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सारांशः ट्रंप के टैरिफ़ के कारण बाज़ार में उथल-पुथल बढ़ने से सेंसेक्स अपने ऑल-टाइम हाई से 7% नीचे है. लॉन्ग-टर्म निवेशक स्वाभाविक रूप से इस बारे में सोच रहे होंगे कि उतार-चढ़ाव से निपटने वाला पोर्टफ़ोलियो कैसे बनाया जाए. इसका जवाब डिविडेंड स्टॉक्स हैं. आगे की स्टोरी में जानिए कैसे.
शेयर बाज़ार में उथल-पुथल का माहौल है. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के टैरिफ़ ने निवेशकों को बेचैन कर दिया है, जिससे इंडेक्स में गिरावट आ रही है. ट्रेडर्स ऐसे उतार-चढ़ाव का सामना कर सकते हैं. लॉन्ग-टर्म निवेशक नहीं. उनके लिए सवाल है: ग्रोथ छोड़े बिना पोर्टफ़ोलियो को उतार-चढ़ाव से कैसे बचाया जाए? इसका एक तरीक़ा है - डिविडेंड स्टॉक्स.
डिविडेंड क्यों ज़रूरी है
डिविडेंड देने वाली कंपनियां आमतौर पर स्थिर कमाई करने वाली होती हैं. ये ज़्यादातर उन सेक्टरों में मिलती हैं जहां डिमांड ज़्यादा नहीं बदलती. इनमें कंज़्यूमर गुड्स, हेल्थकेयर, यूटिलिटी या IT सर्विसेज सेक्टर की पुरानी कंपनियां शामिल हैं. ये बिज़नस बहुत तेज़ी से नहीं बढ़ते, लेकिन इनकी कमाई स्थिर होती है और झटकों से कम प्रभावित होती है. अचानक उछाल और फिर भारी गिरावट के बजाय अगर साल-दर-साल 5% की ग्रोथ अगर बनी रहे, तो ये निवेशकों के लिए मंदी के समय भी कहीं ज़्यादा फ़ायदेमंद होती है.
ये एक अहम बढ़त साबित होती है. तेज़ी के बाज़ार में भी ये शेयर बढ़ते रहते हैं. मंदी के दौर में, इनकी स्थिरता और डिविडेंड पूंजी को बचाए रखते हैं. जो लोग सुरक्षा चाहते हैं, न कि अचानक बड़ा मुनाफ़ा, उनके लिए ये बिज़नस ही सही मायने में निवेश करने लायक़ हैं.
डिविडेंड ताक़त की निशानी है
इसके अलावा, एक पुरानी कहावत है कि डिविडेंड स्टॉक्स बोरिंग-मैच्योर हो चुकी कंपनियां होती हैं जिनके पास आगे बढ़ने की गुंजाइश कम होती है. वहीं, जो कंपनियां मुनाफ़े को दोबारा बिज़नेस में लगाती हैं, उन्हें ज़्यादा ग्रोथ की भूख वाली माना जाता है. ये पूरी तरह ग़लत नहीं है, लेकिन असली बात छूट जाती है: डिविडेंड देना कंपनी की मज़बूत स्थिति का संकेत है.
कंपनी तभी लगातार डिविडेंड दे सकती है जब उसकी कमाई कैश में बदल रही हो. यहां अकाउंटिंग के खेल की गुंजाइश नहीं रहती. जो कंपनी साल-दर-साल डिविडेंड देती है, वो साबित करती है कि उसका मुनाफ़ा असली है, दोहराया जा सकता है और कैश फ़्लो द्वारा समर्थित है. ख़ासकर हाल के उतार-चढ़ाव भरे मार्केट में, निवेशकों के लिए ये भरोसा किसी नए ट्रेंड के रोमांच से कहीं ज़्यादा क़ीमती हो सकता है.
इसीलिए हमने उन कंपनियों को चुना जिन्होंने इन ख़ूबियों को सबसे ज़्यादा लगातार प्रदर्शित किया है. हमारे फ़िल्टर में तीन चीज़ों पर ध्यान दिया गया:
- पिछले 10 सालों में औसत डिविडेंड कम से कम 40%
- हर साल डिविडेंड देना
- कमाई में कम उतार-चढ़ाव
इस लिस्ट से हमने पांच कंपनियां चुनीं जो डिविडेंड इन्वेस्टिंग की ताक़त दिखाती हैं. ये तेज़ ग्रोथ से आकर्षित नहीं करतीं, लेकिन इनकी सबसे बड़ी ख़ूबी है - स्थिरता, जो आज के मार्केट में सबसे बड़ी कमी है.
| स्टॉक | 10-साल का औसत सालाना डिविडेंड | 10-साल का सालाना रिटर्न (%) |
|---|---|---|
| Infosys | 55 | 10.3 |
| HUL | 88 | 12 |
| Abbott India | 54 | 21 |
| TCS | 55 | 9.2 |
| Powergrid | 44 | 13.8 |
ये कंपनियां रोमांच नहीं ढूंढतीं. ये स्थिरता पर ध्यान देती हैं, मुनाफ़े को कैश में बदलती हैं और निवेशकों को अच्छा हिस्सा लौटाती हैं. नतीजा है भरोसेमंद इनकम और जब मार्केट मुश्किल में हो तो बचाव.
संतुलन को याद रखें
इनमें से कुछ भी मुफ़्त नहीं मिलता. स्थिरता पर भरोसा करके, निवेशक कुछ संभावित बढ़त का त्याग कर देते हैं. बाज़ार के इस कोने में आपको मल्टीबैगर रिटर्न नहीं मिलेगा. लेकिन जो मिलेगा वो इस समय मुश्किल से मिलता है, ये है- भरोसा, सुरक्षा और पोर्टफ़ोलियो का सहज सफ़र. मौजूदा वक़्त में जब नीतियों के झटके इंडेक्स को हिला रहे हों, ये संतुलन (ट्रेडःऑफ) न सिर्फ़ स्वीकार्य बल्कि समझदारी भरा भी लगता है.
हमारे द्वारा चुने गए टॉप डिविडेंड स्टॉक जानना चाहते हैं?
जब मार्केट तेज़ी पर होता है तो स्थिरता और भरोसेमंद इनकम सुनने में आकर्षक नहीं लगते, लेकिन उतार-चढ़ाव आने पर इनकी अहमियत सबसे ज़्यादा होती है. जो निवेशक सुरक्षा और पैसिव इनकम का ये बैलेंस चाहते हैं, उनके लिए हमने वैल्यू रिसर्च स्टॉक एडवाइज़र पर डिविडेंड ग्रोथ पोर्टफ़ोलियो बनाया है. इसमें 10 कंपनियां हैं जो डिविडेंड और लॉन्ग-टर्म ग्रोथ दोनों देती हैं. संक्षेप में, ये पोर्टफ़ोलियो आपकी पूंजी को बचाते हुए कंपाउंड करता है.
स्टॉक एडवाइज़र पर डिविडेंड ग्रोथ पोर्टफ़ोलियो देखें
डेटा इनपुट: उदयप्रकाश
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