SIP सही है

SIP सही है: म्यूचुअल फ़ंड में स्मार्ट निवेश का सबसे भरोसेमंद तरीक़ा

SIP शुरू करना चाहते हैं तो अपने हर ज़रूरी सवाल का जवाब जानिए यहां

SIP क्या है? म्यूचुअल फ़ंड में स्मार्ट निवेश का तरीक़ाAI-generated image

SIP में निवेशक अपने बैंक अकाउंट से हर महीने (या किसी तय अवधि में) एक निश्चित रक़म को म्यूचुअल फ़ंड में निवेश करता है. ये रक़म निवेशक के चुने हुए म्यूचुअल फ़ंड के यूनिट में बदल जाती है, जो बाज़ार के उतार-चढ़ाव के अनुसार घटती-बढ़ती रहती है. इस तरह निवेशक नियमित तौर पर निवेश करते रहते हैं और लंबे समय में अपने फ़ाइनेंशियल गोल को हासिल कर पाते हैं.

SIP में ये नहीं देखा जाता कि निवेश किए जा रहे फ़ंड के NAV की क़ीमत क्या है या बाज़ार किस स्तर पर है. निवेशक जब अपनी SIP लगातार जारी रखता है, तो बाज़ार गिरने पर उसे ज़्यादा यूनिट मिलती हैं. इससे यूनिट की औसत क़ीमत कम हो जाती है और निवेशक बेहतर रिटर्न प्राप्त करता है.

अगर आप एक बार में बड़ी रक़म निवेश करते हैं, तो ये निवेश बाज़ार के सबसे ऊंचे स्तर पर हो सकता है, जब NAV की क़ीमत ज़्यादा होती है. ऐसे में अगर बाज़ार गिरता है, तो आपका रिटर्न कम हो सकता है. SIP के ज़रिए आप लंबे समय में ख़रीद क़ीमत का औसत कम कर लेते हैं.

SIP में निवेश करने वाले आमतौर पर निवेश लंबे समय तक बनाए रखते हैं, इसलिए बाज़ार के उतार-चढ़ाव का उन पर ख़ास असर नहीं होता. पर कुछ निवेशक बाज़ार गिरने पर निवेश बेच देते हैं और SIP बंद कर देते हैं, और जब बाज़ार बढ़ता है तो फिर निवेश बढ़ा देते हैं. यानी, निवेशकों को जो करना चाहिए उसका उल्टा करते हैं. SIP में हर महीने नियमित निवेश करना होता है, बिना ये सोचे कि कब निवेश करना है. तभी बेहतर रिटर्न मिलता है.

SIP में निवेश करने के फ़ायदे (Benefits of SIP in Hindi)

  1. छोटी रक़म से शुरुआत
    SIP में आप सिर्फ़ ₹500 से निवेश शुरू कर सकते हैं, जो इसे सभी प्रकार के निवेशकों के लिए आसान बनाता है.

  2. रुपए की कॉस्ट एवरेजिंग (Cost Averaging)
    हर महीने एक तय रक़म निवेश करने से, जब बाज़ार नीचे होता है तो ज़्यादा यूनिट मिलती हैं, और जब बाज़ार ऊपर होता है तो कम. इससे निवेश की औसत लागत कम हो जाती है, जिसे कॉस्ट एवरेजिंग कहते हैं.

  3. कॉस्ट एवरेजिंग का मतलब
    नियमित निवेश से बाज़ार के उतार-चढ़ाव के बावजूद आपके निवेश की औसत लागत कम होती है, जो निवेशकों को लाभ पहुंचाती है.

  4. कंपाउंडिंग का फ़ायदा (Compounding Benefits)
    SIP से आप अपने निवेश पर कंपाउंडिंग का फ़ायदा उठा सकते हैं. समय के साथ आपका नियमित निवेश रिटर्न को भी बढ़ाता है, जिससे लंबे समय में अच्छा मुनाफ़ा होता है.

  5. मार्केट टाइमिंग की ज़रूरत नहीं (No Need to Time the Market)
    SIP में बाज़ार के उतार-चढ़ाव की चिंता नहीं करनी पड़ती. आपको सिर्फ़ एक तय तारीख़ पर निवेश करना होता है.

  6. लंबे समय में बड़ी पूंजी बनाना (Building a Large Corpus Over Time)
    SIP से आप लंबे समय में बड़ी पूंजी जमा कर सकते हैं. बाज़ार के बढ़ने के साथ आपका निवेश कई गुना बढ़ सकता है.

  7. लचीलापन (Flexibility)
    SIP को कभी भी शुरू, बंद, या रक़म बढ़ा-घटा सकते हैं, जिससे ये निवेश और भी सुविधाजनक बनता है.

SIP में निवेश क्यों करें? (Why Should You Invest in SIP?)

SIP एक अनुशासित, लचीला और बाज़ार के उतार-चढ़ाव से सुरक्षा देने वाला निवेश विकल्प है. नियमित SIP से आप रिटायरमेंट, बच्चों की शिक्षा या घर ख़रीदने जैसे अपने लंबे समय के फ़ाइनेंशियल गोल जैसे आसानी से पूरा कर सकते हैं.

  • कम रिस्क: SIP में आप औसत मूल्य पर निवेश करते हैं, जिससे बाज़ार के उतार-चढ़ाव का जोखिम कम हो जाता है.
  • नियमित निवेश की आदत: SIP से आपको निवेश की आदत पड़ती है, जो फ़ाइनेंशियल गोल हासिल करने में मदद करती है.
     

SIP निवेश में ग़लतियों की गुंजाइश कम होती है, जबकि एकमुश्त निवेश में ज़्यादा हो सकती है.

SIP निवेश कैसे शुरू करें?

SIP निवेश शुरू करना आसान है. शुरुआत करने के लिए सात आसान स्टेप फ़ॉलो करें:

  1. एक प्लेटफ़ॉर्म चुनें (Choose a Platform): अपनी ज़रूरतों को पूरा करने वाला एक भरोसेमंद ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म चुनें.
  2. KYC पूरा करें (Complete KYC): PAN, आधार और पते के प्रमाण जैसे दस्तावेज़ अपलोड करें. म्यूचुअल फ़ंड निवेश के लिए KYC अनिवार्य है.
  3. अपना बैंक खाता लिंक करें (Link Your Bank Account): SIP या एकमुश्त निवेश के लिए बिना रुकावट का ट्रांजैक्शन सुनिश्चित करें.
  4. अपना निवेश की तरीक़ा चुनें (Choose Your Investment Mode): डायरेक्ट और रेग्युलर प्लान के बीच फैसला करें.
  5. फ़ंड शॉर्टलिस्ट करें: पिछले प्रदर्शन, जोख़िम और उद्देश्यों के आधार पर फ़ंड की तुलना करने के लिए हमारे रिसर्च टूल का इस्तेमाल करें.
  6. निगरानी करें और बदलाव करें (Monitor and Adjust): अपने पोर्टफ़ोलियो की नियमित समीक्षा करें और ज़रूरत पड़ने पर उसे संतुलित करें.
  7. निगरानी करें और बदलाव करें (Monitor and Adjust): अपने पोर्टफ़ोलियो की नियमित समीक्षा करें और ज़रूरत पड़ने पर उसे संतुलित करें.

ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म ने निवेश को बेहद आसान बना दिया है. आप कुछ ही मिनटों के भीतर अपना पहला निवेश शुरू कर सकते हैं. मगर सही ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म चुनना अच्छे अनुभव के लिए ज़रूरी है. इसके लिए प्लेटफ़ॉर्म के तमाम विकल्पों में आपको क्या देखने की ज़रूरत है.

ये भी पढ़ें: SIP से निवेश करने की हर ज़रूरी बात

 SIP के बेहद ख़ास फ़ीचर

  • इस्तेमाल में आसान (User-Friendly Interface): आसानी से सभी ज़रूरी जानकारियां देने वाले इंटरफ़ेस प्लेटफ़ॉर्म के अनुभव को सहज बनाते हैं.
  • फ़ंड के विकल्प (Fund Options): प्लेटफ़ॉर्म के पास अलग-अलग तरह के म्यूचुअल फ़ंड में निवेश की सुविधा होनी चाहिए.
  • कम फ़ीस ((Fund Options): प्लेटफ़ॉर्म वही अच्छे हैं जिनमें या तो कोई ट्रांजेक्शन फ़ीस न हो या बहुत कम हो.
  • रिसर्च टूल्स (Research Tools): फ़ंड की तुलना और प्रदर्शन की ट्रैकिंग जैसी सुविधाओं पर ध्यान दें.

 भारत में लोकप्रिय फ़ंड निवेश प्लेटफ़ॉर्म

  • AMC की वेबसाइट (डायरेक्ट प्लान).
  • Groww, Zerodha Coin, Paytm Money जैसे ऐप.
  • वैल्यू रिसर्च फ़ंड एडवाइज़र जो फ़ंड के चुनाव और उन्हें मैनेज करने को आसान बनाने वाला एग्रीगेटर है.

SIP के लिए ज़रूरी दस्तावेज़

  1. पैन कार्ड.
  2. आधार कार्ड (पते और पहचान का प्रमाण).
  3. बैंक अकाउंट की जानकारी (अकाउंट नंबर, ब्रांच का नाम, और IFSC कोड).
  4. पासपोर्ट साइज़ फ़ोटो.

SIP कितनी तरह की होती हैं?

  1. रेग्युलर (Regular SIP): रेग्युलर या नियमित SIP में निवेश का नियमित अंतराल (आमतौर पर मासिक) होता है. एक तय रक़म हर महीने निवेश की जाती है. इस तरह की SIP में पैसे ऑटोमैटिक तरीक़े से आपके अकाउंट से कट जाते हैं और समय के साथ कंपाउंडिंग का फ़ायदा मिलता हैं.
     
  2. टॉप-अप (Top-up SIP): आप समय-समय पर निवेश की रक़म बढ़ा सकते हैं. अपने निवेश में पहले से तय एक समय अंतराल चुन सकते हैं जिसमें SIP को बढ़ाया जाए. इससे पूंजी को को तेज़ी से बढ़ने में मदद मिलती है.
     
  3. फ़्लेक्सीबल (Flexible SIP): लचीला SIP निवेश आपकी बदलती आर्थिक परिस्थितियों के मुताबिक़ आपको अपने निवेश का समय एडजस्ट करने में मदद करता है. इसमें निवेशक अपनी सुविधा के मुताबिक़ SIP को घटा या बढ़ा सकता है.
     
  4. ट्रिगर (Trigger SIP): निवेशक बाज़ार या फ़ंड के प्रदर्शन के आधार पर पहले से तय किए गए ट्रिगर सेट करता है. इस तरह, बाज़ार की ख़ास परिस्थिति के मुताबिक़ SIP की चालू रखी जा सकती है या रोकी जा सकती है. इस काम को ट्रिगर सेट करके ऑटोमैटिक तरीक़े किया जाता है.
     
  5. पर्पेचुअल (Perpetual SIP): सतत SIP वो है जो शुरू करने के बाद चलती रहती है जब रोकी न जाए या इसमें कोई बदलाव न किया जाए. रेग्युलर SIP में उसके जारी रहने की एक तय अवधि होती है, मगर पर्पेचुल SIP को रिन्यू करने की ज़रूरत नहीं होती. हालांकि, नेशनल ऑटोमैटिड क्लियरिंग हाउस या NACH ने इसे ज़्यादा से ज़्यादा 30 साल के लिए तय कर दिया है (1 अक्तूबर 2023 से प्रभावी) यानि पर्पेचुअल के जारी रहने की भी एक ऊपरी सीमा तय कर दी गई है.
     
  6. मल्टी (Multi SIP): एक ही SIP के भीतर कई म्यूचुअल फ़ंड या एसेट क्लास में निवेश करने की सहूलियत होती है. इसके ज़रिए निवेशक एक साथ कई फ़ंड्स में निवेश करके अपने रिस्क को डाइवर्सिफ़ाई सकते हैं.
     
  7. स्टेप-अप (Step-up SIP): इसमें एक नियमित अतंराल पर (मान लीजिए 10% सालाना) निवेश की रक़म बढ़ाई जाती है. इसे ऑटोमैटिक तरीक़े से किया जा सकता है जिससे समय के साथ ज़्यादा बड़ी पूंजी खड़ी करने में मदद मिले.
     
  8. इक्विटी (Equity SIP): इसमें इक्विटी म्यूचुअल फ़ंड में ही निवेश किया जाता है. ये फ़ंड मुख्य रूप से स्टॉक में निवेश करते हैं जो लंबे समय मे ऊंचा रिटर्न की संभावना बनाते हैं. इक्विटी SIP उनके लिए अच्छी है जो लंबे समय के निवेश से बड़ी पूंजी बनाना चाहते हैं और मार्केट के उतार-चढ़ाव को सहन करने के क्षमता रखते हैं.
     
  9. डेट (Debt SIP): इसमें डेट म्यूचुअल फ़ंड में निवेश किया जाता है. ये फ़ंड मुख्य रूप से बॉन्ड और सरकारी सिक्योरिटीज़ (फ़िक्स्ड इनकम वाले विकल्प) में निवेश करते हैं. इनसमें इक्विटी के मुक़ाबले ज़्यादा स्थिर रिटर्न मिलते हैं. डेट में SIP करना उन निवेशकों के लिए सही है जो कम रिस्क के साथ इनकम और पूंजी की सुरक्षा चाहते हैं.
     
  10. टैक्स-सेविंग Tax Saving SIP): इसमें ELSS (इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम) में निवेश किया जाता है और इनकम टैक्स की धारा 80C के तहत टैक्स में छूट मिलती है. इसमें तीन साल का लॉक-इन पीरियड होता है. ELSS में निवेश से टैक्स भी बचता है और इक्विटी निवेश से पूंजी के तेज़ी से बढ़ने का फ़ायदा मिलता है.

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अपने फ़ाइनेंशियल गोल के अनुसार SIP कैसे चुनें?

SIP शुरू करने से पहले ये पक्का करना बेहद ज़रूरी है कि आपके पास एक ठोस निवेश उद्देश्य हो. यानि, आपको पता होना चाहिए कि आप क्यों निवेश कर रहे हैं, आप क्या हासिल करना चाहते हैं और आपका लक्ष्य कितने समय में पूरा होगा. इससे आपको अपनी SIP को बेहतर ढंग से प्लान करने में मदद मिलेगी.

  1. आपके निवेश लक्ष्य की समयावधि: निवेश कितने समय के लिए करना है ये जानना महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे ये तय किया जा सकता है कि आपको किस तरह के फ़ंड में निवेश करना चाहिए. अगर आपका निवेश उद्देश्य छोटी अवधि (1-3 साल) का है, तो इक्विटी में SIP शायद जोख़िम भरा साबित हो सकता है. इसके विपरीत, लंबी अवधि (5 साल या ज़्यादा) के लिए SIP चुनते समय इक्विटी फ़ंड्स अच्छे रिटर्न दे सकते हैं. उदाहरण के लिए, बच्चों की उच्च शिक्षा या अपनी रिटायरमेंट के लिए, जो 10-15 साल बाद ज़रूरी होगा, इक्विटी SIP फ़ायदेमंद हो सकती है.
  2. जोख़िम क्षमता और निवेश रिटर्न की अपेक्षाएं: हर निवेशक की जोख़िम उठाने की क्षमता अलग होती है. SIP चुनने से पहले अपनी जोख़िम क्षमता का पता लगाएं. उदाहरण के लिए, अगर आप एक युवा निवेशक हैं और लंबे समय तक निवेशित रह सकते हैं, तो आप ऊंचा रिस्क उठाकर इक्विटी फ़ंड्स में निवेश कर सकते हैं. दूसरी ओर, अगर आप सुरक्षित निवेश पसंद करते हैं और कम रिटर्न भी स्वीकार कर सकते हैं, तो डेट फ़ंड्स आपके लिए सही होंगे.
  3. सही फ़ंड चुनें: SIP के लिए सही फ़ंड का चुनाव करना महत्वपूर्ण है. म्यूचुअल फ़ंड्स कई तरह के होते हैं, जैसे इक्विटी फ़ंड्स, डेट फ़ंड्स और हाइब्रिड फ़ंड्स.
  • इक्विटी फ़ंड्स (Equity Funds): इक्विटी फ़ंड्स मुख्य रूप से शेयर बाज़ार में निवेश करते हैं. ये फ़ंड ऊंचे रिस्क वाले होते हैं लेकिन लंबे समय में अच्छे रिटर्न देने की क्षमता रखते हैं. अगर आप लंबे समय के वित्तीय लक्ष्य जैसे बच्चों की उच्च शिक्षा या रिटायरमेंट के लिए निवेश कर रहे हैं, तो इक्विटी में SIP एक अच्छा विकल्प हो सकता है.
  • डेट फ़ंड्स (Debt Funds): डेट फ़ंड्स उन निवेशकों के लिए सही होते हैं जो सुरक्षित और स्थिर रिटर्न चाहते हैं. डेट फ़ंड्स का निवेश सरकारी बॉन्ड्स, कॉर्पोरेट डिबेंचर्स और दूसरे डेट इंस्ट्रूमेंट्स में होता है. ये उन निवेशकों के लिए अच्छा विकल्प है जिनकी रिस्क लेने की क्षमता कम है और जिन्हें निकट भविष्य में पैसे की ज़रूरत हो सकती है.
  • हाइब्रिड फ़ंड्स (Hybrid Funds): हाइब्रिड फ़ंड्स, इक्विटी और डेट का मिश्रण होते हैं. ये फ़ंड निवेशकों को इक्विटी की ग्रोथ और डेट की स्थिरता का संतुलन देते हैं. उदाहरण के लिए, अगर आप मध्यम अवधि के लिए निवेश करना चाहते हैं और सीमित जोख़िम उठाना चाहते हैं, तो हाइब्रिड फ़ंड्स एक अच्छा विकल्प हो सकते हैं.

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रेगुलर और डायरेक्ट प्लान में निवेश कैसे करें?

म्यूचुअल फ़ंड के रेग्युलर प्लान में आप म्यूचुअल फ़ंड डिस्ट्रीब्यूटर, ब्रोकर या बैंकर के ज़रिए निवेश कर सकते हैं.

डायरेक्ट प्लान में निवेश करने के लिए आप सीधे फ़ंड कंपनी (AMC), या किसी ऑनलाइन एग्रीगेटर प्लेटफ़ॉर्म के ज़रिए निवेश कर सकते हैं. डायरेक्ट प्लान में निवेश के लिए फ़ंड डिस्ट्रीब्यूटर या ब्रोकर की ज़रूरत नहीं होती.

अपना प्लान चुनने के पहले आपको कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए जो इस तरह से हैं:

फ़ंड चुनते समय ध्यान दें:

  1. फ़ंड का प्रदर्शन: SIP चुनने से पहले फ़ंड के प्रदर्शन का मूल्यांकन करना बहुत महत्वपूर्ण है. इसके तहत आपको पिछले प्रदर्शन, बेंचमार्क से तुलना और मार्केट अस्थिरता का पता लगाना चाहिए.
  2. पिछले रिटर्न और स्थिरता: पिछले प्रदर्शन का अनालेसिस या समीक्षा आपको फ़ंड की स्थिरता और उसके रिटर्न के बारे में जानकारी देती है. हालांकि, ज़रूरी नहीं है कि एक फ़ंड का पिछले प्रदर्शन भविष्य में भी वैसा ही हो, लेकिन इससे फ़ंड की क्वालिटी और मैनेजमेंट की क्षमता का अंदाज़ा मिलता है.
  3. बेंचमार्क से तुलना: हर फ़ंड का एक बेंचमार्क होता है, जो दिखाता है कि फ़ंड का प्रदर्शन मार्केट की औसत से कैसा रहा है. अगर फ़ंड का प्रदर्शन उसके बेंचमार्क से लगातार बेहतर रहा है, तो ये फ़ंड अच्छे प्रबंधन का संकेत देता है. उदाहरण के लिए, अगर आपका फ़ंड BSE सेंसेक्स को मात दे रहा है, तो ये फ़ंड की क्वालिटी दिखाता है.
  4. मार्केट की अस्थिरता में प्रदर्शन: म्यूचुअल फ़ंड्स मार्केट के उतार-चढ़ाव से प्रभावित होते हैं. फ़ंड के प्रदर्शन की समीक्षा करते समय देखें कि वो मार्केट अस्थिरता में कैसा प्रदर्शन कर रहा है. एक अच्छा फ़ंड वो है जो मुश्किल समय में भी स्थिर प्रदर्शन बनाए रखता है.
  5. एक फ़ंड हाउस चुनें: SIP में निवेश करते समय फ़ंड हाउस का चुनाव महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि ये फ़ंड हाउस की प्रतिष्ठा, प्रबंधन टीम का अनुभव और फ़ंड हाउस की दूसरी स्कीमों पर निर्भर करता है.
  6. फ़ंड हाउस की प्रतिष्ठा: फ़ंड हाउस की प्रतिष्ठा बहुत मायने रखती है. आप जिस फ़ंड हाउस को चुनते हैं, उसके पास अच्छा ट्रैक रिकॉर्ड और निवेशकों में भरोसेमंद छवि होनी चाहिए. एक प्रतिष्ठित फ़ंड हाउस आपके निवेश की सुरक्षा का भरोसा देता है.
  7. मैनेजमेंट टीम का अनुभव: फ़ंड के प्रदर्शन में प्रबंधन टीम का अनुभव एक बड़ी भूमिका निभाता है. अनुभवी प्रबंधक मार्केट की स्थिति को समझते हैं और मुश्किल समय में भी निवेश को सुरक्षित रखने की कोशिश करते हैं. इसलिए, किसी फ़ंड में SIP करने से पहले मैनेजमेंट टीम की योग्यता का मूल्यांकन करें.
  8. कम व्यय अनुपात (Expense Ratio): एक्सपेंस रेशियो वो फ़ीस है जो फ़ंड हाउस निवेशकों से लेता है. ये फ़ीस फ़ंड के प्रबंधन, प्रशासन और दूसरे ख़र्चों के लिए होती है. एक्सपेंस रेशियो आपके रिटर्न पर सीधे असर करता है. अगर किसी फ़ंड का एक्सपेंस रेशियो ज़्यादा है, तो आपके लाभ में कमी हो सकती है. इसलिए, SIP करते समय कम व्यय अनुपात वाले फ़ंड चुनना बेहतर रहता है. हालांकि ये फ़ीस कम ही होती है मगर एक लंबी अवधि के निवेश में ये बड़ा असर कर सकती है.कम एक्सपेंस रेशियो वाले फ़ंड का चुनाव करने से आपके निवेश का एक बड़ा हिस्सा रिटर्न में बदलता है. उदाहरण के लिए, अगर दो फ़ंड्स का रिटर्न समान है, लेकिन एक का एक्सपेंस रेशियो कम है, तो आपको ज़्यादा फ़ायदा होगा.

निष्कर्ष

सही SIP चुनकर और नियमित निवेश करके आप अपने फ़ाइनेंशियल गोल को आसानी से हासिल कर सकते हैं. ये एक ऐसा तरीक़ा है जो अनुशासन, धैर्य और लंबे समय में निवेश का फ़ायदा देता है. SIP निवेश का सबसे असरदार तरीक़ा है अपने सपनों को साकार करने का.

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ये लेख पहली बार नवंबर 27, 2024 को पब्लिश हुआ, और जून 03, 2025 को अपडेट किया गया.

Disclaimer: यह कंटेंट सिर्फ़ जानकारी के लिए है और इसे निवेश सलाह या रेकमेंडेशन नहीं मानना चाहिए.

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