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पिछले हफ्ते, मेरे मुंबई में रहने वाले एक दोस्त का फोन आया. उसने अपनी प्रमोशन की खुशखबरी दी और फिर बोला, “वैसे, मैं ₹25,000 की मंथली SIP शुरू करना चाहता हूं. लेकिन समझ नहीं आ रहा कि शुरुआत कहां से करूं. इतने सारे फ़ंड मार्केट में हैं.”
ज़्यादातर नए निवेशकों के साथ ये समस्या होती है. इरादा और अनुशासन तो है, लेकिन शुरुआत कहां से करें?
तो, मैंने उसे फ़ाइव-स्टार रेटिंग्स या पिछले रिटर्न्स की टेबल दिखाने के बजाय, बात को आसान किया: तीन फ़ंड्स से शुरुआत करो.
एग्रेसिव हाइब्रिड फ़ंड से शुरुआत करें
अगर आप निवेश की शुरुआत कर रहे हैं, तो एग्रेसिव हाइब्रिड फ़ंड आपके लिए पहला सही कदम हो सकता है.
ऐसा क्यों? असल में, ये एक बेहतरीन मिश्रण है: आपका लगभग दो-तिहाई पैसा इक्विटी (ग्रोथ के लिए) में जाता है और बाकी डेट (स्थिरता के लिए) में.
मेरे दोस्त ने तुरंत पूछा “लेकिन डेट तो बहुत कंज़र्वेटिव होता है?”
बिल्कुल, लेकिन जब मार्केट क्रैश करता है, तो डेट एक शॉक एब्जॉर्बर की तरह काम करता है. जहां आपका प्योर इक्विटी फ़ंड गिर सकता है, वहीं, ये फ़ंड थोड़ा स्थिर रहता है, जिससे आप शांत रहकर निवेश में बने रहते हैं.
और एग्रेसिव हाइब्रिड में टिके रहना ही असली गेम-चेंजर है.
मिसाल के तौर पर, एक औसत एग्रेसिव हाइब्रिड फ़ंड ने पिछले 10 साल में लगभग 14.4% रिटर्न दिया. मान लीजिए, अगर आपने 14% सालाना रिटर्न के हिसाब से ₹10,000 की मंथली SIP की, तो 10 साल बाद आपके पास ₹25.6 लाख होते. वो भी बिना इक्विटी फंड्स की पूरी रोलरकोस्टर सवारी के.
इसके अलावा, नए निवेशक अक्सर मार्केट गिरने पर घबरा जाते हैं. ये स्वाभाविक भी है. अपने निवेश को गिरते देखना डरावना अनुभव हो सकता है. लेकिन एग्रेसिव हाइब्रिड फ़ंड उन झटकों को कम करते हैं, जिससे आप अपने प्लान पर टिके रहते हैं. यही वजह है कि ये सिर्फ़ “नए निवेशकों का विकल्प” नहीं, बल्कि एक समझदारी भरा आधार है.
बोनस: इन पर टैक्स इक्विटी फ़ंड्स की तरह लगता है, जो इन्हें कई डेट और हाइब्रिड फ़ंड्स की तुलना में टैक्स के लिहाज़ से ज़्यादा कुशल बनाती है.
एग्रेसिव हाइब्रिड बाज़ार की तुलना में कम गिरते हैं
इसका एक कारण ये है कि वे इक्विटी (ग्रोथ के लिए) और डेट (स्थिरता के लिए) में निवेश करते हैं
| सेंसेक्स TRI | एग्रेसिव हाइब्रिड फ़ंड | |
|---|---|---|
| मार्च 2020 (कोविड) | -23.8 | -17.6 |
| जून 2008 (वैश्विक वित्तीय संकट) | -17.9 | -12.8 |
| *रेगुलर प्लान्स का कैटेगरी एवरेज | ||
एक लार्ज-कैप इंडेक्स फ़ंड जोड़ें
अब जब आपने निवेश की शुरुआत कर ली, तो एक टिकाऊ आधार बनाने का समय है. निफ़्टी 50 या सेंसेक्स को ट्रैक करने वाले लार्ज-कैप इंडेक्स फ़ंड्स इसके लिए एकदम सही हैं. निफ़्टी इंडेक्स फ़ंड और सेंसेक्स इंडेक्स फ़ंड में कोई ख़ास अंतर नहीं है.
कृपया एक्टिव लार्ज-कैप फ़ंड्स के साथ कन्फ्यूज न हों. असल में, उनके मुकाबले, लार्ज-कैप इंडेक्स फ़ंड्स कम लागत (कम एक्सपेंस रेशियो) वाले विकल्प हैं. दूसरा, लंबे समय तक इंडेक्स को मात देना मुश्किल है-यहां तक कि निवेश की एक्टिव स्ट्रैटजीस वाले लार्ज-कैप फ़ंड्स के लिए भी.
आंकड़े सब बयान करते हैं: पिछले एक दशक में, डेली रोलिंग रिटर्न्स के आधार पर, केवल 41% एक्टिव लार्ज-कैप फ़ंड्स ने पांच साल की अवधि में निफ़्टी 100 TRI को मात दी. इस अवधि को सात साल तक बढ़ाएं, तो एक्टिव लार्ज-कैप फ़ंड्स की सफलता की दर घटकर सिर्फ 25% रह जाती है.
कुल मिलाकर, इंडेक्स फ़ंड्स के साथ आपको कम कॉस्ट में मार्केट के बराबर रिटर्न की गारंटी मिलती है.
तो, अगर आपकी SIP की अवधि पांच साल से ज़्यादा है, तो ये आपका स्थिर, कम झंझट वाला कम्पाउंडर हो सकता है, जो लंबे समय में चुपके से आपकी वैल्थ बढ़ाता है. मिसाल के तौर पर, अगर आपने 10 साल पहले निफ़्टी इंडेक्स फंड में ₹10,000 की मासिक SIP शुरू की होती, तो आज आपके पास ₹25.7 लाख होते.
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फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड के साथ थोड़ा तड़का लगाएं
अब जब आपका आधार मज़बूत है, तो थोड़े लचीलेपन और ग्रोथ की परत जोड़ते हैं.
फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड्स 100% इक्विटी फ़ंड्स हैं, जिनमें फ़ंड मैनेजरों को लार्ज, मिड और स्मॉल-कैप स्टॉक्स में निवेश की आजादी होती है, जिससे वे अपनी पसंद की कंपनी में निवेश कर सकते हैं. ये उन लोगों के लिए स्मार्ट विकल्प हैं, जिनकी निवेश की अवधि पांच साल या उससे ज़्यादा है.
ये फ़ंड ज़्यादा ग्रोथ की संभावना के साथ-साथ थोड़ा डाइवर्सिफ़िकेशन भी लाते हैं. लेकिन याद रखें, ज़्यादा रिटर्न के साथ थोड़ा ज़्यादा जोखिम भी आता है, ख़ासकर इसलिए क्योंकि ये पूरी तरह इक्विटी में निवेश करते हैं. अच्छी बात ये है कि आपका कोर पोर्टफ़ोलियो पहले से ही एग्रेसिव हाइब्रिड और लार्ज-कैप इंडेक्स फ़ंड से मज़बूत है, तो ये आपको एक संतुलित तीन-फ़ंड वाला पोर्टफ़ोलियो देता है.
हालांकि, एक बात ध्यान रखें. ज़्यादातर फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड निवेशकों के पैसे का लगभग 70% लार्ज-कैप स्टॉक्स में लगाते हैं, यानी आपके लार्ज-कैप इंडेक्स फ़ंड के साथ कुछ ओवरलैप हो सकता है. अगर आप चाहते हैं कि दो फ़ंड एक जैसे स्टॉक्स में निवेश न करें, तो आप सिर्फ हाइब्रिड और इंडेक्स फ़ंड के कॉम्बो पर टिक सकते हैं.
और हां- इसका मतलब ये नहीं कि आप कुछ मिस कर रहे हैं. निवेश में अक्सर कम ही ज़्यादा होता है. कुछ अच्छे फ़ंड, जिन्हें आप लगातार होल्ड करें, आपको हर नए ट्रेंड के पीछे भागने से ज़्यादा दूर ले जाएंगे.
निष्कर्ष
एक समय मेरे दोस्त को थोड़ी निराशा हुई. उसने पूछा, “लेकिन स्मॉल-कैप और मिड-कैप के वो बेहतरीन नाम कहां हैं? ये पोर्टफ़ोलियो तो... बोरिंग लगता है.”
तब मुझे रुककर उसे धीरे से समझाना पड़ा कि निवेश सबसे चमकदार फ़ंड चुनने का नाम नहीं है; ये उन फ़ंड्स को चुनने के बारे में है जो आपके जोखिम सहने की क्षमता और अनुभव के अनुरूप हों.
सच ये है: हर कोई कहता है कि वो उतार-चढ़ाव बर्दाश्त कर सकता है, जब तक कि मार्केट क्रैश न हो. तब ज़्यादातर नए निवेशक घबराकर जल्दबाजी में बेच देते हैं और इक्विटी को जुआ कहकर चलते बनते हैं.
यही वजह है कि हम धीमे और आसान शुरुआत की सलाह देते हैं.
इस दो या तीन-फ़ंड वाले पोर्टफ़ोलियो के साथ अपना आधार बनाएं. इसे कुछ साल तक चलने दें. जब आप मार्केट के अच्छे, बुरे और सबसे ख़राब दौर देख लेंगे, तो आप अपनी जोखिम सहने की क्षमता को समझ पाएंगे. तभी स्पष्टता और आत्मविश्वास के साथ अपने पोर्टफ़ोलियो को बढ़ाएं.
आखिरी बात
जानना चाहते हैं कि कौन से एग्रेसिव हाइब्रिड, लार्ज-कैप इंडेक्स और फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड चुनें?
ये सिर्फ पिछले रिटर्न की बात नहीं है. हमारे अनुभवी एनालिस्ट्स आंकड़ों से आगे जाकर निरंतरता, जोखिम प्रबंधन और समग्र पोर्टफ़ोलियो की ताकत का मूल्यांकन करते हैं.
तो, वैल्यू रिसर्च फ़ंड एडवाइज़र पर जाएं और इन कैटेगरीज़ में हमारी ‘बेस्ट बाय’ रेकमंडेशन देखें.
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Disclaimer: यह कंटेंट सिर्फ़ जानकारी के लिए है और इसे निवेश सलाह या रेकमेंडेशन नहीं मानना चाहिए.
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