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एक कंपनी जो पेंट वार में चुपचाप बन रही विनर

पेंट सेक्टर की बड़ी-बड़ी कंपनियां बाज़ार हिस्सेदारी के लिए आपस में भिड़ रही हैं, वहीं एक सप्लायर इस मुकाबले को चुपके से अपने लिए मौक़े में बदल रही है

पेंट वार में चुपचाप विनर बन रहे ये शेयरAditya Roy/AI-Generated Image

बाज़ार अक्सर निवेशकों को अप्रत्याशित तरीक़ों से चौंकाते हैं. भारत के पेंट उद्योग में ये चौंकाने वाली बात मांग में गिरावट से नहीं, बल्कि भारी प्रतिस्पर्धा के चलते देखने को मिली है. इस कारण, पूरे सेक्टर को नए सिरे से आकार मिल रहा है. भारी पूंजी वाले समूहों के इस उद्योग में ताल ठोकने से ये उद्योग हिल गया है जिसे कभी स्थिर और धीरे-धीरे बदलने वाला माना जाता था. प्रमुख पेंट कंपनियां जहां अपनी हिस्सेदारी बचाने या बढ़ाने के लिए लड़ रही हैं, वहीं एक कम चर्चित सप्लायर चुपचाप इस स्थिति में आ गई है कि विनर कोई भी हो, फ़ायदा उसे ही मिले.

दिग्गजों की जंग

लगभग ₹72,000 करोड़ का भारतीय डेकोरेटिव पेंट्स बाज़ार सबसे तेज़ी से बढ़ती कंज्यूमर इंडस्ट्रीज़ में से एक है. दशकों से एशियन पेंट्स यहां पर दबदबा बनाए हुए है, जिसके पास बाज़ार में आधे से ज़्यादा हिस्सेदारी है. बर्जर पेंट्स, कंसाई नेरोलैक और एकजो नोबेल अगले स्तर पर आते हैं, जबकि इंडिगो पेंट्स एक छोटी लेकिन आक्रामक रूप से चुनौती देने वाली कंपनी है.

लेकिन इस उद्योग में ग्रासिम (अडानी बिड़ला ग्रुप) के ₹10,000 करोड़ से ज़्यादा के भारी निवेश के साथ पेंट बिज़नस लॉन्च करने के साथ खेल काफ़ी हद तक बदल गया. एक साल के अंदर बिड़ला ओपस ने बाज़ार की लगभग 7 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल कर ली है, जिससे एशियन पेंट्स की हिस्सेदारी लगभग 60 प्रतिशत से घटकर क़रीब 52 प्रतिशत रह गई. एक ऐसी इंडस्ट्री में जहां सालों से कंपनियों की लिस्ट स्थिर थी, वहां इतना तेज़ बदलाव लगभग अकल्पनीय था.

JSW पेंट्स ने भी एकजो नोबेल के भारत पेंट बिजनेस (डुलक्स बनाने वाला) को ख़रीदकर अपनी महत्वाकांक्षाओं को बढ़ाया है, जबकि पिडिलाइट और एस्ट्रल ने नए वेंचर्स और अधिग्रहणों के जरिए इस क्षेत्र में एंट्री की है. पेंट उद्योग पर अब चार खिलाड़ियों का एकाधिकार नहीं रहा; ये कई अच्छी फ़ंडिंग वाली कंपनियों का युद्धक्षेत्र बन गया है जो अपना हिस्सा हासिल करने की कोशिशों में लगी हुई हैं.

आंकड़े कहानी बयां करते हैं

इस बढ़ती प्रतिस्पर्धा का नतीजा पेंट कंपनियों के वित्तीय प्रदर्शन में साफ़ दिखता है. क़ीमतों में कटौती, डीलरों को प्रोत्साहन और ज़्यादा मार्केटिंग ख़र्च के चलते मार्जिन पर दबाव बढ़ गया है, हालांकि, वॉल्यूम में मामूली बढ़ोतरी जारी है. शेयर बाज़ार में इस घबराहट की झलक दिखाई है.

यहां देखिए कि टॉप लिस्टेड कंपनियां आज कैसी दिखती हैं:

कंपनी मार्केट कैप (करोड़ ₹ में) 1 साल का रिटर्न P/E 5 साल का मीडियन P/E
एशियन पेंट्स 2,44,413 -18.20% 67.9 76.6
बर्जर पेंट्स 63,547 -4.40% 55.7 67.3
कंसाई नेरोलैक 19,444 -17.60% 17.2 52.9
एकजो नोबेल इंडिया 15,452 -1.10% 38.1 34.1
इंडिगो पेंट्स 5,248 -23.30% 37.1 51.4

इनमें से ज़्यादातर कंपनियां अपनी पांच साल की मीडियन वैल्यूएशन से नीचे ट्रेड कर रही हैं. ये डी-रेटिंग बताती है कि निवेशक कम समय के फ़ायदे के दबावों को लेकर सतर्क हैं. फिर भी, लंबे समय की ग्रोथ के लिहाज़ से अहम माने जाने वाले फ़ैक्टर्स- शहरीकरण, बढ़ती डिस्पोजेबल आय और आवास की मांग- अभी भी अहम बने हुए हैं. मिसाल के तौर पर, एशियन पेंट्स अपनी लीडरशिप बनाए रखने के लिए इनोवेशन, ब्रांडिंग और प्रोडक्ट क्वालिटी में भारी निवेश कर रही है और उम्मीद है कि लंबे समय में ये अपनी जमीन बनाए रखेगी.

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किसे होगा फ़ायदा

भले ही, प्रमुख पेंट कंपनियां सुर्खियों में रहती हैं, लेकिन पर्दे के पीछे एक और कहानी सामने आ रही है. भारत में बिकने वाले हर टिन या बाल्टी पेंट को पैकेज, ट्रांसपोर्ट और प्रोटेक्ट करने की जरूरत होती है. यहीं पर एक निश्चित सप्लायर आता है, जो उपभोक्ताओं को नज़र नहीं आता है.

ये कंपनी पेंट उद्योग को कंटेनर सप्लाई करने में मार्केट लीडर है, जिसके पास लगभग एक चौथाई मार्केट शेयर है. चाहे वो लंबे समय की लीडर हो, नई कंपनी हो या मिड साइज़ की चुनौती देने वाली कंपनी हो, ये सभी प्रमुख पेंट उत्पादकों की सप्लाई चेन के साथ गहराई से जुड़ी हुई है. वास्तव में, एक ही पेंट निर्माता कंपनी इस सप्लायर की बिक्री का लगभग एक तिहाई योगदान देती है और पेंट सेक्टर की इसके रेवेन्यू में कुल मिलाकर 40 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सेदारी है.

इस कंपनी की स्थिति को जो बात अनोखा बनाती है वो ये है कि इसे किसी एक पक्ष को चुनने की जरूरत नहीं है. पेंट में मार्केट शेयर बढ़ाने या गंवाने वाली कोई भी हो, भारत में कुल पेंट वॉल्यूम बढ़ रहा है और ये सप्लायर लगभग सभी खिलाड़ियों को बेचती है. उदाहरण के लिए, भले ही बिड़ला ओपस ने आक्रामक तरीके से उत्पादन बढ़ाया, लेकिन इस खामोश सप्लायर ने उसके कई नए प्लांट्स को कंटेनर सप्लाई करने के ऑर्डर हासिल किए.

पेंट से आगे क्या?

कहानी पेंट के साथ खत्म नहीं होती. पेंट कॉन्ट्रैक्ट्स से मिलने वाले स्थिर कैश फ्लो का इस्तेमाल करके, कंपनी अब ऊंची ग्रोथ, ज़्यादा मार्जिन वाले सेक्टरों में विस्तार कर रही है. फूड, FMCG  और यहां तक कि फार्मास्यूटिकल्स अब इसके रेवेन्यू में अहम योगदान दे रहे हैं. ये कैटेगरी पेंट से कहीं ज़्यादा तेज़ी से बढ़ रही है और बड़ी बात ये है कि वे बेहतर प्रॉफ़िटेबिलिटी प्रदान करती हैं.

कंपनी ने एंटी-काउंटरफिट फ़ीचर्स को शामिल करके और प्रमुख कंज्यूमर ब्रांड्स के साथ लंबी अवधि के मज़बूत रिश्ते बनाकर प्रोडक्ट इनोवेशन को भी बढ़ावा दिया है. इन-हाउस डिज़ाइन और मैन्युफैक्चरिंग क्षमता इसे लागत में फ़ायदा और अपनी जैसी दूसरी कंपनियों की तुलना में तेज़ टर्नअराउंड देती है.

नतीजतन, मार्जिन लगातार सुधरे हैं, ऑपरेटिंग प्रॉफ़िट प्रति यूनिट लगातार बढ़ रहा है. हाल के वर्षों में, इसने 20 प्रतिशत से ज़्यादा का रिटर्न रेशियो हासिल किया है, जो एक मध्यम आकार के मैन्युफैक्चरिंग बिज़नस के लिए उल्लेखनीय उपलब्धि है.

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निवेशक का नज़रिया

निवेशकों के लिए, पेंट की जंग दो मुख्य सवाल उठाती है. एक, इस उथल-पुथल के बाद कौन-सी पेंट कंपनी मज़बूत निकलेगी? और दूसरा, मार्केट शेयर की कड़ी लड़ाई के जोखिम के बिना पेंट की ढांचागत ग्रोथ से फ़ायदा उठाने के तरीक़े क्या हैं?

यहीं पर ये खामोश सप्लायर आकर्षक बन जाती है. ये नई कंपनी होने के जोखिम को प्रभावी ढंग से अपने लिए अवसर में बदल देती है. उत्पादित होने वाले हर नया गैलन पेंट, चाहे वो एशियन पेंट्स, बर्जर, बिड़ला या JSW द्वारा हो, उसके प्रोडक्ट्स की ज़्यादा मांग पैदा करता है. और गैर-पेंट पैकेजिंग में इसके डाइवर्सिफ़िकेशन का मतलब है कि ये सिर्फ़ एक सेक्टर पर ज़्यादा निर्भर नहीं है.

कई मायनों में, ये कंपनी चुपचाप पृष्ठभूमि में कंपाउंडिंग कर रही है जबकि निवेशक सुर्खियां बटोरने वाली पेंट जंग पर फ़ोकस्ड हैं. ये उस तरह की अनदेखी ग्रोथ स्टोरी का प्रतिनिधित्व करती है जो समय के साथ सबसे ज़्यादा फ़ायदेमंद नतीजे देती है.

हमारा नज़रिया

वैल्यू रिसर्च स्टॉक एडवाइज़र में, हम ऐसे अवसरों पर क़रीब से नज़र रखते हैं. भले ही, दिग्गज पेंट कंपनियां लंबी अवधि की सफल कहानियां बनी हुई हैं, जिनमें से एक खिलाड़ी अभी भी हमारी रेकमंडेशन में ख़ास स्थान रखता है, पेंट उद्योग का खामोश सप्लायर अब हमारे एग्रेसिव ग्रोथ पोर्टफ़ोलियो में जगह पा चुका है. इसकी मार्केट लीडरशिप, ग्रोथ की कई लहरों पर सवार होने की क्षमता और मजबूत निष्पादन इसे उन लंबे समय के निवेशकों के लिए रोमांचक विकल्प बनाता है जो आगे देखने को तैयार हैं.

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Disclaimer: यह कंटेंट सिर्फ़ जानकारी के लिए है और इसे निवेश सलाह या रेकमेंडेशन नहीं मानना चाहिए.

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