शन जैसा ही है. ऊंची ब्याज दरों की वजह से ये फ़ंड्स उन बॉन्ड्स में निवेश करना जारी रख पाए हैं जो ज़्यादा रिटर्न देते हैं. कुल मिलाकर, आपको अपने शॉर्ट-टर्म लक्ष्यों को पूरा करने के लिए लिक्विड और अल्ट्रा-शॉर्ट-ड्यूरेशन फ़ंड्स में निवेश करना चाहिए. इस मिसाल से समझिए कि आपको ऐसा क्यों करना चाहिए: मान लीजिए कि आप अगले छह महीने में एक घर ख़रीदना चाहते हैं और आपने डाउन पेमेंट के लिए अपने सेविंग बैंक एकाउंट में ₹25 लाख जमा कर लिए हैं. टॉप बैंकों के सेविंग एकाउंट में भी आपको कुल मिलाकर सालाना 3.5 फ़ीसदी ब्याज़ ही मिलेगा, जबकि लिक्विड फ़ंड्स 6 फ़ीसदी से भी ज़्यादा रिटर्न देते हैं. मतलब, छह महीने की अवधि में आपकी प्री-टैक्स सेविंग क़रीब ₹30,000 ज़्यादा होगी. हालांकि ये अंतर ज़्यादा बड़ा नहीं है, पर आप बड़ा जोख़िम लिए बि
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