The Index Investor

पैसिव फ़ंड्स क्यों ऐसे निवेशकों के लिए हैं बेस्ट, जो जल्दी परेशान हो जाते हैं?

टेंशन-फ़्री इन्वेस्टमेंट: मार्केट की हर हलचल से चिंता में पड़े बिना वैल्थ बनाने का आसान तरीक़ा

टेंशन-फ्री इन्वेस्टिंग: स्ट्रेस में भी पैसिव फ़ंड्स क्यों हैं गेम-चेंजर?Aditya Roy/AI-Generated Image

एक सुबह, नील अपने बग़ीचे में टहल रहा था और उसने देखा कि उसके पिताजी शांति से कुर्सी पर बैठे कॉफ़ी पी रहे थे, जैसे मार्केट कभी गिरा ही न हो.

“गुड मॉर्निंग, पापा! आप कुछ ज़्यादा ही रिलैक्स लग रहे हैं. क्या आपके शेयरों में आख़िरकार सुधार शुरू हो गया?”

उसके पिताजी हंसे और कहा, “ऐसा नहीं है. लेकिन अब मैं इंडिविजुअल स्टॉक्स में ज़्यादा निवेश नहीं करता. मैंने अपना ज़्यादातर पोर्टफ़ोलियो इंडेक्स फ़ंड्स में लगा दिया है.”

नील ने चौंकते हुए कहा, “क्या? आप ही तो हो जिसने मुझे डायरेक्ट स्टॉक इन्वेस्टिंग का चस्का लगाया था!”

उसके पिताजी ने इस बात को स्वीकारते हुए कहा, “हां, मैंने ही लगाया था. और स्टॉक चुनना वैल्थ बनाने का एक शानदार तरीक़ा है-अगर आपको कंपनियों पर नज़र रखना, एनुअल रिपोर्ट्स पढ़ने और कभी-कभी स्ट्रेस के साथ जीने में मज़ा आता है.”

नील ने आह भरते हुए कहा. “याद मत दिलाइए. पिछले महीने मेरा पोर्टफ़ोलियो ख़राब चल रहा था. मैंने अपने चुने हुए स्टॉक पर काम किया, लेकिन मैं ठीक से सो नहीं पाया.”

उसके पिताजी ने कहा, “यही तो बात है, शेयरों में निवेश करने के लिए पक्के भरोसे से ज़्यादा की ज़रूरत होती है. इसके लिए भावनात्मक रूप से मज़बूत होना होता है. आपको हर कमाई में कमी, हर वैश्विक उथल-पुथल के दौरान टिके रहना होता है. और ज़्यादा रिसर्च के बावजूद, जब कुछ ग़लत होता है तो उतनी ही ज़ोर से चोट लगती है.”

नील ने सिर हिलाया. “बिल्कुल! कभी-कभी मुझे ऐसा लगता है जैसे मैं पूरे मार्केट का बोझ अपने कंधों पर लेकर चल रहा हूं.”

उसके पिताजी मुस्कुराए और कहा, “इसलिए मैंने अपने पोर्टफ़ोलियो को पैसिव फ़ंड्स के साथ बैलेंस करना शुरू किया. ये बस निफ़्टी 50 जैसे बड़े मार्केट को ट्रैक करते हैं. सही स्टॉक चुनने या सही समय पर निवेश करने की कोई चिंता नहीं है. अगर एक कंपनी ख़राब प्रदर्शन करती है, तो दूसरी कंपनियां उसका भार उठाने में मदद करती हैं.”

नील ने पूछा, "तो क्या मैं सिर्फ़ एक इंडेक्स फ़ंड ख़रीदकर खुद को 10 स्टॉक, तिमाही नतीजों को ट्रैक करने और हर महीने की चिंता से बचा सकता था?”

उसके पिताजी ने हंसते हुए कहा, “काफ़ी हद तक. पैसिव इन्वेस्टिंग बाज़ार को मात देने की कोशिश के तनाव के बिना बाज़ार में जोख़िम उठाने का मौक़ा देता है. इसके बजाय, इसका मक़सद मार्केट की परफ़ॉरमेंस से मेल खाना है.”

नील ने थोड़ा गहरी सांस लेते हुए कहा, “तो मैं... कुछ न करके बेहतर कर सकता था?”

उसके पिताजी ने कहा, “हां, बिल्कुल कुछ नहीं. आपको अभी भी निवेशित रहने का फै़सला करना है. लेकिन पैसिव इन्वेस्टिंग का मतलब है कि आपको पूरे दिन स्टॉक टिकर देखने या बाज़ार की हर चाल पर संदेह करने की ज़रूरत नहीं है.”

नील ने कहा, “मुझे यक़ीन है कि इसमें ख़र्च भी कम आता है,”

“बिल्कुल. ये एक ऐसी टीम का हिस्सा होने जैसा है जहां आपको कप्तान होने की ज़रूरत नहीं है. आप बस मार्केट के एवरेज रिटर्न के साथ आगे बढ़ते हैं, जिसने लॉन्ग टर्म में काफ़ी अच्छा परफ़ॉर्म किया है.”

नील ने मुस्कुराते हुए कहा, “तो मुझे स्टॉक चुनना छोड़ने की ज़रूरत नहीं है. लेकिन मेरे पोर्टफ़ोलियो के आधार के रूप में पैसिव फ़ंड्स रखने से मुझे समझदार बने रहने में मदद मिल सकती है.”

उसके पिताजी ने अपना कॉफ़ी का मग उठाते हुए कहा, “अब तुम स्मार्ट तरीक़े सोच रहे हो. मैंने भी स्टॉक चुनना पूरी तरह से बंद नहीं किया है.लेकिन जब मेरे द्वारा चुने गए स्टॉक ठीक से काम नहीं करते, तो मेरे इंडेक्स फ़ंड मुझे शांति देते हैं.”

नील हंसा. “आपको पता है? मुझे लगता है कि अब से मैं इंडेक्स को कुछ भार उठाने दूंगा.”

उसके पिता ने फिर से अपना मग उठाया. “दूसरे पाले में, तुम्हारा स्वागत है नील. खुद को पैसिव बनाओ!”

पैसिव फ़ंड्स की ओर बढ़ता ट्रेंड

नील अपने इन्वेस्टमेंट के नज़रिये पर फिर से सोचने वाला अकेला नहीं है. ज़्यादातर निवेशक अपने पोर्टफ़ोलियो में बैलेंस और शांति लाने के लिए इंडेक्स फ़ंड्स और ETFs (एक्सचेंज-ट्रेडेड फ़ंड्स) जैसे पैसिव फ़ंड्स की ओर रुख़ कर रहे हैं. पिछले पांच साल में भारत में इंडेक्स फ़ंड एसेट में कैसी ग्रोथ हुई है, यहां देखें:

साल इंडेक्स फ़ंड्स में कुल एसेट्स (₹ करोड़)
मई 2,020 10,297
मई 2,021 22,905
मई 2,022 78,047
मई 2,023 1,74,000
मई 2,024 2,30,000
मई 2,025 3,01,000

सिर्फ़ पांच सालों में, इंडेक्स फ़ंड्स में कुल एसेट्स लगभग 30 गुना बढ़ गए हैं. इसका आकर्षण साफ़ है: सरलता, कम लागत, डाइवर्सिफ़िकेशन और कम भावनात्मक उथल-पुथल.

आख़िरी बात

अगर शेयरों में निवेश करने से अक्सर आप चिंतित या असहज महसूस करते हैं, तो शायद अब कुछ पैसिव होने पर जोर देने का समय आ गया है. इंडेक्स फ़ंड और ETFs आपको विनर्स को चुनने या लगातार हर हेडलाइन पर प्रतिक्रिया देने की चिंता के बिना इक्विटी में निवेश करने देते हैं. वो सरल, कम लागत वाले हैं और आश्चर्यजनक रूप से प्रभावी हैं. उन्हें अपनी निवेश यात्रा के लिए इमोशनल इंश्योरेंस के रूप में सोचें - बिना नींद खोए खेल में बने रहने का एक तरीक़ा.

निप्पॉन इंडिया म्यूचुअल फ़ंड की इनवेस्टर एजुकेशन और जागरूकता की पहल

म्यूचुअल फ़ंड निवेशकों के लिए ज़रूरी जानकारी: सभी म्यूचुअल फ़ंड निवेशकों को एक बार KYC (नो योर कस्टमर) प्रोसेस पूरा करना होता है. निवेशकों को सिर्फ़ SEBI की वेबसाइट पर 'इंटरमीडियरीज़/मार्केट इन्फ्रास्ट्रक्चर इंस्टीट्यूशन' के तहत रजिस्टर्ड म्यूचुअल फ़ंड्स के साथ डील करना चाहिए. अपनी शिकायतों के निवारण के लिए, कृपया www.scores.gov.in पर जाएं. KYC, डिटेल में बदलाव और शिकायतों के निवारण के बारे में ज़्यादा जानकारी के लिए, mf.nipponindiaim.com/InvestorEducation/what-to-know-when-investing पर विज़िट करें.

म्यूचुअल फ़ंड निवेश मार्केट से जुड़े जोख़िमों के अधीन हैं. कृपया सभी स्कीम से जुड़े दस्तावेज़ों को ध्यान से पढ़ें.

ये भी पढ़िए: कई इंडेक्स फ़ंड्स में निवेश करना एक ख़राब स्ट्रैटेजी है?

ये लेख पहली बार जुलाई 01, 2025 को पब्लिश हुआ.

Disclaimer: यह कंटेंट सिर्फ़ जानकारी के लिए है और इसे निवेश सलाह या रेकमेंडेशन नहीं मानना चाहिए.

वैल्यू रिसर्च से पूछें aks value research information

कोई सवाल छोटा नहीं होता. पर्सनल फ़ाइनांस, म्यूचुअल फ़ंड्स, या फिर स्टॉक्स पर बेझिझक अपने सवाल पूछिए, और हम आसान भाषा में आपको जवाब देंगे.


टॉप पिक

20% रिटर्न, हर महीने ₹1 लाख: क्या ऐसी उम्मीद लगाना सही है?

पढ़ने का समय 6 मिनटअभिषेक राणा

मिडिल ईस्ट में युद्ध और असर आपकी जेब पर

पढ़ने का समय 6 मिनटउदयप्रकाश

‘मेरे पोर्टफ़ोलियो में 25 फ़ंड हैं. शुरुआत कहां से करूं?’

पढ़ने का समय 5 मिनटउदयप्रकाश

इमरजेंसी फ़ंड की समस्या

पढ़ने का समय 5 मिनटअमेय सत्यवादी

क्या आपका म्यूचुअल फ़ंड सच में आपके लिए काम कर रहा है?

पढ़ने का समय 5 मिनटअमेय सत्यवादी

म्यूचुअल फंड पॉडकास्ट

updateनए एपिसोड हर शुक्रवार

गैरज़रूरी जटिलता की बीमारी फिर लौटी

गैरज़रूरी जटिलता की बीमारी फिर लौटी

SEBI का नया कैटेगराइज़ेशन से जुड़ा सर्कुलर पुराने मसलों को ठीक करता है, लेकिन इंडस्ट्री को प्रोडक्ट के लिहाज़ से अगले दौर की भीड़ के लिए नया सामान भी दे देता है

दूसरी कैटेगरी