
Suraksha Diagnostic IPO (इनिशियल पब्लिक ऑफ़रिंग) 29 नवंबर 2024 को सब्सक्रिप्शन के लिए खुल गया. इसकी आख़िरी तारीख़ 3 दिसंबर 2024 है. निवेश का फ़ैसला लेने में निवेशकों की मदद के लिए, यहां हम इस डायग्नोस्टिक कंपनी की ताक़त, कमज़ोरियों और ग्रोथ की संभावनाओं के बारे में बता रहे हैं.
Suraksha Diagnostic IPO: संक्षेप में
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क्वालिटी:
FY2022 और 2024 के बीच, कंपनी ने 11 फ़ीसदी का एवरेज
रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) और रिटर्न ऑन कैपिटल एम्प्लॉयड (ROCE)
दर्ज किया.
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ग्रोथ:
कोविड संबंधी बिज़नस में मंदी के कारण FY23 में कुल रेवेन्यू में गिरावट आई, जिसके कारण FY22 और FY24 के बीच इसका रेवेन्यू लगभग एक फ़ीसदी सालाना गिरा. इस बीच, इसका नेट प्रॉफ़िट इसी अवधि में लगभग 7 फ़ीसदी सालाना बढ़ा.
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वैल्यूएशन:
कंपनी का स्टॉक क्रमशः 97 और 12 गुने के
P/E (प्राइस -टू-अर्निंग रेशियो)
और
P/B (प्राइस-टू-बुक रेशियो)
पर कारोबार करेगा.
- मार्केट में कंपनी की स्थिति: लोगों द्वारा क्वालिटी हेल्थकेयर सेवाओं में ज़्यादा निवेश करने के बढ़ते ट्रेंड से कंपनी को फ़ायदा होने की उम्मीद है. कोविड-19 महामारी के बाद बढ़ी स्वास्थ्य जागरूकता और डायबिटीज जैसी बीमारियों के बढ़ते मामलों ने कंपनी के बिज़नस को बढ़ाने के लिए मजबूत आधार तैयार किया है.
पूर्वी भारत में, जहां ये कंपनी मुख्य रूप से काम करती है, डायग्नोस्टिक मार्केट के 10.5% से 12.5% की सालाना दर से बढ़ने का अनुमान है. हालांकि, कंपनी को कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है. ये चुनौती सिर्फ जमी-जमाई कंपनियों से ही नहीं, बल्कि नए खिलाड़ियों और डायग्नोस्टिक सेवाओं में उतर रहे अस्पतालों से भी है.
Suraksha Diagnostic के बारे में
Suraksha Diagnostic पूर्वी भारत में लीडिंग डायग्नोस्टिक सर्विस प्रोवाइडर है, जो 49 सेंटर के साथ काम करती है. इसके अलावा, इसके पास 166 सैंपल कलेक्शन पॉइंट और 9 लैब हैं (30 जून 2024 तक). FY24 में, कंपनी ने 53% रेवेन्यू पैथोलॉजी टेस्ट से, 46% रेडियोलॉजी से और सिर्फ़ 0.18% कोविड टेस्ट से कमाया. इसका लगभग 94% रेवेन्यू रिटेल ग्राहकों (B2C) से आता है, जबकि 6% कॉर्पोरेट ग्राहकों (B2B) से आता है. FY24 में प्रति मरीज औसत रेवेन्यू ₹1,922 रहा, जो FY22 के मुकाबले लगभग 21% की सालाना ग्रोथ है.
ताक़त
- इंडस्ट्री में प्रति मरीज सबसे ज़्यादा रेवेन्यू: कंपनी के डायग्नोस्टिक सेंटर में पॉलिक्लिनिक्स (छोटे मेडिकल क्लीनिक) भी शामिल हैं, जहां मरीजों को चिकित्सा परामर्श उपलब्ध कराया जाता है. इस अतिरिक्त सेवा ने कंपनी को FY2022-24 के दौरान इंडस्ट्री में प्रति मरीज सबसे ज़्यादा रेवेन्यू कमाने में मदद की.
कमज़ोरियां
- बहुत ज़्यादा प्रमोटर प्लेजिंग: प्रमोटर ग्रुप ने अपनी प्री-IPO शेयरहोल्डिंग का 67% Suraksha में और कुल पेड-अप कैपिटल का लगभग 41% एक अन्य ग्रुप कंपनी के लिए लिए गए लोन के बदले गिरवी रखा है. ये लोन 8,000 नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (NCDs) जारी कर के लिया गया था. इन NCDs की क़ीमत ₹1 लाख प्रति डिबेंचर थी, और इन्हें Vistra ITCL को जारी किया गया था. हालांकि, IPO की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए Vistra ने ये गिरवी रखे शेयर जारी कर दिए, लेकिन उम्मीद है कि IPO के बाद ये शेयर फिर से गिरवी रखे जाएंगे.
Suraksha Diagnostic IPO की डिटेल
| IPO का कुल साइज़ (करोड़ ₹) | 846 |
| ऑफर फॉर सेल (करोड़ ₹) | 846 |
| नए इशू (करोड़ ₹) | - |
| प्राइस बैंड (₹) | 420-441 |
| सब्सक्रिप्शन की तारीख़ | 27 नवंबर - 3 दिसंबर, 2024 |
| उद्देश्य | ऑफर फॉर सेल |
IPO के बाद
| मार्केट कैप (करोड़ ₹) | 2,296.8 |
| नेट वर्थ (करोड़ ₹) | 187.1 |
| प्रमोटर होल्डिंग (%) | 48.8 |
| प्राइस/अर्निंग रेशियो (P/E) | 97.2 |
| प्राइस/बुक रेशियो (P/B) | 12.3 |
फ़ाइनेंशियल हिस्ट्री
| फ़ाइनेंशियल्स (करोड़ ₹) | 2Y ग्रोथ (% सालाना) | FY24 | FY23 | FY22 |
|---|---|---|---|---|
| रेवेन्यू | -0.9 | 219 | 190 | 223 |
| EBIT | 4.3 | 37 | 12 | 34 |
| PAT | 6.9 | 24 | 7 | 21 |
| नेट वर्थ | 10.7 | 179 | 156 | 146 |
| कुल डेट | -5.1 | 90 | 97 | 100 |
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EBIT- अर्निंग बिफ़ोर इंटरेस्ट एंड टैक्स
PAT - प्रॉफ़िट आफ्टर टैक्स |
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प्रमुख रेशियो
| रेशियो | 3 साल का औसत | FY24 | FY23 | FY22 |
|---|---|---|---|---|
| ROE (%) | 11.3 | 14.1 | 4.3 | 15.4 |
| ROCE (%) | 11.0 | 14.1 | 4.9 | 14.0 |
| EBIT मार्जिन (%) | 12.9 | 16.8 | 6.4 | 15.4 |
| डेट-टू-इक्विटी | 0.6 | 0.5 | 0.6 | 0.7 |
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ROE - रिटर्न ऑन इक्विटी ROCE - रिटर्न ऑन कैपिटल एम्प्लॉयड |
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Suraksha Diagnostic की रिस्क रिपोर्ट
कंपनी और बिज़नस
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क्या पिछले 12 महीनों में Suraksha Diagnostic की टैक्स के पहले की कमाई (profit before tax) ₹50 करोड़ से ज़्यादा है?
नहीं. कंपनी ने FY2024 में ₹31 करोड़ की 'टैक्स के पहले की कमाई' दर्ज़ की. -
क्या कंपनी अपना बिज़नस बढ़ा पाएगी?
हां. क्रॉनिक बीमारियों की बढ़ती संख्या और स्वास्थ्य बीमा का बढ़ता ट्रेंड ये संकेत देता है कि लोग अब स्वास्थ्य सेवाओं, ख़ासकर डायग्नोस्टिक्स (जांच सेवाओं) के प्रति ज़्यादा जागरूक हो रहे हैं. ये बढ़ती जागरूकता न सिर्फ़ स्वास्थ्य सेवाओं की डिमांड को बढ़ा रही है, बल्कि इससे संबंधित कंपनियों को अपने कारोबार को बढ़ाने का बेहतर मौक़ा मिल रहा है. -
क्या कंपनी का कस्टमर बेस काफ़ी वफ़ादार है और क्या ये कंपनी किसी जाने-माने ब्रांड से जुड़ी है?
नहीं. कंपनी भले ही अपने B2B (बिजनेस-टू-बिजनेस) ग्राहकों के साथ लॉन्ग-टर्म कॉन्ट्रैक्ट करती हो, लेकिन इनका रेवेन्यू में योगदान सिर्फ़ 6.5% तक ही सीमित है. इससे साफ़ है कि B2B सेगमेंट कंपनी के लिए प्रमुख रेवेन्यू सोर्स नहीं है. इसके साथ ही, कंपनी का मुख्य ग्राहक आधार, जो कि B2C (बिजनेस-टू-कंज्यूमर) सेगमेंट है, में ग्राहक जुड़ाव (client stickiness) का अभाव देखने को मिलता है. -
क्या कंपनी के पास कॉम्पिटेटिव एडवांटेज़ है?
नहीं. कंपनी एक ऐसी इंडस्ट्री में काम करती है, जहां प्रवेश के लिए कोई बड़ी बाधा नहीं है. ये इंडस्ट्री पहले से ही कई संगठित प्रतिस्पर्धियों से भरी हुई है. कम प्रवेश बाधाओं का मतलब है कि नए खिलाड़ी आसानी से इंडस्ट्री में प्रवेश कर सकते हैं, जिससे मौजूदा कंपनियों को अपने क्लाइंट बेस और मार्केट शेयर को बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो जाता है.
Suraksha Diagnostic का मैनेजमेंट
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क्या कंपनी के संस्थापकों में से किसी के पास अभी भी कंपनी में कम से कम 5 फ़ीसदी हिस्सेदारी है? या क्या प्रमोटरों के पास कंपनी में 25 फ़ीसदी से ज़्यादा हिस्सेदारी है?
हां. IPO के बाद प्रमोटर होल्डिंग 61 फ़ीसदी से घटकर लगभग 48 फ़ीसदी रह जाएगी. -
क्या टॉप 3 मैनजरों के पास कंपनी में काम करते हुए कुल मिलाकर 15 साल से ज़्यादा का लीडरशिप अनुभव है?
हां. सोमनाथ चटर्जी (चेयरमैन और जॉइंट मैनेजिंग डायरेक्टर) और रितु मित्तल (जॉइंट मैनेजिंग डायरेक्टर एवं CEO) को कंपनी में 15 साल से ज़्यादा का अनुभव है. -
क्या मैनेजमेंट पर भरोसा किया जा सकता है? क्या कंपनी SEBI दिशानिर्देशों के तहत साफ़-सुथरी रिपोर्ट जारी करती है?
हां. कोई नेगेटिव जानकारी उपलब्ध नहीं है. -
क्या Suraksha Diagnostic की अकाउंटिंग पॉलिसी ठीक है?
हां. कोई नेगेटिव जानकारी उपलब्ध नहीं है. -
क्या कंपनी प्रमोटरों के शेयर गिरवी होने मुक्त है?
नहीं. कुल पेड-अप कैपिटल का लगभग 41% Vistra ITCL (डिबेंचर ट्रस्टी) को गिरवी रखा गया है.
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Suraksha Diagnostic के फ़ाइनेंशियल
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क्या कंपनी का वर्तमान और तीन साल का औसत रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) 15 फ़ीसदी से ज़्यादा और औसत रिटर्न ऑन कैपिटल एम्प्लॉयड (ROCE) 18 फ़ीसदी से ज़्यादा है?
नहीं. इसका 3 साल का औसत ROE और ROCE लगभग 11 फ़ीसदी है, और FY24 में, इसने लगभग 14 फ़ीसदी का ROE और ROCE दर्ज किया. -
क्या पिछले तीन साल के दौरान कंपनी का ऑपरेटिंग कैश फ़्लो पॉज़िटिव रहा है?
हां. FY22-24 में कंपनी का ऑपरेटिंग कैश फ़्लो पॉज़िटिव रहा है. -
क्या कंपनी का नेट डेट-टू-इक्विटी रेशियो 1 से कम है?
हां. FY2024 में कंपनी का नेट डेट-टू-इक्विटी रेशियो 0.5 था. -
क्या कंपनी रोज़मर्रा के कामों के लिए बड़ी वर्किंग कैपिटल पर निर्भरता से मुक्त है?
हां. कंपनी की वर्किंग कैपिटल की ज़रूरतें काफी कम हैं. FY24 में कंपनी के वर्किंग कैपिटल साइकिल केवल 14.8 दिन रहे, जो इंडस्ट्री में एक प्रभावशाली आंकड़ा है. साथ ही, इसके ट्रेड रिसीवेबल भी कम हैं. -
क्या कंपनी अगले तीन साल में बाहरी फ़ंडिंग पर निर्भर हुए बिना अपना बिज़नस चला सकती है?
हां. कंपनी ने FY2022-24 के दौरान पॉज़िटिव फ़्री कैश फ़्लो जेनरेट किया, इसलिए इसे बाहरी फ़ंड पर निर्भर नहीं रहना पड़ सकता है. -
क्या कंपनी बड़ी आकस्मिक देनदारी से मुक्त है?
हां. जून 2024 तक कंपनी की आकस्मिक देनदारियों इसकी इक्विटी का 5 फ़ीसदी थीं.
Suraksha Diagnostic का वैल्यूएशन
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क्या स्टॉक अपनी एंटरप्राइज़ वैल्यू पर 8 फ़ीसदी से ज़्यादा की ऑपरेटिंग अर्निंग यील्ड देता है?
नहीं. लिस्ट होने के बाद, ये स्टॉक अपनी एंटरप्राइज़ वैल्यू पर 1.6 फ़ीसदी ऑपरेटिंग अर्निंग यील्ड देगा. -
क्या स्टॉक का प्राइस-टू-अर्निंग रेशियो अपनी जैसी दूसरी कंपनियों के औसत से कम है?
नहीं. लिस्टिंग के बाद, यह स्टॉक अपने साथियों के 69 गुना औसत P/E रेशियो की तुलना में लगभग 97 गुना के P/E रेशियो पर कारोबार करेगा. -
क्या स्टॉक की प्राइस-टू-बुक वैल्यू अपनी जैसी दूसरी कंपनियों के औसत स्तर से कम है?
नहीं. लिस्टिंग के बाद, यह स्टॉक अपने साथियों के 12 गुना औसत P/B रेशियो पर ही कारोबार करेगा.
डिस्क्लेमर: ये निवेश का सुझाव नहीं है. निवेश करने से पहले ज़रूरी जांच-पड़ताल ज़रूर करें.
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