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बायोकॉन ने फ़ंड जुटाने की राह पकड़ ली है. सोमवार (16 जून, 2025) को कंपनी ने क्वालिफ़ाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP) शुरू किया, जिससे ₹340.20 प्रति शेयर की शुरुआती क़ीमत पर नए शेयर बेचकर ₹4,500 करोड़ इकट्ठा करने का लक्ष्य है.
अब फ़ंड क्यों जुटाया जा रहा है?
ये QIP ग्रोथ के लिए कोई क़दम नहीं है, ये एक सफ़ाई अभियान है. बायोकॉन इस पैसे से कर्ज़ चुकाएगी, ख़ासकर अपनी सहायक कंपनी बायोकॉन बायोलॉजिक्स का, जिसने वायट्रिस का बायोसिमिलर कारोबार ख़रीदने के लिए कर्ज़ लिया था.
कर्ज़ का बोझ काफी बढ़ गया था. इस क़दम से ब्याज का ख़र्च कम होगा और कंपनी के हालत बेहतर होंगे.
लेकिन एक दिक्कत है: ज़्यादा शेयर जारी होने से जल्दी ही प्रति शेयर कमाई (EPS) कम हो सकती है. इसलिए निवेशक सावधानी से नज़र रख रहे हैं.
बायोकॉन क्या करती है?
बायोकॉन भारत की सबसे बड़ी बायोटेक कंपनियों में से एक है. ये जेनेरिक एक्टिव फ़ार्मास्युटिकल इंग्रेडिएंट्स (API), बायोसिमिलर्स (बायोलॉजिक दवाओं की कॉपी) और सिनज़ीन के ज़रिए कॉन्ट्रैक्ट रिसर्च बिज़नस चलाती है. कंपनी की दवाएं डायबिटीज़, कैंसर और ऑटोइम्यून बीमारियों के लिए हैं, जो अमेरिका जैसे विकसित और उभरते बाज़ारों में बिक़ती हैं.
बायोकॉन का फ़ाइनेंशियल डेटा:
| मेट्रिक | वैल्यू |
|---|---|
| मार्केट कैप | ₹42,675 करोड़ |
| ROE | 7% |
| ROCE | 7% |
| P/E रेशियो | 42.1 |
| P/B रेशियो | 2 |
| EPS | ₹ 8.2 |
| बुक वैल्यू/शेयर | ₹ 180.3 |
| डिविडेंड यील्ड | 0.1% |
वैल्यू रिसर्च ऑनलाइन रेटिंग
- कुल मिलाकर: 2/5
- क्वालिटी: 2/10
- ग्रोथ: 8/10
- वैल्यूएशन: 5/10
- मोमेंटम: 5/10
निष्कर्ष
बायोकॉन का ये फ़ंड जुटाना सिर्फ़ पैसा लाने की क़वायद नहीं, बल्कि कंपनी को वित्तीय स्थिरता देने की स्ट्रैटेजी है. लॉन्ग-टर्म निवेशकों के लिए ये एक सकारात्मक क़दम हो सकता है. लेकिन जब तक कर्ज़ में कमी बेहतर कमाई और पूंजी दक्षता में नहीं बदलती, शेयर की क़ीमत सीमित दायरे में रह सकती है.





