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सारांशः एक साल से SIP में निवेश कर रहे हैं और पोर्टफ़ोलियो ठहरा हुआ है? ये अपनी तरह की अकेली कहानी नहीं है. 2024 के दौरान शुरुआत करने वाले हज़ारों निवेशक आज यही सवाल पूछ रहे हैं. पर फ़ंड या मार्केट को दोष देने से पहले, समझिए असल में क्या चल रहा है और अगले एक-दो साल में क्या सुधारा जा सकता है.
एक Reddit यूज़र Wanderer_369 ने हाल ही में लिखा:
“मैंने जुलाई 2024 में निवेश शुरू किया था और मेरा पोर्टफ़ोलियो अब तक गिरावट ही झेल रहा है. शुरू में लगा कि वक़्त के साथ सब ठीक हो जाएगा, लेकिन एक साल से ज़्यादा हो गया - कोई ग्रोथ नहीं. मैं हर महीने ₹15,000 निवेश करता हूं (कभी-कभी SIP रुकी भी है). मैं हाई-रिस्क इन्वेस्टर हूं और 10-15 साल तक निवेशित रहने का प्लान है. तो मैं कहां ग़लत हूं?”
ये सवाल नया नहीं है. बहुत से नए निवेशक SIP बड़ी उम्मीदों के साथ शुरू करते हैं, पर एक साल बाद जब रिटर्न लगभग शून्य दिखते हैं, तो हैरानी होती है. आइए समझते हैं कि असल में क्या हो रहा है और आगे क्या करना चाहिए, और क्या नहीं?
1. मार्केट खुद कहीं नहीं गया
SIP या फ़ंड्स को दोष देने से पहले बड़ी तस्वीर देखिए. जुलाई 2024 से अब तक (अक्तूबर 2025), निफ़्टी 500, जो लगभग पूरे शेयर बाज़ार का प्रतिनिधित्व करता है, बस क़रीब 2% ही ऊपर गया है.
यानि औसतन मार्केट ने कोई ख़ास बढ़त दी ही नहीं. अगर आपका SIP पोर्टफ़ोलियो एक साल में लगभग 1% ऊपर है, तो ये कमज़ोर प्रदर्शन नहीं बल्कि मार्केट की सच्चाई है.
नतीजा: जब मार्केट उतार-चढ़ाव के दौर में चलता है, तब अच्छे फ़ंड भी ठहरे हुए दिखते हैं. SIP की असली ताक़त ऐसे समय में बनती है - जब वो लगातार यूनिट जमा करती रहती है, ताकि अगली बढ़त के दौर में वही यूनिट काम आएं.
2. एक साल SIP को परखने के लिए बहुत छोटा वक़्त है
डेढ़ साल भावनात्मक रूप से लंबा लग सकता है, पर निवेश की दुनिया में ये बहुत छोटा वक़्त है. SIP महीनों में नहीं, सालों में असर दिखाती है.
वैल्यू रिसर्च का डेटा बताता हैं - कोई फ़ंड अगर लगातार तीन साल अपने बेंचमार्क से पीछे रहता है, तो अगले पांच सालों में भी उसके पिछड़ने की 75% संभावना रहती है. यानी अगर आपका फ़ंड कुछ महीनों या एक साल से कमज़ोर दिख रहा है, तो ये अभी कोई चेतावनी नहीं है. लेकिन अगर तीन साल तक लगातार साथियों और बेंचमार्क से पीछे रहे, तब फिर समीक्षा ज़रूरी है.
ध्यान दें: अपनी SIP को वक़्त दीजिए. धैर्य निवेश की योजना का हिस्सा है.
3. SIP रोकना उसके मक़सद को बिगाड़ देता है
Reddit पोस्ट में निवेशक ने लिखा कि उसने SIP “एक-दो बार रोकी”. वहीं से ग़लती शुरू होती है.
SIP को रुपया-लागत औसत के ज़रिए उतार-चढ़ाव से निपटने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जिसमें आप मार्केट गिरने पर ज़्यादा यूनिट ख़रीदते हैं और बढ़ने पर कम यूनिट ख़रीदते हैं. इस प्रक्रिया को बीच में रोक देना मतलब SIP की असल ताक़त को ही हटा देने के बराबर है.
हमारी गेस्ट कॉलमनिस्ट श्यामली बसु ने अपने एक आर्टिकल में बहुत ही साफ़ तौर बताया है. “अगर 1990 से 2022 के बीच सेंसेक्स के सिर्फ़ 40 सबसे अच्छे दिन भी चूक गए, तो रिटर्न 13.7% से घटकर सिर्फ़ 4.5% रह जाएगा. कल्पना कीजिए, कुछ हफ़्तों मार्केट से बाहर रहकर कितना बड़ा नुकसान हो सकता है.”
SIP की किश्तें छोड़ना उन 'सबसे अच्छे दिनों' को गंवाने जैसा है. छोटी-छोटी चूक आपके लॉन्ग-टर्म रिटर्न पर बड़ा असर डालती हैं.
4. हो सकता है आप उतने हाई-रिस्क इन्वेस्टर नहीं जितना सोचते हैं
Reddit यूज़र ने खुद को हाई-रिस्क इन्वेस्टर कहा. लेकिन अगर मार्केट में हलचल ने उन्हें एक साल में SIP रोकने पर मजबूर किया, तो इसका मतलब उसकी रिस्क उठाने की क्षमता थोड़ी कम है.
ये कोई बुरी बात नहीं है. बस पोर्टफ़ोलियो को थोड़ा संतुलन चाहिए. नए निवेशकों के लिए, जो अभी सीख रहे हैं कि मार्केट के उतार-चढ़ाव पर उनकी प्रतिक्रिया कैसी होती है, एग्रेसिव हाइब्रिड फ़ंड से शुरुआत करना ज़्यादा समझदारी है.
एग्रेसिव हाइब्रिड फ़ंड 65-80% हिस्सा शेयरों में और बाक़ी बॉन्ड जैसे डेट इंस्ट्रूमेंट्स में लगाते हैं. ये डेट हिस्सा तब काम आता है जब मार्केट गिरता है, ताकि निवेशक बिना घबराए निवेश जारी रख सके.
आंकड़े भी यही बताते हैं - पिछले दस साल में जब सेंसेक्स 5% से ज़्यादा गिरा, तब एग्रेसिव हाइब्रिड फ़ंड्स ने फ़्लेक्सी-कैप या स्मॉल-कैप फ़ंड्स के मुक़ाबले कम गिरावट दिखाई.
तो अगर मार्केट का साइकल नया लग रहा है, तो शुरुआत एग्रेसिव हाइब्रिड फ़ंड से करें. औसतन, इन फ़ंड्स ने पांच साल में 17.3% और दस साल में 11.9% सालाना रिटर्न दिए हैं.
5. बहुत ज़्यादा फ़ंड्स पोर्टफ़ोलियो को बिखेर देते हैं
| फ़ंड का नाम | मंथली SIP | निवेश की रक़म | मौजूदा वैल्यू |
|---|---|---|---|
| SBI स्मॉल-कैप 250 इंडेक्स | ₹ 2,000 | ₹ 28,990 | ₹ 28,880 |
| ज़ेरोधा लार्ज-मिडकैप 250 इंडेक्स | ₹ 1,000 | ₹ 11,990 | ₹ 12,480 |
| क्वांट मिड-कैप | ₹ 2,000 | ₹ 28,990 | ₹ 27,450 |
| HDFC मिड-कैप | ₹ 2,000 | ₹ 22,990 | ₹ 24,360 |
| HDFC स्मॉल-कैप | ₹ 1,000 | ₹ 12,990 | ₹ 13,580 |
| क्वांट मल्टी-कैप | ₹ 1,000 | ₹ 15,990 | ₹ 15,250 |
| HDFC इंफ़्रास्ट्रक्चर | ₹ 2,000 | ₹ 25,990 | ₹ 26,630 |
| क्वांट टैक्स सेवर | ₹ 2,000 | ₹ 21,990 | ₹ 22,540 |
| निप्पॉन इंडिया मिड-कैप ग्रोथ | ₹ 1,000 | ₹ 13,000 | ₹ 13,600 |
| SBI टैक्स सेवर | ₹ 1,000 | ₹ 13,000 | ₹ 13,290 |
Reddit पोस्ट के मुताबिक़, ₹15,000 हर महीने 10 म्यूचुअल फ़ंड्स में निवेश किया जा रहा है. ये बहुत ज़्यादा है.
इस समय, जब SIP की रक़म बहुत बड़ी नहीं है और निवेशक अभी शुरुआत में है, तो 2-3 फ़ंड काफ़ी हैं:
- एक एग्रेसिव हाइब्रिड फ़ंड (स्थिरता के लिए)
- एक फ़्लेक्सी-कैप या मल्टी-कैप फ़ंड (डायवर्सिफ़िकेशन के लिए)
- अगर चाहें, तो एक लार्ज-कैप इंडेक्स फ़ंड (कम लागत वाले एक्सपोज़र के लिए)
बहुत ज़्यादा फ़ंड रखना वही ग़लती है जिसे निवेशक पीटर लिंच ने “बेवजह डायवर्सिफ़िकेशन (diworsification)” कहा था.
जब ऐसा होता है, तो नतीजे कुछ यूं होते हैं :
- एक जैसी कंपनियां कई फ़ंड्स में दोहराई जाती हैं (पोर्टफ़ोलियो ओवरलैप).
- आप समान होल्डिंग्स के लिए (एक्सपेन्स रेशियो) का भुगतान करते हैं.
- ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है. आप ये नहीं बता सकते कि कौन सा फ़ंड असल में वैल्यू जोड़ रहा है. ख़ासकर अगर वो फ़ंड आपके पोर्टफ़ोलियो का सिर्फ़ पांच से दस प्रतिशत ही हो.
- अगर कई फ़ंड एक ही कंपनी के हैं, तो रणनीति और मैनेजर भी एक जैसे हो सकते हैं
जब ₹15,000 को 10 फ़ंड्स में बांटा जाता है, तो हर एक को सिर्फ़ ₹1,000-₹2,000 मिलते हैं - जो न तो असर डालते हैं, न ट्रैक करना आसान रहता है.
6. स्मॉल-कैप और सेक्टर फ़ंड्स के जाल से बचिए
हमने देखा कि पोर्टफ़ोलियो में तीन मिड और स्मॉल-कैप फ़ंड्स और एक इंफ़्रास्ट्रक्चर फ़ंड है - जो नए निवेशक के लिए बहुत रिस्की है.
भले ही स्मॉल-कैप फ़ंड्स चमकदार रिटर्न दे सकते हैं, लेकिन इसकी दिल दहला देने वाली गिरावट का भी लंबा इतिहास रहा है. 2005 के बाद से स्मॉल-कैप इंडेक्स कई बार 40% से ज़्यादा गिरा है, और कुछ साइकल में वापसी में छह साल लगे हैं.
सेक्टोरल फ़ंड्स (जैसे इंफ़्रास्ट्रक्चर) और भी जोखिम भरे हैं. बुरे सालों में ये ज़्यादा गिरते हैं. दरअसल, ज़्यादातर नकारात्मक सालों में इंफ़्रास्ट्रक्चर फ़ंड्स ने डायवर्सिफ़ाइड इक्विटी फ़ंड्स से भी कमतर प्रदर्शन किया है. (आप इंफ़्रास्ट्रक्चर फ़ंड्स के बारे में यहां और पढ़ सकते हैं.)
हमारा नियम: किसी भी थीम या सेक्टर फ़ंड में अपने पोर्टफ़ोलियो का 5% से ज़्यादा हिस्सा कभी न लगाएं - और तभी लगाएं जब उस सेक्टर को सही मायने में समझते हों.
हमारा नज़रिया
अगर एक साल बाद भी रिटर्न लगभग शून्य हैं, तो ये असफ़लता नहीं - बस अभी वक़्त कम है. मार्केट फ्लैट रहा है, SIP को एवरेज होने का समय नहीं मिला और शायद पोर्टफ़ोलियो बहुत बिखरा हुआ है.
ध्यान रखने के लिए:
- फ़ंड्स को कम से कम तीन साल दीजिए
- SIP को रोकिए मत - निरंतरता ही असली ताक़त है
- कुल मिलाकर तीन फ़ंड से ज़्यादा न रखिए
- सेक्टर या स्मॉल-कैप में ज़्यादा झुकाव से बचिए
लेकिन टैक्स और एग्ज़िट लोड को भूलिए मत. अगर फ़ंड घटाने हैं, तो सोच-समझकर करें:
- एग्ज़िट लोड: ज़्यादातर इक्विटी फ़ंड्स एक साल के अंदर निकलने पर 1% चार्ज करते हैं.
- कैपिटल गेन टैक्स: एक साल से कम निवेश पर 20% टैक्स और एक साल से ज़्यादा पर 12.5% टैक्स, अगर गेन ₹1.25 लाख से ज़्यादा हो.
अगर पोर्टफ़ोलियो को संतुलित करना है, तो उसे चरणों में करें - जैसे दो फ़ाइनेंशियल ईयर में बांटकर, ताकि टैक्स छूट का बेहतर उपयोग हो.
Reddit निवेशक के केस में टैक्स की चिंता नहीं है, क्योंकि गेन ₹1.25 लाख से कम हैं. बस एग्ज़िट लोड पर नज़र रखनी होगी, ख़ासकर उन फ़ंड्स में जो पिछले 12 महीनों में शुरू हुए हैं.
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इसलिए, चाहे आप एक नए निवेशक हों जो एग्रेसिव हाइब्रिड फ़ंड से से शुरुआत कर रहे हों, या कोई व्यक्ति जो लंबे समय के लिए फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड जोड़ना चाहता हो - फ़ंड एडवाइज़र ये पक्का करता है आप सही निवेश करें और सही निवेश बनाए रखें.
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ये लेख पहली बार अक्तूबर 27, 2025 को पब्लिश हुआ.
Disclaimer: यह कंटेंट सिर्फ़ जानकारी के लिए है और इसे निवेश सलाह या रेकमेंडेशन नहीं मानना चाहिए.
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