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11 शेयर काग़ज़ पर बेहतर दिखते हैं, फिर भी सस्ते मिल रहे हैं

कंपनियों के आंकड़े सुधर गए, पर उनके शेयर के प्राइस में अभी इसकी झलक नहीं दिखती. असली सवाल यह है कि कंपनी सुधरी है, या बस उसका कारोबारी साइकिल अच्छे दौर में है.

कंपनियों के आंकड़े सुधर गए, पर उनके शेयर के प्राइस में अभी इसकी झलक नहीं दिखती. असली सवाल यह है कि कंपनी सुधरी है, या बस उसका कारोबारी साइकिल अच्छे दौर में है.Anand Kumar/AI-Generated Image

सारांशः 11 कंपनियों ने फ़ाइनेंशियल हेल्थ की 9 पॉइंट वाली जांच में लगभग पूरे नंबर पाए. फिर भी इनमें से ज़्यादातर के शेयर 10 से कम P/E पर मिल रहे हैं. यानी या तो बाज़ार से कुछ छूट गया है, या बाज़ार ने वो देख लिया है जो यह चेकलिस्ट नहीं देख पाती. और यह पता लगाने की शुरुआत एक ऐसे सवाल से होती है, जो ज़्यादातर निवेशक कभी पूछते ही नहीं.

कभी ऐसा हुआ है कि आप किसी कारोबार को देख रहे हों और उसके आंकड़े आपकी उम्मीद से बिल्कुल अलग निकलें? जैसे कोई रेस्टोरेंट, जो हमेशा भरा रहता है पर फिर भी घाटे में चल रहा है. या कोई दुकान, जहां ग्राहक कम दिखते हैं पर वो नई ब्रांच खोलती जा रही है. कंपनियों के फ़ाइनेंशियल स्टेटमेंट में भी ऐसी ही हैरानी छिपी हो सकती है. कई बार किसी कंपनी के आंकड़े चुपचाप सुधर जाते हैं, पर उसके शेयर का प्राइस इसे बहुत बाद में पकड़ता है.

हम ऐसी ही कंपनियां खोजने निकले. हमने एक स्क्रीन चलाई, उन कंपनियों के लिए जिनकी फ़ाइनेंशियल हेल्थ काग़ज़ पर सुधर रही है, पर शेयर अब भी सस्ता दिखता है. और 11 कंपनियां इस पर खरी उतरीं.

पियोट्रोस्की एफ़-स्कोर है क्या, थोड़े में समझिए

इस स्क्रीन का मुख्य फ़िल्टर पियोट्रोस्की एफ़-स्कोर है. यह 9 पॉइंट की एक चेकलिस्ट है, जिसे अकाउंटिंग के प्रोफ़ेसर जोसेफ़ पियोट्रोस्की ने बनाया था. इसका मक़सद एक ही सवाल का जवाब देना है, कि कंपनी की फ़ाइनेंशियल हेल्थ सुधर रही है या बिगड़ रही है. यह नौ चीज़ें जांचता है, जैसे मुनाफ़ा, कैश फ़्लो, कर्ज़, मार्जिन और शेयरों की संख्या. पिछले एक साल में इनमें से जो चीज़ सही दिशा में गई, उसके लिए 1 पॉइंट मिलता है. यानी 8 या 9 का स्कोर बताता है कि लगभग हर चीज़ सुधरी है. इसे एक हेल्थ चेकअप समझिए. यह नहीं बताता कि कंपनी में पैसा लगाना चाहिए या नहीं. बस इतना बताता है कि उसकी सेहत के संकेत सही दिशा में हैं या नहीं.

इसके साथ हमने अपना वैल्यूएशन स्कोर भी देखा. यह बताता है कि कोई शेयर अपने पुराने वैल्यूएशन और अपने जैसी दूसरी कंपनियों के मुक़ाबले कितना सस्ता है. नीचे की सभी 11 कंपनियों ने दोनों में ज़्यादा स्कोर पाया है और इनमें से ज़्यादातर का P/E 10 या उससे कम है.

कंपनी मार्केट कैप (₹ करोड़) P/E डेट-टू-इक्विटी वैल्यूएशन स्कोर पियोट्रोस्की एफ़-स्कोर सेक्टर
Chennai Petroleum Corporation 20,407 4.9 0.2 8 8 Energy & Utilities
CIAN Agro Industries & Infrastructure 3,235 10 0.6 8 9 Consumer Staples
Indian Oil Corporation 1,91,483 5.7 0.6 8 8 Energy & Utilities
Indosolar 956 5.8 0 8 8 Technology
Jagran Prakashan 1,366 7.2 0.1 9 9 Industrials
Oil & Natural Gas Corporation 2,96,391 6.8 0.5 9 8 Energy & Utilities
Petronet LNG 42,735 10.2 0.1 8 8 Energy & Utilities
PTC India Financial Services 1,691 7.6 0.3 8 8 Financial
Sai Silks (Kalamandir) 1,183 8.7 0.3 8 9 Consumer Discretionary
TeamLease Services 1,792 12.1 0.1 8 8 Industrials
Tide Water Oil Company (India) 2,352 10.7 0 8 9 Energy & Utilities

यह स्क्रीन आप ख़ुद भी चलाकर देख सकते हैं. यह लिस्ट लाइव है, और प्राइस व स्कोर बदलने के साथ रोज़ बदलती है. इसलिए आज की लिस्ट ऊपर वाली टेबल से अलग दिख सकती है, जो 25 सितंबर 2026 को चलाई गई स्क्रीन की है.

मुनाफ़ा ज़्यादा बिक्री से नहीं आया

सबसे पहले यह बात ग़ौर कीजिए. इस लिस्ट में मुनाफ़ा तो सबका बढ़ा, पर ज़्यादातर की बिक्री नहीं बढ़ी. और जब कोई कंपनी ज़्यादा बेचे बिना ज़्यादा कमाती है, तो इसका मतलब है कि उसका मार्जिन बढ़ा है. ऐसा तीन वजहों से हो सकता है. लागत घटी हो, कंपनी की प्राइसिंग पावर बढ़ी हो, या फिर कारोबार ही साइक्लिकल हो और उसे बस एक अच्छा साल मिल गया हो.

इन 11 में से 5 कंपनियां तेल और एनर्जी सेक्टर की हैं. यह बात ख़ास तौर पर ध्यान देने की है, क्योंकि इस सेक्टर में मुनाफ़ा और मार्जिन कंपनी की अपनी किसी ख़ूबी से नहीं, बल्कि क्रूड और रिफ़ाइनिंग के साइकल से तेज़ी से ऊपर-नीचे होते हैं.

एक नाम, जिसे सुधार मत समझिए

इस लिस्ट में सबसे कम P/E, 4.9, Chennai Petroleum Corporation का है. पर यह एक रिफ़ाइनिंग कंपनी है. और रिफ़ाइनिंग मार्जिन क्रूड के प्राइस के साथ तेज़ी से बदलते हैं. इसलिए किसी साइक्लिकल कारोबार में इतना कम P/E यह नहीं बताता कि कंपनी का मुनाफ़ा हमेशा के लिए सुधर गया है. ज़्यादा संभावना यह है कि यह बस यह दिखा रहा है कि साइकल अभी किस मोड़ पर है. बाक़ी चार एनर्जी कंपनियों पर भी यही सावधानी लागू होती है, बस थोड़ी कम.

स्कोर क्या नहीं देख पाता

पियोट्रोस्की एफ़-स्कोर और वैल्यूएशन स्कोर, दोनों सिर्फ़ पिछले साल के ऑडिट हुए आंकड़े देखते हैं. इसलिए इनमें से कोई भी यह नहीं देख सकता कि साइकल पलटने वाला है, या कोई कारोबार अंदर ही अंदर कमज़ोर हो रहा है पर काग़ज़ पर अब भी ठीक दिखता है. इसीलिए जब एक ही सेक्टर की कई कंपनियां एक साथ किसी लिस्ट में आ जाएं, तो कोई राय बनाने से पहले उन्हें दोबारा ध्यान से देखना चाहिए.

सबक़ यह है: अगर किसी साइक्लिकल सेक्टर में ज़्यादा स्कोर बिक्री बढ़ने से नहीं, मार्जिन बढ़ने से बना है, तो कंपनी को परखने से पहले उसके साइकल को परखिए.

स्क्रीन को और सटीक बनाइए. अब आपकी बारी

  • प्रॉफ़िट ग्रोथ के साथ रेवेन्यू ग्रोथ भी जोड़िए. इससे वो नाम छंट जाएंगे, जिनका मुनाफ़ा सिर्फ़ मार्जिन बढ़ने से बढ़ा है. [यह फ़िल्टर लगाइए] 
  • 3 साल का प्रॉफ़िट CAGR जोड़िए. इससे पता चलेगा कि सुधार लगातार हो रहा है, या बस एक अच्छा साल था. [यह फ़िल्टर लगाइए] 
  • शेयर के पेज पर जाकर उसका मार्जिन उसके 3 या 5 साल के औसत से ख़ुद मिलाइए. स्क्रीनर में अभी यह फ़िल्टर नहीं है, पर यह 10 सेकंड का काम है, जो आप अपनी चुनी हर कंपनी पर हाथ से कर सकते हैं.

इस स्कोर के पीछे का पूरा हिसाब समझना चाहते हैं? हमारा यह लेख पढ़िए: फ़ाइनेंशियल हेल्थ का एक मिला-जुला स्कोर.

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