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5 अनजान कंपनियां जिनमें निप्पॉन इंडिया स्मॉल कैप फ़ंड की है बड़ी हिस्सेदारी

ये छोटी कंपनियां शायद आपके रडार पर न हों, लेकिन इस स्मॉल-कैप फ़ंड ने इनमें 8 प्रतिशत से ज़्यादा हिस्सेदारी ले रखी है.

निप्पॉन इंडिया स्मॉल कैप फ़ंड की 5 अनजान शेयरों में बड़ी हिस्सेदारी है. क्या आपके पास भी कोई है?Aditya Roy/AI-Generated Image

सारांशः निप्पॉन इंडिया स्मॉल कैप फ़ंड भले ही म्यूचुअल फ़ंड की दुनिया का दिग्गज हो, लेकिन इसकी कुछ सबसे साहसिक निवेश रणनीतियां छिपी हुई हैं. ज़्यादातर निवेशक जहां बड़े और चर्चित नामों के पीछे भाग रहे हैं, वहीं, ये फ़ंड चुपके से उन अनजान कंपनियों में 8 प्रतिशत से ज़्यादा हिस्सेदारी ले चुका है, जिनके बारे में आपने शायद ही कभी सुना हो. लेकिन यही कंपनियां भविष्य में स्मॉल-कैप की बड़ी विनर बन सकती हैं. क्या आप जानना चाहते हैं कि भारत का सबसे बड़ा स्मॉल-कैप फ़ंड अपनी सबसे ज़्यादा हिस्सेदारी कहां लगा रहा है? इस लिस्ट में आपको भविष्य का कोई मल्टीबैगर मिल सकता है.

₹66,000 करोड़ से ज़्यादा के नेट एसेट्स और 260 स्टॉक्स के साथ, निप्पॉन इंडिया स्मॉल कैप फ़ंड भारत के स्मॉल-कैप म्यूचुअल फ़ंड स्पेस का सबसे बड़ा नाम है. ये रिटेल निवेशकों के बीच जाना-पहचाना नाम है और इसके पीछे ठोस कारण हैं. लेकिन इसका बड़ा साइज़ अपने आप में एक अनोखी चुनौती लाता है: इतने बड़े फ़ंड के साथ स्मॉल-कैप स्पेस में फुर्ती कैसे बनाए रखी जाए, जहां सक्रियता ही सबसे बड़ा हथियार है?

स्मॉल-कैप निवेश एक सटीक रणनीति का खेल है. लार्ज-कैप फ़ंड्स भले ही लिक्विडिटी और इंडेक्स एक्सपोजर पर निर्भर रह सकते हैं, लेकिन इसके उलट स्मॉल-कैप फ़ंड मैनेजर्स को शिकारी और संरक्षक दोनों की भूमिका निभानी पड़ती है-उन्हें ऐसी कंपनियां खोजनी होती हैं, जिन पर ज़्यादा रिसर्च न हुई हो और फिर धैर्य के साथ उनकी वैल्यू अनलॉक होने का इंतज़ार करना होता है. ये तब और मुश्किल हो जाता है, जब आपके फ़ंड का साइज़ हजारों करोड़ में हो.

फिर भी, निप्पॉन इंडिया स्मॉल कैप फ़ंड ने धैर्यवान निवेशकों के लिए शानदार ट्रैक रिकॉर्ड तैयार किया है.

कम समय में नुक़सान, लंबे समय का फ़ायदा

जुलाई 2025 तक इसका एक साल का रिटर्न -4.21 प्रतिशत रहा, जो पहली नज़र में भरोसा नहीं जगाता. ये शायद इस बात का संकेत है कि इतने बड़े स्मॉल-कैप फ़ंड के लिए अपनी एसेट्स को तेज़ी और सटीकता के साथ लगाना कितना मुश्किल है.

लेकिन स्मॉल-कैप निवेश एक साल के निवेशक के लिए नहीं है. इसके लिए लंबे समय तक टिके रहने की ज़रूरत होती है और जो ऐसा करते हैं, उन्हें फ़ायदा होता है.

मिसाल के तौर पर, ये फ़ंड जनवरी 2018 से लेकर 2020 के अंत तक लगभग तीन साल तक शून्य रिटर्न देता रहा. ये ऐसा दौर था, जिसने किसी भी निवेशक के सब्र की कठिन परीक्षा ली होगी. लेकिन इसके बाद इसने शानदार वापसी की.

इसके सालाना 21.96 प्रतिशत के 10 साल के रिटर्न पर ग़ौर कीजिए, जो इसे अपनी कैटेगरी में सबसे बेहतर परफॉर्मर बनाता है. इससे भी प्रभावशाली हैं इसके 24.26 प्रतिशत SIP रिटर्न. इसका मतलब, अगर आपने 10 साल पहले ₹10,000 प्रति माह की SIP शुरू की होती, तो आज आपके पास ₹44 लाख से ज़्यादा होते.

इसका रोलिंग रिटर्न रिकॉर्ड भी उतना ही मज़बूत है. पिछले पांच सालों में पांच साल के डेली रोलिंग रिटर्न के आधार पर, ये फ़ंड:

  • 100 प्रतिशत बार अपने बेंचमार्क को मात दे चुका है.
  • 89 प्रतिशत बार 15 प्रतिशत से ज़्यादा रिटर्न दे चुका है.

ये उस फ़ंड के लिए बुरा नहीं, जिसका बड़ा साइज़ इसकी सबसे बड़ी रुकावट हो सकता था.

ये भी पढ़ेंः इस स्मॉल-कैप फ़ंड ने 90% समय दिया 15% से ज़्यादा रिटर्न, क्या आपने भी किया है निवेश?

तो, ये फ़ंड स्मॉल-कैप में अपनी सबसे बड़े दांव कहां लगा रहा है?

हम जानते हैं कि इस फ़ंड ने अपने पोर्टफ़ोलियो में SBI, एशियन पेंट्स और एक्सिस बैंक जैसे बड़े और चर्चित नाम शामिल किए हैं. लेकिन इसकी असली ताकत उन अनजान, कम चर्चित होल्डिंग्स यानि ऐसे स्टॉक्स में दिखती है, जहां इसने कंपनी का बड़ा हिस्सा अपने पास रखा है.

यहां ऐसे कुछ उदाहरण हैं:

कंपनी निप्पॉन इंडिया स्मॉल कैप फ़ंड के पास मौजूद स्टेक
NIIT Learning Systems 8.94%
Honda India Power Products 8.82%
Vindhya Telelinks 8.24%
Elantas Beck India 8.21%
NIIT 8.17%

ये वो स्टॉक्स नहीं हैं, जो सुर्खियां में रहते हों. लेकिन यही बात इन्हें ध्यान देने लायक बनाती है. फ़ंड की बड़ी हिस्सेदारी इनमें लंबी अवधि का भरोसा दिखाती है.

एक ख़ास होल्डिंग है जायडस वेलनेस, जिसमें फ़ंड की 5.26 प्रतिशत हिस्सेदारी है. ये बात इसे और दिलचस्प बनाती है कि PPFAS (पराग पारिख फ़ाइनेंशियल एडवाइज़री सर्विसेज) म्यूचुअल फ़ंड-जो अपनी सतर्क और पक्के भरोसे वाली स्टाइल (high-conviction style) के लिए जाना जाता है-ने भी हाल के महीनों में इस कंपनी में हिस्सेदारी लेनी शुरू की है, जैसा कि हमने अपनी एक अन्य रिपोर्ट में बताया था. जब दो अलग-अलग इन्वेस्टमेंट फ़िलॉसफ़ी वाले फ़ंड हाउस किसी स्टॉक पर एकमत होने लगते हैं, तो ये ध्यान देने लायक होता है.

निवेशकों को इससे क्या समझना चाहिए?

अगर आप पहले से इस फ़ंड में निवेश कर रहे हैं, तो ये होल्डिंग्स आपको याद दिलाती हैं कि आपका पैसा न सिर्फ़ भारत की ग्रोथ स्टोरी पर, बल्कि उन सावधानीपूर्वक चुने गए बिज़नस पर भी दांव लगा रहा है, जो हमेशा सुर्खियों में नहीं होते.

और क्या आपने अभी तक निवेश नहीं किया है? तो ये लिस्ट आपको इसकी एक झलक देती है कि बड़े फ़ंड मैनेजर कैसे सोचते हैं और अगले दशक के लिए चुपके से कहां दांव लगा रहे हैं.

क्या आप जानना चाहते हैं कि आपके पोर्टफ़ोलियो के फ़ंड्स में ऐसे छिपे हुए नगीने हैं या नहीं?

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ये भी पढ़ेंः स्मॉल-कैप फ़ंड में ज़्यादा रिटर्न पाने का सबसे स्मार्ट तरीक़ा कौन सा है?

Disclaimer: यह कंटेंट सिर्फ़ जानकारी के लिए है और इसे निवेश सलाह या रेकमेंडेशन नहीं मानना चाहिए.

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