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शेयर बाज़ार में गिरावट के बीच अपोलो माइक्रो सिस्टम्स का शेयर 15 प्रतिशत की दमदार रैली के साथ ₹236 के नए रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गया. असल में DRDO और डिफेंस PSU से मिले नए ऑर्डर से शेयर को सपोर्ट मिला है, जिससे कंपनी की ग्रोथ स्टोरी को और मज़बूती मिल रही है. कुल मिलाकर कंपनी को 'मेक इन इंडिया' का अच्छा फ़ायदा मिल रहा है.
लंबी अवधि में दिया है मल्टीबैगर रिटर्न
ये शेयर निवेशकों के लिए मल्टीबैगर साबित हुआ है. बीते 5 साल में शेयर 1,722 प्रतिशत और 3 साल में 1,665 प्रतिशत रिटर्न दे चुका है. बीते एक साल में शेयर ने 118 प्रतिशत और 3 महीने में लगबग 53 प्रतिशत रिटर्न दिया है.
अगर 3 साल पहले किसी ने इस शेयर में ₹1 लाख लगाए होते तो उसकी वेल्थ बढ़कर ₹17.50 लाख से ज़्यादा हो गई होती.
Apollo Micro Systems के शेयर में रैली की वजह
हाल ही में कंपनी ने DRDO और डिफेंस PSU से ₹25.12 करोड़ के ऑर्डर हासिल किए हैं. इससे पहले जून, 2025 में समाप्त तिमाही के लिए कंपनी ने दमदार नतीजे पेश किए हैं. कंपनी का नेट प्रॉफ़िट सालाना आधार पर 110 प्रतिशत बढ़कर ₹17.7 करोड़ हो गया. वहीं कंपनी की कुल इनकम 47 प्रतिशत बढ़कर ₹134 करोड़ के स्तर पर पहुंच गई, जो एक साल पहले समान तिमाही में ₹91.78 करोड़ रही थी.
कंपनी क्या करती है
अपोलो माइक्रो सिस्टम्स लिमिटेड एक भारतीय कंपनी है जो डिफेंस, स्पेस और होमलैंड सिक्योरिटी के लिए हाई-टेक सॉल्युशंस तैयार करती है. ये इलेक्ट्रॉनिक और इलेक्ट्रो-मैकेनिकल सिस्टम डिज़ाइन करती है, जो मिशन-क्रिटिकल ऑपरेशंस में काम आते हैं. सरकार के रक्षा मंत्रालय, पब्लिक सेक्टर यूनिट्स और प्राइवेट कंपनियों के लिए ये इंटीग्रेटेड वेपन सिस्टम, एम्बेडेड सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर डेवलपमेंट जैसी सेवाएं देती है. हैदराबाद बेस्ड ये कंपनी 1997 से चल रही है और अब ये डिफेंस सेक्टर की तेज़ी से उभरती कंपनियों में से एक है.
प्रमुख मेट्रिक्स और वैल्यूएशन
अपोलो माइक्रो सिस्टम्स की वित्तीय सेहत पर नजर डालें, तो ये ग्रोथ की राह पर है. नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक़ (21 अगस्त 2025 तक) अहम डेटा:
| मार्केट कैप | ₹7,713 करोड़ |
|---|---|
| ROE | 10% |
| ROCE | 14% |
| P/E रेशियो | 116 |
| P/B रेशियो | 11.6 |
| बुक वैल्यू | ₹ 19.80 |
| EPS | ₹2.12 (TTM) |
निवेशकों के लिए क्या मतलब
ख़ासकर अगर आप लॉन्ग-टर्म पर फोकस करते हैं तो निवेशकों के लिए ये अच्छा संकेत है. डिफेंस सेक्टर में सरकारी सपोर्ट से कंपनी की ऑर्डर बुक मज़बूत हो सकती है, जो भविष्य में प्रॉफ़िट बढ़ाएगी. लेकिन सावधान रहें. असल में महंगे वैल्यूएशन का मतलब है कि अगर बाज़ार गिरा, तो शेयर में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है. पिछले साल कंपनी ने ₹0.25 प्रति शेयर डिविडेंड दिया, जिससे उसकी स्थिरता का पता चलता है. अगर आप डिफेंस स्टॉक्स में दिलचस्पी रखते हैं, तो अपोलो को वॉचलिस्ट में रखें, लेकिन हमेशा अपनी रिसर्च करें.
आखिरी बात
अपोलो माइक्रो सिस्टम्स की ये तेज़ी डिफेंस सेक्टर की बड़ी तस्वीर दिखाती है, जहां अवसरों की कमी नहीं. लेकिन याद रखें, स्टॉक मार्केट में उतार-चढ़ाव सामान्य है. लेटेस्ट अपडेट्स के लिए BSE, NSE या कंपनी की घोषणाओं पर नजर रखें. अगर ग्रोथ जारी रही, तो ये मल्टीबैगर बन सकता है!
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डिस्क्लेमर: ये आर्टिकल आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस की मदद से तैयार किया गया है और हमारी टीम ने इसकी जानकारी को ध्यान से एडिट और रिव्यू किया है. इसका मक़सद सिर्फ़ जानकारी देना है. किसी भी निवेश फ़ैसले से पहले अपनी रिसर्च ज़रूर करें.<
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