फंड वायर

इस 5-स्टार मिड-कैप फ़ंड का साइज़ 10 साल में 7 गुना क्यों हुआ?

आइए जानें कि इस मिड-कैप फ़ंड ने लॉन्ग-टर्म में कैसा प्रदर्शन किया है

क्यों इस 5-स्टार मिड-कैप फ़ंड का साइज़ 10 साल में 7 गुना बढ़ा?Anand Kumar/AI-Generated Image

सारांशः इस आर्टिकल में हम इस बात का गहराई से एनालेसिस करेंगे कि इसने कितनी बार वक़ाई मज़बूत रिटर्न दिया है, क्या ये सच में अपने बेंचमार्क से बेहतर प्रदर्शन करता है और जब मार्केट गिरता-उठता है तो ये उसके मुक़ाबले कैसा चलता है. साथ ही, पोर्टफ़ोलियो में सबसे ज़्यादा वज़न रखने वाले पांच शेयरों पर भी नज़र डालेंगे.

HDFC Mid Cap Fund धीरे-धीरे एक दिग्गज बन गया है. क़रीब ₹84,000 करोड़ नेट एसेट के साथ ये अब भारत का सबसे बड़ा मिड-कैप फ़ंड है, जो 10 साल पहले की तुलना में लगभग 7 गुना बड़ा है. बात सिर्फ़ साइज़ की नहीं है, इस फ़ंड को वैल्यू रिसर्च से 5-स्टार रेटिंग भी मिली है.

तो सवाल ये उठता है, “निवेशकों ने इस स्कीम में इतना पैसा क्यों लगाया है?”

इसका छोटा सा जवाब है: परफ़ॉर्मेंस!

रिटर्न की कहानी

HDFC Mid Cap Fund ने पिछले 3, 5 और 10 सालों में क्रमशः 25.79% (कैटेगरी में तीसरा), 29.61% (पांचवां) और 19% (छठा) सालाना रिटर्न दिया है.

लेकिन इसका असल फ़ायदा SIP निवेशकों को मिला है. 10 सालों में SIP रिटर्न (XIRR) 21.18% रहा है. यानी, 10 साल पहले ₹10,000 की मंथली SIP शुरू की होती, तो आज उसकी वैल्यू लगभग ₹36.7 लाख होती.

इन आंकड़ों से जाहिर होता है कि इसकी एसेट इतनी तेज़ी से क्यों बढ़ी है. पर कहानी यहीं नहीं खत्म होती. अब आगे इसके ट्रेलिंग रिटर्न पर ग़ौर करते हैं.

रोलिंग रिटर्न क्यों ज़रूरी है

ट्रेलिंग रिटर्न - आमतौर पर 3, 5 या 10 साल की तस्वीर होती है. पर ये तस्वीर हमेशा सही नहीं होती. ये पूरी तरह शुरू और ख़त्म की तारीख़ पर टिकी होती है.

इसीलिए अनुभवी निवेशक रोलिंग रिटर्न की ओर रुख़ करते हैं. ये हर संभव पीरियड का हिसाब देता है और बताता है कि फ़ंड के प्रदर्शन में कितना स्थायित्व रहा है.

इसलिए, HDFC Mid Cap के लिए हमने पिछले 5 सालों में हर दिन से शुरू होने वाले 5-साल के रिटर्न देखे. नतीजे कुछ ऐसे रहे:

  • सिर्फ़ 5.6% मौक़ों पर ही HDFC Mid Cap निवेशकों को 0–10% का रिटर्न मिला.
  • लगभग 36.3% मौक़ों पर 5 साल का रिटर्न 10–15% के बीच रहा.
  • क़रीब 19.8% मौक़ों पर, फ़ंड ने 15–20% के बीच रिटर्न दिया.
  • और सबसे ख़ास बात ये है कि 38.3% से ज़्यादा मौक़ों पर, 5 साल के दौरान निवेशकों को 20% से ज़्यादा सालाना रिटर्न मिला.

ये आख़िरी आंकड़ा ग़ौर करने लायक़ है. यानी, सभी 5 वर्ष की अवधियों में से एक-तिहाई से ज़्यादा मौक़ों पर धैर्यवान निवेशकों को बहुत ऊंचे रिटर्न मिले.

बेशक, ये एकतरफ़ा रास्ता नहीं रहा है. रोलिंग रिटर्न के आधार पर, ये फ़ंड अपने बेंचमार्क (Nifty Midcap 150 TRI) को सिर्फ़ 30% मौक़ों पर ही मात दे पाया है. लेकिन पूरे कैलेंडर ईयर में देखें तो पिछले 10 में से 7 साल ये आगे रहा.

तेज़ी को भुनाया, गिरावट में दिया सहारा

ये फ़ंड न सिर्फ़ ऊपरी स्तर पर टिकता है, बल्कि गिरावट में भी नुक़सान को कम करता है.

अपसाइड कैप्चर रेशियो को ही लीजिए. 114.1 के स्तर का मतलब है कि जब मिड-कप इंडेक्स (BSE 150 Midcap TRI) 10% ऊपर जाता है, तो फ़ंड औसतन 11.4% ऊपर गया है.

फ़ंड का डाउनसाइड कैप्चर रेशियो 82.2 है. यानी, जब इंडेक्स 10% गिरता है, तो फ़ंड सिर्फ़ 8.2% ही गिरता है. यानि इसका नुक़सान बाज़ार से कम रहा है.

बाक़ी मिड-कैप फ़ंड्स की तुलना में भी, HDFC Mid Cap का सफ़र सहज रहा है. पिछले 3 सालों में इसके उतार-चढ़ाव (स्टैंडर्ड डिविएशन द्वारा मापे हए) 13.85% रहे, जबकि औसत मिड-कैप फ़ंड के लिए ये आंकड़ा 15.5% रहा. आसान शब्दों में, स्टैंडर्ड डिविएशन बताता है कि रिटर्न कितना ऊपर-नीचे होता है. कम नंबर का मतलब स्थिर, ज़्यादा नंबर मतलब ज़्यादा उतार-चढ़ाव आया है.

कुल मिलाकर यही एक्टिव मैनेजमेंट की पहचान है: मार्केट चढ़े तो ज़्यादा कमाओ, गिरे तो तो बेंचमार्क से कम नुक़सान हो.

पोर्टफ़ोलियो पर एक नज़र

भले ही Nifty Midcap 150 का P/E रेशियो 32.7 है, लेकिन फ़ंड की होल्डिंग्स जुलाई 2025 तक अर्निंग्स की तुलना में 26.3 गुना पर ट्रेड कर रही हैं. वैल्यूएशन में ये सहारा मायने रखता है, ख़ासकर अब जब मिड-कैप को लेकर एक्सपर्ट वैल्यूएशन ज़्यादा होने की बात कर रहे हैं.

सेक्टर-वार ये जहां ओवरवेट है:

  • फ़ाइनेंशियल (24.1% बनाम 20.4% एवरेज)
  • कंज़्यूमर डिस्क्रेशनरी (14.6% बनाम 12.5%)
  • टेक्नॉलॉजी (13.1% बनाम 11.2%)

टॉप होल्डिंग्स में Max Financial, Balkrishna Industries, Coforge, The Federal Bank और Ipca Labs हैं.

HDFC Mid Cap में किसे निवेश करना चाहिए?

मिड-कैप फ़ंड हर किसी के लिए नहीं है.

अगर आप इक्विटी निवेश में नए हैं, तो बाज़ार की गिरावट आपकी हिम्मत तोड़ देगी, आपके भरोसे की परीक्षा ले सकती है. इसके अलावा, आपको कम से कम सात से 10 साल तक निवेश में बने रहना होगा.

ऐसे निवेशकों के लिए SIP सबसे अच्छा विकल्प है. इससे एंट्री पॉइंट्स आसान होता है, ये आपको उतार-चढ़ाव को सहने योग्य बनाते हैं और कंपाउंडिंग से धैर्य का फ़ायदा देते है.

क्या आपको इस 5-स्टार फ़ंड को पोर्टफ़ोलियो में शामिल करना चाहिए?

फ़ंड का रिकॉर्ड अपने आप में सब कुछ बयां करता है. लेकिन सिर्फ़ रेटिंग या पिछले रिटर्न के पीछे मत भागिए. असली सवाल ये है कि क्या ये फ़ंड आपके पोर्टफ़ोलियो, गोल और रिस्क उठाने की क्षमता के अनुकूल है?

वैल्यू रिसर्च फ़ंड एडवाइज़र आपको यही समझने में मदद करता है. हमारे एनालिस्ट सिर्फ़ स्टार रेटिंग नहीं देखते. हम देखते हैं रिस्क-एडजस्टेड रिटर्न, फ़ंड मैनेजर की स्किल और क्या ये आपके मौजूदा निवेश के अनुरूप है.

इसलिए देश के सबसे बड़े मिड-कैप फ़ंड में निवेश करने की जल्दबाज़ी करने से पहले, ये पक्का करें कि ये आपके लिए फ़ंड सही है या नहीं.

आज ही वैल्यू रिसर्च फ़ंड एडवाइज़र को एक्सप्लोर करें!

ये भी पढ़ें: 10 साल में 6 गुना रिटर्न देने वाले म्यूचुअल फ़ंड्स कौन-से हैं?

Disclaimer: यह कंटेंट सिर्फ़ जानकारी के लिए है और इसे निवेश सलाह या रेकमेंडेशन नहीं मानना चाहिए.

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