Anand Kumar
आप ट्रैफ़िक जाम में रेंग रहे हैं. आप एक सिंगल कार की लेन में हैं, और दाहिनी और बांई तरफ़ कारों की दो और लेन हैं. किसी कारण, आपकी लेन दूसरों के मुक़ाबले बेहद धीरे चल रही है. आप दूसरी लेन में खिसक जाने का फ़ैसला करते हैं, जो तेज़ है. किसी तरह आप ऐसा करने में क़ामयाब हो जाते हैं, और पीछे वाले ड्राइवरों के ग़ुस्से से भरे हॉर्न पूरी तरह से नज़रअंदाज़ कर देते हैं. हालांकि, जैसे ही आप ये कमाल करते हैं, आपकी नई लेन किसी जादू से धीमी हो जाती है, सबसे धीमी. ये हम सभी के साथ हर समय होता है, सिर्फ़ ड्राइविंग करते हुए ही नहीं बल्कि निवेश करते हुए भी. मेरे ख़याल से आप मेरी बात समझ गए होंगे.
हम सभी ने स्टाक मार्केट को रोलर कोस्टर की तरह ऊपर-नीचे जाते हुए देखने और सोचने में वक़्त बिताया है कि हम अभी चुपचाप बैठें या अगले मोड़ पर छलांग मार कर बाहर हो जाएं. अपने निवेशों को लेकर कुछ चिंता स्वाभाविक होती है, ख़ासतौर पर जब लगे कि मार्केट का अपना अलग दिमाग है. पर यहां एक बात है - जब बात निवेश की हो, तो धीमे और लगातार चलने वाला सच में रेस जीत जाता है.
आइए डाटा पर कुछ बात करते हैं. ऐतिहासिक डाटा दिखाता है कि मार्केट के रोज़ आने वाले उतार-चढ़ावों का अंदाज़ा लगाना वैसा ही है जैसे कोई सिक्का उछालना, मगर प्रॉफ़िट कमाने का चांस उतना ही बेहतर होता जाता है जितना ज़्यादा आप निवेश में बने रहते हैं. असल में, अगर आप अपने निवेश को पांच साल के लिए होल्ड करते हैं, तो पॉज़िटिव रिटर्न कमाने का चांस बढ़ कर 90% हो जाता है, और अगर आप एक दशक तक बने रहते हैं, तो ये नंबर 99% प्रतिशत के शिखर पर पहुंच जाता है!
तो, आपके लिए इसका क्या मतलब है? दरअसल, इसका मतलब है कि मार्केट की हर रोज़ की मारा-मारी में फंसने के बजाए, आपको अपने लॉन्ग-टर्म के खेल पर फ़ोकस करना चाहिए. हां, लंबे समय का ये खेल कई बार डरा सकता है, मगर ये तो इस सफ़र का हिस्सा है. असली ईनाम उन्हीं लोगों को मिलता है जो अपनी नज़र क्षितिज पर रखते हैं और अपने रास्ते पर बने रहते हैं. हां ये ज़रूर है कि जब मार्केट में उथल-पुथल मची हो तो हमेशा शांत बने रहना आसान नहीं होता, ख़ासतौर पर तब, जब आप अच्छे-खासे प्रॉफ़िट पर बैठे हों. मगर यहीं पर अच्छी तरह से डाइवर्सिफ़ाइड पोर्टफ़ोलियो और मज़बूत इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटजी काम आती है.
इस बीमारी का इलाज भी आसन है और हमारे पाठक इसे अच्छी तरह समझते हैं. ये सिर्फ़ डाइवर्सिफ़ाई करने, एसेट रीबैलेंस करने, कॉस्ट एवरेज होने जैसी बुनियादी, पुरानी और भरोसेमंद बातें हैं. अपने निवेश को अलग-अलग एसेट क्लास और सेक्टर में फैलाकर, आप अपने रिस्क को कम करने और निवेश का ऊबड़-खाबड़ हिस्सा आसान कर सकते हैं. और SIP की ताक़त आपको कभी नहीं भूलनी चाहिए. इसके ज़रिए, नियमित अंतराल पर एक तय रक़म निवेश करके, आप क़ीमतें कम होने पर ज़्यादा यूनिट्स ख़रीदेंगे और क़ीमतें ज़्यादा होने पर कम यूनिट्स ख़रीदेंगे. ये समय के साथ बाज़ार की अस्थिरता के असर को बैलेंस करने में आपकी मदद कर सकता है. यही वो आधार है जिस पर वैल्यू रिसर्च की पूरी फ़िलॉसफ़ी को खड़ा किया गया है, लेकिन इसे बार-बार याद दिलाने में कोई हर्ज़ नहीं. शायद हमें कुछ 'इन्वेस्टिंग बेसिक्स' पोस्टर छपवाने चाहिए और उन्हें इस मैगज़ीन के साथ देना चाहिए.
कहने की ज़रूरत नहीं कि हर एक निवेशक अलग है, और आपकी निवेश स्ट्रैटजी में आपके लक्ष्य और जोख़िम लेने की क्षमता की झलक होनी ही चाहिए. हालांकि, बुनियादी बातें सभी के लिए एक जैसी होती हैं. अगर आपको अगले पांच साल के भीतर अपने पैसों की ज़रूरत पड़ने वाली है, तो अपने पोर्टफ़ोलियो का एक हिस्सा डेट (debt) इन्वेस्टमेंट में रखना अच्छा हो सकता है, जो इक्विटी की तुलना में कम उतार-चढ़ाव वाले होते हैं. लेकिन अगर आपके पास लंबा समय है, तो अपने पैसे को बाज़ार की लहरों की सवारी कराने से न डरें. और इतिहास कहता है कि आपको अपने धैर्य का ईनाम मिलेगा.
आख़िर, निवेश कोई IPL मैच नहीं बल्कि टेस्ट मैच है. अपने लंबे समय के लक्ष्यों को ध्यान में रख कर, एक अच्छा डाइवर्सिफ़ाइड पोर्टफ़ोलियो बना कर, और SIP की पावर का फ़ायदा उठाकर, आप पूरे आत्मविश्वास से बाज़ार के उतार-चढ़ाव से निपट सकते हैं. और याद रखें - इतिहास गवाह है कि बाज़ार की सबसे बड़ी गिरावट के बाद और भी बड़ी रिकवरी हुई है, हमेशा.
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