बड़े सवाल

रिटायर्ड कपल को ₹1 करोड़ कहां निवेश करना चाहिए?

हम यहां दो विकल्पों के बारे में बता रहे हैं

एक रिटायर्ड दंपति को अपने 1 करोड़ रुपये कहाँ निवेश करने चाहिए?Aditya Roy/AI-Generated Image

सारांशः आपने रिटायरमेंट ले लिया और आपके पास ₹1 करोड़ हैं. अब सवाल ये है कि इस पैसे को कैसे निवेश करें कि ये नियमित इनकम दे और जल्दी खत्म भी न हो? आइए जानें, क्योंकि हर किसी के लिए एक ही फॉर्मूला काम नहीं करता. जवाब आपकी जोखिम उठाने की क्षमता पर निर्भर करता है...

रिटायरमेंट को अक्सर जिंदगी की "दूसरा इनिंग" कहा जाता है और क्रिकेट की तरह ही यहां की स्ट्रैटेजी पहली पारी से बिल्कुल अलग होती है. ₹1 करोड़ के साथ रिटायर होने वाले दंपति के लिए सबसे बड़ा सवाल है: इस पैसे को कैसे निवेश करें कि नियमित इनकम मिले और ये जल्दी खत्म न हो?

तो, आइए देखते हैं कि वे ऐसा कैसे कर सकते हैं.

ऑप्शन 1: सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम (SCSS)

अगर आप 60 साल से ऊपर हैं और नियमित इनकम की तलाश में हैं, तो सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम (SCSS) आपके लिए एकदम सही है. ये स्कीम हर ज़रूरी चीज़ को पूरा करती है: फ़िक्स्ड डिपॉज़िट (FD), पब्लिक प्रॉविडेंट फ़ंड (PPF) जैसे डेट निवेश के दूसरे विकल्पों की तुलना में ज़्यादा रिटर्न देती है.

वर्तमान में SCSS में सालाना 8.2% ब्याज मिल रहा है, जो सीनियर सिटीजन्स के लिए सरकार समर्थित सबसे ज़्यादा रिटर्न देने वाला विकल्प है.

SCSS के फ़ायदे

1. गारंटीड हाई रिटर्न

आजकल बड़े बैंकों की FD 6-7% ब्याज दे रही हैं. SCSS 8.2% के साथ इनसे कहीं बेहतर है.

  • अगर आप ₹30 लाख (प्रति व्यक्ति अधिकतम सीमा) निवेश करते हैं, तो आपको सालाना ₹2.46 लाख मिलेंगे.
  • यानी हर तिमाही ₹61,500 या महीने में करीब ₹20,000.
  • अगर दंपति मिलकर ₹60 लाख (अलग-अलग बैंक खातों में) निवेश करते हैं, तो ये रक़म बढ़कर करीब ₹40,000 महीना हो सकती है, जो मासिक ख़र्चों के लिए काफ़ी हो सकती है.

नए टैक्स स्लैब के तहत, अगर आपकी सालाना आय ₹12 लाख से कम है, तो SCSS का पूरा ब्याज टैक्स-फ़्री हो सकता है.

2. 100% सरकारी गारंटी

आपका पैसा पूरी तरह सुरक्षित है. कॉरपोरेट बॉन्ड्स या कंपनी डिपॉज़िट्स के उलट, यहां जोखिम न के बराबर है.

3. तिमाही भुगतान = नियमित इनकम

मासिक घरेलू ख़र्चों को पूरा करने के लिए यह एकदम सही है, क्योंकि आपको अपने मूलधन में हाथ डाले बिना नियमित इनकम मिलती है.

4. अच्छी टाइमिंग का फ़ायदा

SCSS की ब्याज दर हर तिमाही में बदलती है, लेकिन एक बार निवेश करने के बाद आपको 5 साल तक वही दर मिलती है. यानी, आज की 8.2% की दर भविष्य में कम होने पर भी आपके लिए लॉक रहेगी.

5. एक्सटेंशन की सुविधा

SCSS में 5 साल का लॉक-इन पीरियड है, लेकिन आप इसे 3-3 साल के ब्लॉक में कई बार बढ़ा सकते हैं. ये इसे रिटायरमेंट के लिए लंबी अवधि का शानदार विकल्प बनाता है.

ख़ास बातें

  • पात्रता: 60+ साल (या कुछ शर्तों के साथ 55+ अगर जल्दी रिटायर हुए हों).
  • अधिकतम निवेश: प्रति व्यक्ति ₹30 लाख (दंपति के लिए संयुक्त रूप से ₹60 लाख).
  • अवधि: 5 साल, जिसे 3 साल के ब्लॉक में अनिश्चितकाल तक बढ़ाया जा सकता है.
  • जल्दी निकासी: 1 साल बाद छोटे जुर्माने के साथ निकासी संभव.

निष्कर्ष: SCSS हर रिटायर्ड व्यक्ति के पोर्टफोलियो का आधार होना चाहिए.

ऑप्शन 2: इक्विटी को नज़रअंदाज़ न करें

ये सुनकर शायद आपको हैरानी हो, लेकिन रिटायरमेंट के बाद भी आपको अपने सारे पैसे सुरक्षित डेट विकल्पों में नहीं लगाने चाहिए.

क्यों? क्योंकि महंगाई आपके धन का चुपके से नाश करने वाली चीज है. अगर आपका सारा पैसा फ़िक्स्ड इनकम में है, तो एक दशक में आपके ख़र्चे आपकी इनकम को पीछे छोड़ सकते हैं.

इसलिए हम सलाह देते हैं कि रिटायर्ड लोग अपने कॉर्पस का 33-50% हिस्सा इक्विटी में रखें.

  • अगर आप सतर्क निवेशक हैं, तो कम से कम 33% पैसा इक्विटी में लगाएं.
  • अगर आप कम समय के उतार-चढ़ाव का सामना कर सकते हैं, तो 50% तक जा सकते हैं.

ये भी पढ़ेंः क्या आपको 'टॉप-परफ़ॉर्मिंग' म्यूचुअल फ़ंड में निवेश करना चाहिए?

50% इक्विटी के साथ सहज लोगों के लिए:

  • ₹50 लाख SCSS में लगाएं, जो डेट-ओरिएंटेड निवेश है.
  • बाकी ₹50 लाख किसी एग्रेसिव हाइब्रिड फ़ंड या लार्ज-कैप इंडेक्स फ़ंड में लगाएं.

जो लोग नहीं जानते, एग्रेसिव हाइब्रिड फ़ंड्स में 65-80% हिस्सा इक्विटी में और बाक़ी डेट में होता है. ये फ़ंड्स आपको ग्रोथ देते हैं, लेकिन उतार-चढ़ाव के खिलाफ कुछ सुरक्षा भी देते हैं. चूंकि, ये फ़ंड्स डेट में भी निवेश करते हैं, इनके 5 और 10 साल के रिटर्न अच्छे हैं-औसतन 17% और 11.4%-यानी ये लंबे समय में महंगाई को मात देने में सक्षम हैं और शुद्ध इक्विटी फ़ंड्स की तुलना में कम अस्थिर भी.

वहीं, लार्ज-कैप इंडेक्स फ़ंड्स 100% इक्विटी फ़ंड्स हैं और कम समय में ज़्यादा अस्थिर हो सकते हैं. ये केवल उन निवेशकों के लिए हैं, जिन्हें मार्केट का अनुभव हो.

सतर्क रिटायर्ड निवेशक के लिए (33% इक्विटी)

इसके लिए आपके पास दो विकल्प हैं.

आप या तो निवेश करें:

  • ₹60 लाख SCSS में.
  • ₹17 लाख शॉर्ट-ड्यूरेशन डेट फ़ंड में (कम जोखिम, स्थिर रिटर्न और नियमित इनकम).
  • और बाक़ी ₹33 लाख एग्रेसिव हाइब्रिड फ़ंड में.

अगर ये जटिल लगता है, तो रिटायर्ड लोग अपने ₹1 करोड़ इक्विटी सेविंग्स फ़ंड्स में भी निवेश कर सकते हैं. इन फ़ंड्स में आमतौर पर क़रीब 30% हिस्सा इक्विटी में होता है, बाकी डेट और आर्बिट्राज़ स्ट्रैटेजी में, जिससे बिना पूर्ण इक्विटी रिस्क के आपके पोर्टफ़ोलियो को हल्की-सी ग्रोथ मिलती है.

इस तरह, आपको इक्विटी से कुछ ग्रोथ मिलती है, लेकिन आपका ज़्यादातर पैसा सुरक्षित रहता है.

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ये भी पढ़ेंः एक अच्छी ज़िंदगी से समझौता किए बिना ₹10 करोड़ कैसे बचाएं?

ये लेख पहली बार अगस्त 21, 2025 को पब्लिश हुआ.

Disclaimer: यह कंटेंट सिर्फ़ जानकारी के लिए है और इसे निवेश सलाह या रेकमेंडेशन नहीं मानना चाहिए.

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