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बफ़े को उतार-चढ़ाव पसंद है, ये 7 शेयर इसे सही साबित करते हैं

क्यों उथल-पुथल वाले मार्केट ही असल मौक़े साबित हो सकते हैं

क्यों उथल-पुथल वाले मार्केट ही असल मौक़े साबित हो सकते हैंAditya Roy/AI-Generated Image

सारांशः बाज़ार में उतार-चढ़ाव जारी है, लेकिन वॉरेन बफ़े हमेशा मानते रहे हैं कि वॉलेटिलिटी रिस्क नहीं बल्कि मौक़ा है. और 7 भारतीय कंपनियां इसे सच साबित कर रही हैं. ये कंपनियां दिखाती हैं कि उतार-चढ़ाव से डरने की ज़रूरत नहीं है. नीचे देखिए.

आजकल बाज़ार रोलर-कोस्टर की तरह हैं. हर नई ख़बर, चाहे ट्रंप की टैरिफ़ पॉलिसी हो या घरेलू ग्रोथ का अनुमान, इंडेक्स को एक दिन ऊपर और अगले दिन नीचे धकेल देती है. ज़्यादातर निवेशकों के लिए ऐसा उतार-चढ़ाव डर पैदा करता है और सुरक्षित जगह भागने का कारण बन जाता है. लेकिन वॉरेन बफ़े इसके उलट करने की सलाह देंगे.

निवेश की दुनिया के इस महारथी ने हमेशा कहा है कि मार्केट में उतार-चढ़ाव रिस्क नहीं बल्कि मौक़ा है. उनके मुताबिक़, निवेशक को मार्केट के उतार-चढ़ाव को दुश्मन नहीं बल्कि दोस्त समझना चाहिए, क्योंकि पैनिक के दौर में मज़बूत कंपनियों के शेयर अक्सर कम क़ीमत पर बिक़ने लगते हैं.

उनके हिसाब से इस तरह के उतार-चढ़ावों से अच्छे बिज़नस वक़्त-बेवक़्त बेहद सस्ते हो जाते हैं. और, ये किसी ख़तरे से कम नहीं बल्कि धैर्यवान निवेशकों के लिए तोहफ़ा है.

उतार-चढ़ाव का मामला

फ़ाइनांस की अकादमिक दुनिया हालांकि इससे असहमत रही है. फ़ाइनेंस थ्योरी उतार-चढ़ाव को रिस्क मानती है और इसके लिए ‘बीटा’ नाम का मेट्रिक इस्तेमाल करती है. बीटा बताता है कि कोई स्टॉक बेंचमार्क इंडेक्स के मुक़ाबले कितना हिलता है. बीटा 1 का मतलब स्टॉक मार्केट के साथ चलता है. 1 से ऊपर का मतलब ज़्यादा उतार-चढ़ाव. जैसे- बीटा 1.5 का मतलब स्टॉक इंडेक्स के मुक़ाबले आमतौर पर 50% ज़्यादा ऊपर या नीचे जाता है. 1 से कम बीटा का मतलब है कि ये स्थिर है.

पारंपरिक सोच ये कहती है कि बीटा जितना ऊंचा, स्टॉक उतना रिस्की. ये बात तभी समझ में आती है जब आप क़ीमतों में अचानक होने वाले उतार-चढ़ाव को ख़तरे के बराबर मानें. लेकिन बफ़े का फ़लसफ़ा इस सोच को पूरी तरह पलट देता है. उनके मुताबिक़, रिस्क का लेना-देना रोज़ाना की क़ीमतों से नहीं, बल्कि उस बिज़नेस की हालत यानि कमज़ोर फ़ंडामेंटल्स, कमज़ोर कैश फ़्लो या डांवाडोल मैनेजमेंट से है. वहीं एक मज़बूत कंपनी अगर सही क़ीमत पर ख़रीदी जाए तो शॉर्ट-टर्म में शेयर चाहे कितना भी झूले, रिस्क कम ही रहता है.

भारतीय मार्केट से जुड़े सबूत

भारतीय बाज़ार बफ़े की सोच का साफ़ सबूत देता है. कई कंपनियां जिनका बीटा ऐतिहासिक रूप से ऊंचा रहा यानी जिनके शेयर इंडेक्स से ज़्यादा उतार-चढ़ाव भरे रहे, उन्होंने लॉन्ग-टर्म में शानदार रिटर्न दिए. नीचे ऐसे ही 7 नाम दिए गए हैं:

स्टॉक 10 का रिटर्न (सालाना %) 10 साल का बीटा (सेंसेक्स पर) 10 साल का बीटा (BSE 500 पर)
Bajaj Finance 33.7 1.4 1.4
Adani Enterprises 41.3 1.4 1.7
Adani Power 39.6 1.3 1.6
DLF 21.2 1.5 1.7
Jindal Steel 30.6 1.5 1.8
Manappuram Finance 28 1.3 1.5
Shriram Finance 14.6 1.4 1.5

ये शेयर उथल-पुथल से इसलिए नहीं उबर पाए क्योंकि उतार-चढ़ाव जादुई रूप से अनुकूल हो गया. बल्कि इसलिए क्योंकि इनके बिज़नेस लगातार कमाई बढ़ाते रहे, मार्केट शेयर बचाते रहे और शेयरहोल्डर्स के लिए वेल्थ बनाते रहे. निवेशकों ने क़ीमतों में उतार-चढ़ाव के बजाय फ़ंडामेंटल्स के आधार पर इनका आकलन किया और उन्हें भरपूर फ़ायदा हुआ. 

इस उतार-चढ़ाव भरे बाज़ार में कहां निवेश करें?

मौजूदा बाज़ार का उतार-चढ़ाव शायद आपको परेशान कर रहा होगा लेकिन यही नए मौके़ भी दे रहा है. ये वही पल है जब बफ़े कहेंगे कि क्वालिटी डिस्काउंट पर मिल रही है. असली कुंजी है ये पहचानना कि उतार-चढ़ाव सिर्फ़ शोर (सेंटिमेंट, हेडलाइन वगैरह) से आया है या फिर फ़ंडामेंटल्स के कमज़ोर होेन से. यही जगह है जहां वैल्यू रिसर्च स्टॉक एडवाइज़र आपकी मदद करता है.

हमारे एनालिस्ट उन कंपनियों की पहचान करते हैं जिनके फ़ंडामेंटल्स मज़बूत हैं, जो बाज़ार के उतार-चढ़ाव का सामना कर सकते हैं और लॉन्ग-टर्म के लिए रखने लायक़ हैं. अगर उतार-चढ़ाव आपको बेचैन कर रहा है, तो हम आपको ऐसे बिज़नस की ओर गाइड करेंगे जो तूफ़ानों में भी टिके रहें और आपकी वेल्थ को लगातार बढ़ा सकें।

स्टॉक एडवाइज़र आज़माएं

डेटा इनपुट उदयप्रकाश ने उपलब्ध कराए हैं 

ये भी पढ़ें: 11 शेयर जो वॉरेन बफ़ेट की कैपिटल इफ़िशिएंसी टेस्ट पर खरे उतरते हैं

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