इंटरव्यू

समय-समय पर होने वाले बदलावों के समय बड़े फ़ैसले 'फ़ायदेमंद' हो सकते हैं

ICICI प्रूडेंशियल MF के अनीश तवाक्ले उनमें चंद मैनेजरों में से हैं जो स्मॉल- और लार्ज-कैप फ़ंड एक साथ मैनेज करते हैं

ICICI प्रूडेंशियल MF के अनीश तवाक्ले उनमें चंद मैनेजरों में से हैं जो स्मॉल- और लार्ज-कैप फ़ंड एक साथ मैनेज करते हैं

एक मैनेजमेंट कंसल्टेंट से लेकर इक्विटी रिसर्च में भूमिका निभाना मुश्किल लग लग सकता है, लेकिन ICICI प्रूडेंशियल म्यूचुअल फ़ंड में डिप्टी CIO-इक्विटी, अनीश तवाक्ले के लिए ये एक स्वाभाव से मेल खाने वाला बदलाव था.

दिल से एक अर्थशास्त्री, तवाक्ले इस समय छह व्यापक फ़ंड्स की देखरेख करते हैं, जिसमें लार्ज-कैप से लेकर थिमैटिक और स्मॉल-कैप फ़ंड तक शामिल हैं.

तवाक्ले की देखरेख वाले लार्ज-कैप फ़ंड -ICICI प्रूडेंशियल ब्लूचिप फ़ंड - का एसेट क़रीब ₹53,500 करोड़ है और ये ICICI प्रूडेंशियल MF का दूसरा सबसे बड़ा फ़ंड है.

इस ख़ास बातचीत में, उन्होंने कई पहलुओं पर अपनी राय दी, जिनमें GARP (growth at reasonable price) वाली निवेश रणनीति के प्रति उनका संदेह, अर्थव्यवस्था में साइक्लिक टर्न या चक्रीय बदलाव के प्रति उनकी रुचि और बैंकों पर कम भार होना शामिल है.

अनीश तवाक्ले के साथ बातचीत पर आधारित लेख यहां पढ़ें -

किस चीज़ ने आपको इक्विटी निवेश की ओर आकर्षित किया?

मैंने अपना करियर एक मैनेजमेंट कंसल्टेंट के तौर पर शुरू किया. इसमें कंपनियों को व्यावसायिक रणनीतियां बनाने में मदद करना शामिल है. हालांकि, जैसे-जैसे आप सीनियर होते जाते हैं, मैनेजमेंट कंसल्टिंग कस्टमर सर्विस के बारे में ज़्यादा और समस्या-समाधान के बारे में कम हो जाता है. चूंकि मुझे समस्या-समाधान में मज़ा आता था, इसलिए मैंने सोचा कि कैपिटल मार्केट ही सही जगह होगी. इस तरह मैं इक्विटी अनालेसिस में शामिल हुआ.

सलाह, भीतर से रणनीतियों को मज़बूत करने की बात है, और निवेश उन रणनीतियों और उनकी पालन क्षमता का बाहर से मूल्यांकन करता है. इसलिए, मैं इन्हें एक सिक्के के दो पहलू के तौर पर देखता हूं.

आपने इक्विटी रिसर्च से फ़ंड मैनेजमेंट में बदलाव का फ़ैसला क्यों किया?

मुझे हमेशा बिज़नस का अनालेसिस करने में मज़ा आया है, और मैं एक भावुक अर्थशास्त्री हूं. मेरी राय में, इक्विटी अनालेसिस, आर्थिक नज़रिए से बिज़नस के अनालेसिस के बारे में है. मैं अभी भी बहुत रिसर्च आधारित व्यक्ति हूं. (लेकिन) वक़्त के साथ, जैसे-जैसे आप इक्विटी अलानेसिस में ज़्यादा तजुर्बेकार हो जाते हैं, इक्विटी अनालेसिस में अपनी रुचि बनाए रखते हुए फ़ंड मैनेजमैंट में जाना एक स्वाभाविक बदलाव है. मैं अभी भी विश्लेषकों के साथ काफ़ी वक़्त बिताता हूं, ये समझता हूं कि वे चीज़ों के बारे में कैसे सोच रहे हैं और उन्हें गाइड करने की कोशिश करता हूं कि फ़ंड के मैनेजमेंट करने के अलावा कैसे रिसर्च को बेहतर बना सकते हैं.

बार्कलेज़, क्रेडिट स्विस, अलायंसबर्नस्टीन और मैकिन्से में अपने लंबे इक्विटी रिसर्च करियर को देखते हुए, अब जब आप फ़ंड का मैनेजमेंट करते हैं तो कौन से सबक़ सबसे क़ीमती साबित हुए हैं?

जहां तक इक्विटी अनालिसिस का सवाल है, मुझे एहसास हुआ है कि आर्थिक उसूल में अच्छी नींव रखना बहुत मददगार है. आर्थिक उसूलों को समझने से आपको इस बात का अंदाज़ा लगाने में मदद मिलती है कि इंडस्ट्री कैसे विकसित करेगी. दूसरा, इतिहास का सम्मान करें, क्योंकि इतिहास बिज़नस और बाज़ारों में उत्साह और निराशा के रूप में खुद को दोहराता है. इसलिए, एक बार जब आप आर्थिक इतिहास और इंडस्ट्री के इतिहास को पढ़ेंगे, तो आप भविष्य में क्या होगा और रिस्क-रिटर्न को समझने के बारे में एक नज़रिया बनाने के लिए बहुत अच्छी स्थिति में हैं.

आप ब्लूचिप फ़ंड से लेकर स्मॉल-कैप फ़ंड तक, काफ़ी अलग तरह के फ़ंड्स का मैनेजमेंट करते हैं. इतनी बड़ी स्ट्रैटजी अपनाते वक़्त आप क्या सोचते हैं?

हालांकि पहली नज़र में लार्ज और स्मॉल कैप के बीच का अंतर साफ़ दिखाई देता है, लेकिन जब आप स्टॉक चुनते हैं, तो नज़रिया वही होता है. ऐसा इसलिए है, क्योंकि एक मज़बूत कंपनी की ख़ासियत नहीं बदलती, चाहे आप लार्ज कैप या स्मॉल कैप देख रहे हों. एक अच्छी प्रतिस्पर्धी से सुरक्षा वाली एक मज़बूत कंपनी आम तौर पर वो होती है जो बाज़ार में आगे होती है और जिसके पास मुनाफे़ का एक ट्रैक रिकॉर्ड होता है. चाहे वो लार्ज-कैप कंपनी हो या स्मॉल-कैप कंपनी, वे अपनी खासियतें नहीं बदलती.

अब, कुछ इंडस्ट्री बड़ी हैं, और बाज़ार के लीडर लार्ज कैप बन जाती हैं, और कुछ बिज़नस छोटे हैं, और बाज़ार के लीडर स्मॉल कैप बन जाते हैं. मिसाल के लिए, ऑरिजनल इक्विपमेंट मैन्यूफेचरर (OEM) इंडस्ट्री, एक बड़ी इंडस्ट्री है और बाज़ार के लीडर और लार्ज कैप हैं. लेकिन इंडिविजुअल ऑटो कंपोनेंट इंडस्ट्री छोटे हैं (टायर, बैटरी, लाइटिंग आदि) और इन इंडस्ट्री में बाज़ार के लीडर स्मॉल कैप बने हुए हैं. इसलिए, स्टॉक चुनने का नज़रिया नहीं बदलता है.

क्या आप अपनी पूरी इंवेस्टमेंट फ़िलॉसफ़ी के बारे में बता सकते हैं? किस तरह के स्टॉक या बाज़ार की स्थितियां आप में जोश पैदा करती हैं?

इंवेस्टमेंट फ़िलॉसफ़ी का एक हिस्सा टॉप-डाउन नज़रिया है, जिसका मूल रूप से अर्थ फ़ाइनेंशियल साइकल के आधार पर सेक्टर को चुनना है.

दूसरी बॉटम-अप स्ट्रैटजी है, जिसमें मैं वैल्यू स्टॉक या ग्रोथ और क्वालिटी स्टॉक चुन सकता हूं. मैं बीच में निवेश नहीं करता, जिसे ग्रोथ एट रिज़नेबल प्राइस (GARP) स्टॉक कहा जाता है.

मेरी नज़र में, जो कंपनियां मीडियम कैटेगरी में आती हैं और जहां जहां वैल्युएशन कम है, वे न तो बाज़ार में अग्रणी बनने के लिए म़जबूत हैं और न ही सस्ती हैं.

मुझे क्वॉलिटी और ग्रोथ कंपनियां पसंद हैं क्योंकि वे प्रोफ़िटेबिलिटी (लाभप्रदता) और कम्पाउंड पोटेंशियल (चक्रवृद्धि क्षमता) के मज़बूत ट्रैक रिकॉर्ड के साथ बाज़ार में आगे हैं. इसलिए, भले ही मैं वैल्युएशन पर थोड़ा ज़्यादा भुगतान करूं, तो ठीक रहेगा क्योंकि वह कंपनी कमाई करना जारी रखेगी.

दूसरे प्वाइंट का जवाब देने के लिए, मुझे अर्थव्यवस्था में साइक्लिक टर्न (चक्रीय बदलाव के मोड़) पसंद हैं, जब या तो अर्थव्यवस्था निचले स्तर पर होती है या लोग अभी भी निराशावादी होते हैं. या जहां इंडस्ट्री में क्षमता का इस्तेमाल अपने चरम पर है और, यहां से, कमाई कम होने की उम्मीद बहुत है. वो मेरे लिए निर्णायक मोड़ है. आप बड़े साइक्लिकल फ़ैसले ले सकते हैं, और अगर आप सही हैं, तो आपको उनके लिए इनाम भी मिलेगा.

ढाई साल पहले एक ऐसा मोड़ आया जब देश में रियल एस्टेट में तेज़ी आनी शुरू हुई. बहुत सारे लोग नकारने वाले थे. लेकिन मुझे एहसास हुआ कि मौद्रिक नीति अब आसान है और रियल एस्टेट में बदलाव आ रहा है, जिससे ओवरऑल अर्थव्यवस्था को फ़ायदा होगा. मेरी राय में, रियल एस्टेट अर्थव्यवस्था में सब कुछ संचालित करता है. एक बार जब रियल एस्टेट में तेज़ी आती है, तो नौकरियों की मांग पैदा होती है और दूसरी चीज़ों की मांग भी बढ़ जाती है. इसलिए, ऐसे साइक्लिकल टर्न (चक्रीय मोड़) मेरे लिए बहुत दिलचस्प हैं.

मैंने देखा कि फ़ाइनेंशियल सेक्टर में ICICI प्रू ब्लूचिप फ़ंड और ICICI प्रू फ़ोकस्ड फ़ंड का वेट (weight) कम है. क्या आप इस हालत के पीछे की रणनीति बता सकते हैं?
हमें पहले ही एहसास हो गया था कि सेकटर में कंसॉलिडेशन की वजह से बैंकिंग सिस्टम डिपॉज़िट के साथ संघर्ष करेगा. नतीजा, इंकम एवरेज और नेट इंट्रेस्ट मार्जिन (NIM) पर भी दबाव पड़ेगा. इस वजह से बैंकों में हमारा वेट या निवेश कम हो गया. जबकि हम बैंकों पर कम और हम म्यूचुअल फ़ंड और बीमा कंपनियों पर ज़्यादा निवेश करने वाले हैं. इसलिए, इस वक्त फ़ाइनांस को ध्यान में रखते हुए, हमने एसेट मैनेजमेंट और बीमा कंपनियों में निवेश करने का फ़ैसला लिया.

हाल के सालों में स्मॉल-कैप इंडेक्स से मज़बूत रिटर्न के बावजूद, ICICI प्रू स्मॉलकैप फ़ंड को चुनौतियों का सामना करना पड़ा है. कार्यभार संभालने के बाद से आप इसके प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए क्या रणनीतियां लागू कर रहे हैं?
ICICI प्रूडेंशियल में, हमारा मानना है कि ऐसे वक़्त होंगे जब बाज़ार तर्कहीन होंगे. उस हालत में, एक फ़ंड मैनेजर के तौर पर, आप तर्कसंगत हो सकते हैं, या आप बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं. लेकिन तार्किक रूप से कहें तो, एक अतार्किक बाज़ार में, आप तर्कसंगत नहीं रह सकते और बेहतर प्रदर्शन नहीं कर सकते.

इसलिए, एक फ़ंड हाउस के रूप में, हमारा मानना है कि स्मॉल-कैप सेक्टर में बबल (उछाल) है, और हम सतर्क हैं. अगर स्मॉल कैप में कुछ वक़्त तक तेजी बनी रही, तो हमारा फ़ंड कमजोर प्रदर्शन करता रहेगा, लेकिन ये एक सोची-समझी रणनीति है.

ऐसा हो सकता है कि रैली कुछ वक्त तक चले, और हम ग़लत हैं; हम उसके साथ रहेंगे. लेकिन अभी, हमारा कॉल है कि स्मॉल-कैप एलोकेशन (आवंटन) सीमित होना चाहिए.

चूंकि आप ICICI प्रू ब्लूचिप, एक लार्ज-कैप फ़ंड का सह-प्रबंधन करते हैं, क्या आपको लगता है कि एक्टिव फ़ंड अभी भी इस सेगमेंट में अल्फ़ा पैदा कर सकते हैं?

इस बात के सबूत हैं कि एक्टिव लार्ज-कैप फ़ंड अल्फा पैदा करने में सक्षम हैं. मैं समझाता हूं कि मैं क्यों मानता हूं कि लार्ज-कैप (फ़ंड) बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं.

स्टॉक ख़रीदते वक़्त हमारा मौलिक नज़रिया या आधार ये है कि अगर आपको 100 रुपये में कोई चीज़ पसंद है, तो आपको 200 रुपये में वो कम पसंद होनी चाहिए. अगर आपको 200 रुपये में कोई चीज़ पसंद या नापसंद है, तो आपको वह 100 रुपये में ज़्यादा पसंद होनी चाहिए. तार्किक रूप से, जैसे-जैसे चीजें बढ़ती हैं, आपको उन्हें कम पसंद करना चाहिए. लेकिन इंडेक्स फ़ंड बिल्कुल उलट करता है.

जैसे-जैसे स्टॉक की क़ीमत बढ़ती है, इंडेक्स में उस स्टॉक का वेट (निवेश) भी बढ़ता है, और हर इंक्रीमेंटल इन-फ़्लो (निवेशक के पैसे का) उस स्टॉक को ज़्यादा एलोकेशन किया जाएगा जो ऊपर चला गया है. तो, परिभाषा के मुताबिक़, ये फ़्लो है. प्रभावी रूप से, आप 100 रुपये के मुक़ाबले में 200 रुपये पर ज़्यादा ख़रीद रहे हैं.

दूसरे शब्दों में, पैसिव फंड में, आप उसके प्रदर्शन के बाद ख़रीदारी कर रहे हैं. ये ICICI प्रूडेंशियल म्यूचुअल फ़ंड में हम जो रेकमंडेशन करते हैं उसके बिल्कुल उलट है. किसी को ख़राब प्रदर्शन के बाद ख़रीदना चाहिए न कि अच्छा प्रदर्शन करने के बाद.

मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों का हाल क्या बिगाड़ सकता है? क्या मौजूदा वैल्युएशन का कोई मतलब है?

हमने अतीत में देखा है कि निवेशकों के लिए कहानियों के आधार पर या एक या दो तिमाहियों के मज़बूत प्रदर्शन के आधार पर शेयरों में आकर्षित होना असामान्य नहीं है, ख़ासकर जब आर्थिक नज़रिया पॉज़िटिव हो. मैं नहीं जानता कि पार्टी को क्या ख़राब कर सकता है, क्या लिक्विडिटी ख़त्म हो जाएगी या उत्साह ख़त्म हो जाएगा। मिड-कैप और स्मॉल-कैप सेगमेंट की कुछ कंपनियों के पास बड़ी खामियां नहीं हैं. इसलिए मुझे लगता है कि ये जोख़िम है; स्मॉल और मिड-कैप में रिस्क-रिटर्न से समझौता, अच्छा नहीं है. हमारी नज़रमें, लार्ज कैप बहुत बेहतर रिस्क-रिटर्न का बैलेंस देता हैं.

लार्ज कैप के बीच, कौन से सेक्टर या थीम पैसे के बदले अच्छी वैल्यू देते हैं?

इस वक़्त कुछ भी सस्ता नहीं है. लेकिन हमारा तर्क यह है कि अर्थव्यवस्था अच्छी स्थिति में है, इसलिए कमाई का नज़रिया अच्छा है. जब अर्थव्यवस्था अच्छा प्रदर्शन करती है, तो साइक्लिकल सेक्टर अच्छा प्रदर्शन करते हैं. इसलिए, हमें घरेलू साइकिल वाली चीज़ें पसंद हैं. फिर ऑटोमोबाइल, कैपिटल गुड्स और फ़ाइनेंशियल सेक्टर हैं. फिलहाल, मैं FMCG सेक्टर और धातुओं को लेकर कम पॉसज़िटिव हूं.

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