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सारांशः म्यूचुअल फ़ंड में SIP के ज़रिए निवेश करना लंबे समय में वेल्थ बनाने का एक लोकप्रिय तरीक़ा है. पिछले 10 साल के आंकड़ों में कुछ फ़ंड्स ने निवेशकों को शानदार SIP रिटर्न दिया है, जिनमें मासिक ₹10,000 की SIP भी बड़ी रक़म में बदल गई. यह स्टोरी ऐसे टॉप 5 फ़ंड्स के रिटर्न और SIP वैल्यू के आंकड़े बताती है, साथ ही यह भी समझाती है कि सिर्फ पिछले रिटर्न के आधार पर फ़ंड चुनना क्यों सही रणनीति नहीं है.
म्यूचुअल फ़ंड में SIP के ज़रिए निवेश करना लंबे समय में वेल्थ बनाने का एक लोकप्रिय तरीक़ा है. अगर पिछले 10 साल के आंकड़ों पर नज़र डालें, तो कुछ फ़ंड्स ने निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया है. इन फ़ंड्स में नियमित रूप से की गई छोटी-छोटी मासिक SIP भी समय के साथ बड़ी रक़म में बदल गई. यहां हम उन टॉप 5 म्यूचुअल फ़ंड्स की जानकारी दे रहे हैं, जिन्होंने बीते 10 साल में सबसे ज़्यादा SIP रिटर्न दिया है.
हालांकि, ध्यान रखें कि किसी फ़ंड का पिछला प्रदर्शन भविष्य में भी उसी तरह के रिटर्न की गारंटी नहीं देता. निवेश से पहले अपने फ़ाइनेंशियल गोल और जोख़िम क्षमता को ज़रूर ध्यान में रखें.
टॉप 5 म्यूचुअल फ़ंड
| फ़ंड | SIP रिटर्न (%) | SIP वैल्यू |
|---|---|---|
| DSP World Gold Mining Overseas Equity Omni FoF | 25.87 | ₹47.27 लाख |
| Quant Small Cap Fund | 25.75 | ₹46.96 लाख |
| Motilal Oswal NASDAQ 100 ETF* | 24.62 | ₹44.18 लाख |
| Quant Infrastructure Fund | 22.94 | ₹40.36 लाख |
| Nippon India Small Cap Fund | 22.49 | ₹39.37 लाख |
| नोटः रिटर्न का डेटा 1 सितंबर, 2026 का है. मोतीलाल ओसवाल नैस्डैक 100 ETF को छोड़कर लिस्ट में सभी फ़ंड के डायरेक्ट प्लान शामिल किए गए हैं. SIP की वैल्यू का आकलन ₹10,000 की मंथली SIP के आधार पर किया गया है. |
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1. DSP World Gold Mining Overseas Equity Omni FoF
इस लिस्ट में सबसे ऊपर है DSP World Gold Mining Overseas Equity Omni FoF, जिसने पिछले 10 साल में 25.87% का सालाना SIP रिटर्न दिया है. अगर किसी निवेशक ने 10 साल पहले इस फ़ंड में हर महीने ₹10,000 की SIP शुरू की होती, तो उसकी कुल निवेश राशि ₹12 लाख होती. 1 सितंबर, 2026 तक यह निवेश बढ़कर करीब ₹47.27 लाख हो गया होता.
यह फ़ंड दुनियाभर की गोल्ड माइनिंग कंपनियों में निवेश करता है. इसके थीमैटिक और इंटरनेशनल एक्सपोज़र की वजह से इसमें सामान्य इक्विटी फ़ंड्स की तुलना में अलग तरह के जोखिम हो सकते हैं.
2. Quant Small Cap Fund
Quant Small Cap Fund 25.75% के SIP रिटर्न के साथ दूसरे नंबर पर है. अगर इसमें पिछले 10 साल तक हर महीने ₹10,000 की SIP की गई होती, तो ₹12 लाख का कुल निवेश बढ़कर करीब ₹46.96 लाख हो गया होता.
स्मॉल कैप फ़ंड्स आम तौर पर बड़ी कंपनियों के मुकाबले छोटी कंपनियों में निवेश करते हैं. इनमें लंबे समय में ज़्यादा ग्रोथ की संभावना हो सकती है, लेकिन इनके साथ उतार-चढ़ाव और जोखिम भी अधिक हो सकता है.
3. Motilal Oswal NASDAQ 100 ETF
तीसरे स्थान पर Motilal Oswal NASDAQ 100 ETF है, जिसने 24.62% का सालाना SIP रिटर्न दिया है. इस फ़ंड में ₹10,000 की मासिक SIP 10 साल तक की गई होती, तो निवेश की वैल्यू करीब ₹44.18 लाख हो गई होती.
यह ETF अमेरिकी शेयर बाज़ार की NASDAQ-100 इंडेक्स की कंपनियों में निवेश का एक्सपोज़र देता है. इसलिए इसके रिटर्न पर अमेरिकी शेयर बाज़ार के प्रदर्शन के साथ-साथ रुपये और डॉलर के एक्सचेंज रेट में बदलाव का भी असर पड़ सकता है.
4. Quant Infrastructure Fund
Quant Infrastructure Fund 22.94% के SIP रिटर्न के साथ चौथे स्थान पर है. इसमें ₹10,000 की मासिक SIP 10 साल तक करने पर कुल ₹12 लाख का निवेश बढ़कर करीब ₹40.36 लाख हो गया होता.
जैसा कि नाम से पता चलता है, यह फ़ंड इंफ्रास्ट्रक्चर थीम से जुड़ी कंपनियों में निवेश करता है. ऐसे फ़ंड्स का प्रदर्शन किसी ख़ास सेक्टर या थीम में तेजी और मंदी से ज़्यादा प्रभावित हो सकता है.
5. Nippon India Small Cap Fund
Nippon India Small Cap Fund 22.49% के रिटर्न के साथ इस लिस्ट में पांचवें नंबर पर है. अगर निवेशक ने इसमें 10 साल तक हर महीने ₹10,000 की SIP की होती, तो ₹12 लाख की कुल निवेश राशि बढ़कर करीब ₹39.37 लाख हो गई होती.
यह भी स्मॉल कैप कैटेगरी का फ़ंड है. स्मॉल कैप फ़ंड्स में लंबी अवधि में तेज़ ग्रोथ की संभावना हो सकती है, लेकिन बाज़ार में गिरावट के दौरान इनमें उतार-चढ़ाव भी ज़्यादा देखने को मिल सकता है.
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SIP क्यों है वेल्थ बनाने का असरदार तरीक़ा?
इन आंकड़ों से पता चलता है कि लंबी अवधि में नियमित निवेश कितना बड़ा असर डाल सकता है. इन सभी उदाहरणों में निवेशक ने हर महीने सिर्फ़ ₹10,000 लगाए. 10 साल में उसकी कुल निवेश राशि ₹12 लाख रही, लेकिन शानदार रिटर्न की वजह से इन फ़ंड्स में निवेश की वैल्यू करीब ₹39 लाख से ₹47 लाख तक पहुंच गई होती.
SIP का एक फ़ायदा यह भी है कि इसमें बाज़ार के अलग-अलग स्तरों पर नियमित निवेश होता रहता है. बाज़ार गिरने पर निवेशक को ज़्यादा यूनिट्स और बाज़ार चढ़ने पर कम यूनिट्स मिलती हैं. इसे रुपी कॉस्ट एवरेजिंग कहा जाता है.
हालांकि, SIP अपने आप में रिटर्न की गारंटी नहीं देती. लंबे समय तक निवेश बनाए रखना और सही फ़ंड का चुनाव करना उतना ही महत्वपूर्ण है.
फ़ंड चुनते समय किन बातों का रखें ध्यान?
सिर्फ पिछले रिटर्न को देखकर किसी फ़ंड में निवेश करना सही रणनीति नहीं है. फ़ंड चुनते समय इन बातों पर भी ग़ौर करना चाहिए:
- फ़ंड का लॉन्ग-टर्म ट्रैक रिकॉर्ड कैसा रहा है?
- अलग-अलग बाज़ार परिस्थितियों में फ़ंड का प्रदर्शन कैसा रहा?
- फ़ंड मैनेजर का अनुभव और निवेश की रणनीति क्या है?
- फ़ंड का जोख़िम स्तर आपकी जोख़िम क्षमता के मुताबिक है या नहीं?
- एक्सपेंस रेशियो और दूसरी कॉस्ट कितनी हैं?
- फ़ंड आपके निवेश के गोल्स और समय-सीमा के लिए उपयुक्त है या नहीं?
ख़ास तौर पर, टॉप रिटर्न वाले फ़ंड्स को देखकर यह मान लेना सही नहीं है कि वे आगे भी लिस्ट में सबसे ऊपर बने रहेंगे. पिछला प्रदर्शन सिर्फ़ यह बताता है कि फ़ंड ने अब तक कैसा प्रदर्शन किया है, भविष्य में क्या होगा इसकी गारंटी नहीं देता.
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ये लेख पहली बार सितंबर 03, 2024 को पब्लिश हुआ, और सितंबर 02, 2026 को अपडेट किया गया.





