एन.पी.एस.

10 साल में कौन सा NPS फ़ंड मैनेजर रहा बेस्ट?

इक्विटी, सरकारी बॉन्ड और कॉर्पोरेट डेट, हर एसेट क्लास में देखें कौन रहा टॉप पर!

इक्विटी, सरकारी बॉन्ड और कॉर्पोरेट डेट, हर एसेट क्लास में देखें कौन रहा टॉप पर!Aprajita Anushree/AI-Generated Image

नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) को लंबे समय में ख़ासकर रिटायरमेंट को ध्यान में रखकर वैल्थ बनाने के लिए तैयार किया गया है. टियर I अकाउंट - डिफ़ॉल्ट रिटायरमेंट अकाउंट - में सब्सक्राइबर्स अपने निवेश को तीन एसेट क्लास में एलोकेट कर सकते हैं:

  • स्कीम E (इक्विटी)
  • स्कीम C (कॉर्पोरेट डेट)
  • स्कीम G (सरकारी बॉन्ड)

आइए, बीते 10 साल में इन तीनों एसेट क्लास में बेस्ट परफ़ॉर्म करने वाले फ़ंड मैनेजर पर ग़ौर करते हैं.

बेस्ट इक्विटी फ़ंड मैनेजर (10 साल का रिटर्न)

13.55% सालाना रिटर्न के साथ विनर है HDFC पेंशन फ़ंड.

इक्विटी प्लान में, इसने सबसे ज़्यादा 10 साल का रिटर्न दिया है, जो कोटक और UTI से थोड़ा आगे है.

क़रीबी दावेदार:

बेस्ट सरकारी बॉन्ड फ़ंड मैनेजर (10 साल का रिटर्न)

LIC पेंशन फ़ंड (9.12% CAGR) इस फ़ील्ड में टॉप पर है.

कम क्रेडिट रिस्क और स्थिर रिटर्न के साथ, LIC का सरकारी बॉन्ड प्लान SBI और HDFC को पीछे छोड़ता है, क्योंकि ये रेट साइकिल के दौरान स्थिरता बनाए रखता है.

क़रीबी दावेदार:

बेस्ट कॉर्पोरेट डेट फ़ंड मैनेजर (10 साल का रिटर्न)

HDFC पेंशन फ़ंड, 8.77% सालाना रिटर्न के साथ, फिर से सबसे आगे है.

क़रीबी दावेदार:

तो, कुल मिलाकर कौन सा फ़ंड मैनेजर सबसे अच्छा है?

अगर आप एक ऐसे फ़ंड मैनेजर की तलाश में हैं जो सभी एसेट क्लास में लगातार बेहतर प्रदर्शन करे, तो HDFC पेंशन फ़ंड सबसे अलग नज़रआता है.

  • इक्विटी में टॉप रैंक (13.55%)
  • कॉर्पोरेट डेट में टॉप रैंक (8.77%)
  • सरकारी बॉन्ड्स में टॉप 3 में (8.54%)

लेकिन, NPS की सबसे बड़ी ख़ासियत है इसकी फ्लेक्सिबिलिटी. आप हर एसेट क्लास - इक्विटी, कॉर्पोरेट डेट और सरकारी बॉन्ड के लिए अलग-अलग पेंशन फ़ंड मैनेजर चुन सकते हैं. इससे आप अपने पोर्टफ़ोलियो को बेहतर परफ़ॉर्मेंस के लिए कस्टमाइज़ कर सकते हैं.

उदाहरण के लिए, अगर आप 10 साल के रिटर्न के हिसाब से देखें तो HDFC पेंशन फ़ंड इक्विटी और कॉर्पोरेट बॉन्ड कैटेगरी में सबसे आगे है, जबकि LIC पेंशन फ़ंड सरकारी बॉन्ड में लीडर है. इसलिए, इक्विटी और कॉर्पोरेट डेट के लिए HDFC और सरकारी बॉन्ड के लिए LIC को चुनना आपको लॉन्ग-टर्म में ज़्यादा मुनाफ़ा कमाने में मदद कर सकता है.

आख़िरी बात!

NPS सिर्फ़ टैक्स बचाने का ज़रिया नहीं है. ये एक मज़बूत रिटायरमेंट कॉर्पस बनाने का रास्ता है. हर फ़ील्ड में सही फ़ंड मैनेजर चुनने से लॉन्ग-टर्म रिटर्न के नतीजों ख़ासा असर पड़ सकता है.

लेकिन याद रखें: पिछला परफ़ॉर्मेंस फ्यूचर रिटर्न की गारंटी नहीं है. अपने NPS पोर्टफ़ोलियो में बदलाव करने से पहले हमेशा अपनी एसेट एलोकेशन और रिस्क टॉलरेंस को चेक करें.

वैसे, अगर आप 1, 3, 5, 7 साल के पेंशन फ़ंड मैनेजर्स के परफ़ॉर्मेंस को चेक करना चाहते हैं, तो वैल्यू रिसर्च के NPS परफ़ॉर्मेंस टूल पर जाएं. ये आपको एक सोच-समझकर सही फ़ैसला लेने में मदद कर सकता है.

ये भी पढ़ें: NPS इन्वेस्टर्स न करें ये ग़लती

ये लेख पहली बार जून 24, 2025 को पब्लिश हुआ.

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