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सारांशः ये फ़ंड एक दशक से ज़्यादा पुराना है, लेकिन भारत में इसका नाम शायद ही किसी सूची में ऊपर दिखता है. ये देश का सिर्फ़ 18वां सबसे बड़ा फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड है. लेकिन इसके साइज़ को अनदेखा करें, तो कहानी बदल जाती है. रिटर्न और निरंतरता के लिहाज़ से ये पराग पारिख फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड के ठीक बाद खड़ा है. कई मामलों में इसने अपनी कैटेगरी के ज़्यादा चर्चित फ़ंड्स को चुपचाप पीछे छोड़ दिया है. आइए देखें, ये कौन-सा फ़ंड है और इसका लॉन्ग-टर्म रिकॉर्ड कितना मज़बूत है.
कुछ म्यूचुअल फ़ंड्स चुपचाप साल-दर-साल अच्छा काम करते हैं, लेकिन सुर्ख़ियां किसी और को मिलती हैं. JM फ़्लेक्सीकैप फ़ंड ऐसा ही एक नाम है, जो लगातार बेहतर रिटर्न देता रहा पर उसकी चर्चा कभी उतनी नहीं हुई जितनी होनी चाहिए थी.
ये फ़ंड 12 साल से ज़्यादा पुराना है और आज इसके पास 4-स्टार रेटिंग है. लंबे समय में इसके आंकड़े खुद इसकी कहानी बयां करते हैं:
- तीन साल का रिटर्न: फ़्लेक्सी-कैप कैटेगरी में पांचवां स्थान
- पांच साल का रिटर्न: छठा स्थान
- 10 साल का रिटर्न: 18.01% जो पराग पारिख फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड (18.8%) के बाद दूसरा सर्वश्रेष्ठ है
फिर भी, लोकप्रियता के मामले में JM फ़्लेक्सीकैप पीछे है.
इसका एसेट साइज़ ₹6,000 करोड़ से भी कम है, जिससे ये देश का 18वां सबसे बड़ा फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड बनता है. तुलना करें - पराग पारिख फ़्लेक्सी-कैप और HDFC फ़्लेक्सी-कैप क्रमशः ₹1.2 लाख करोड़ और ₹85,500 करोड़ का एसेट मैनेज कर रहे हैं.
तो सवाल साफ़ है - ऐसा मज़बूत फ़ंड अब भी पर्दे के पीछे क्यों है? क्या इसकी परफ़ॉर्मेंस में उतार-चढ़ाव रहा है? या बस पहचान की कमी है?
प्रदर्शन की स्थिरता
तीन या पांच साल के का डेटा हमें पॉइंट-टू-पॉइंट रिटर्न सिर्फ़ ये बताते हैं कि किसी अवधि में फ़ंड ने कितना कमाया, लेकिन ये नहीं दिखाता कि उस दौरान वो कितना स्थिर रहा.
इसीलिए हमने रोलिंग रिटर्न देखे - यानी फ़ंड का रिकॉर्ड हर संभव पांच साल की अवधि में कैसा रहा. ये ठीक वैसा है जैसे किसी छात्र का एक बार नहीं बल्कि हर परीक्षा का रिपोर्ट कार्ड देखा जाए.
उदाहरण के तौर पर, सिर्फ़ एक तय तारीख़ से दूसरी तारीख़ तक 10 फ़रवरी 2020 से 10 फ़रवरी 2025 तक का प्रदर्शन देखने की बजाय हर दिन की पांच साल की अवधि देखी गई - 11 फ़रवरी से 11 फ़रवरी 2025, 12 फ़रवरी से 12 फ़रवरी 2025, और इसी तरह आगे.
इससे पता चलता है कि फ़ंड ज़्यादातर समय अच्छा करता रहा या बस एक-दो साल की किस्मत थी. सीधे शब्दों में, रोलिंग रिटर्न दिखाता है कि फ़ंड कितना स्थिर है - क्या वो बार-बार अच्छा करता है या सिर्फ़ कभी-कभी.
तो जब हमने JM फ़्लेक्सीकैप और देश के चार सबसे बड़े फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड्स के पांच साल के डेली रोलिंग रिटर्न (23 अक्तूबर 2020 से 23 अक्तूबर 2025 तक) निकाले, तो नतीजे कुछ ऐसे रहे:
| फ़ंड | औसत पांच साल का रोलिंग रिटर्न |
|---|---|
| पराग पारिख फ़्लेक्सी-कैप | 21.80% |
| JM फ़्लेक्सीकैप | 19.50% |
| HDFC फ़्लेक्सी-कैप | 18.40% |
| UTI फ़्लेक्सी-कैप | 16.40% |
| Nifty 500 TRI | 16.40% |
| कोटक फ़्लेक्सीकैप | 15.90% |
| नोट: सभी डायरेक्ट प्लान हैं. ये आंकड़े 23 अक्तूबर 2020 से 23 अक्तूबर 2025 के बीच का है. | |
इस तुलना में JM फ़्लेक्सीकैप सिर्फ़ पराग पारिख से पीछे है - बाक़ी सभी चर्चित फ़ंड्स से आगे.
हमने ये भी देखा कि इन फ़ंड्स ने अपने बेंचमार्क Nifty 500 TRI को कितनी बार पीछे छोड़ा.
नतीजे दिलचस्प थे:
- पराग पारिख फ़्लेक्सी-कैप: 100% बार बेहतर
- JM फ़्लेक्सीकैप: 92% बार बेहतर
- HDFC फ़्लेक्सी-कैप: 72%
- UTI फ़्लेक्सी-कैप: 52%
- कोटक फ़्लेक्सीकैप: सिर्फ़ 26% बार बेहतर
यानि JM फ़्लेक्सीकैप ने लगभग हर बार इंडेक्स को पछाड़ा और कई बड़ी कंपनियों से ज़्यादा लगातार प्रदर्शन दिखाया.
ये स्थिरता, अलग-अलग मार्केट साइकल में, JM फ़्लेक्सीकैप को एक कम आंका गया लेकिन मज़बूत खिलाड़ी बनाती है.
थोड़ी ज़्यादा हलचल
हालांकि स्थिरता का मतलब शांत सफ़र नहीं होता. JM फ़्लेक्सीकैप के कम चर्चित रहने की इसकी एक वजह उतार-चढ़ाव भी हो सकती है.
उतार-चढ़ाव जिसे स्टैंडर्ड डेविएशन से मापा जाता है. यानी किसी फ़ंड के रिटर्न औसत से कितने ऊपर-नीचे जाते हैं. बड़ा नंबर मतलब ज़्यादा उतार-चढ़ाव.
पिछले पांच सालों के आंकड़ों के मुताबिक़
| फ़ंड | स्टैंडर्ड डिविएशन |
|---|---|
| पाराग पारिख फ़्लेक्सी-कैप | 10.60% |
| कोटक फ़्लेक्सीकैप | 13.60% |
| HDFC फ़्लेक्सी-कैप | 14.30% |
| UTI फ़्लेक्सी-कैप | 14.70% |
| JM फ़्लेक्सीकैप | 15.80% |
आंकड़े साफ़ हैं: JM फ़्लेक्सीकैप इस लिस्ट में सबसे ज़्यादा उतार-चढ़ाव वाला रहा है. यानी इसके रिटर्न ऊपर-नीचे तेज़ी से होते हैं.
पर उतार-चढ़ाव हमेशा बुरा नहीं होता. अगर फ़ंड मार्केट की बढ़त का ज़्यादा हिस्सा पकड़ पाए.
यहीं अपसाइड रेशियो और डाउनसाइड रेशियो अहम बनते हैं.
- अपसाइड रेशियो बताता है कि जब मार्केट बढ़ता है, फ़ंड कितना बढ़ता है. उदाहरण के लिए, अगर अपसाइड रेशियो 120 है, तो मार्केट के 10% बढ़ने पर फ़ंड औसतन 12% बढ़ेगा.
- डाउनसाइड रेशियो बताता है कि जब मार्केट गिरता है, फ़ंड कितना गिरता है.
ज़्यादा अपसाइड रेशियो और संतुलित डाउनसाइड रेशियो वाले फ़ंड्स उतार-चढ़ाव को सही ढंग से संभालते हैं.
अब ये तुलना देखें:
| फ़ंड | अपसाइड रेशियो | डाउनसाइड रेशियो |
|---|---|---|
| JM फ़्लेक्सीकैप | 121 | 85.5 |
| HDFC फ़्लेक्सी-कैप | 114.3 | 62.7 |
| कोटक फ़्लेक्सीकैप | 92.5 | 89 |
| UTI फ़्लेक्सी-कैप | 77.9 | 99.5 |
| पाराग पारिख फ़्लेक्सी-कैप | 77.7 | 90.4 |
JM फ़्लेक्सीकैप का अपसाइड रेशियो सबसे ऊंचा है. यानी मार्केट की बढ़त में ये सबसे ज़्यादा फ़ायदा उठाता है.
डाउनसाइड रेशियो मध्यम है, जो इसके थोड़े ज़्यादा उतार-चढ़ाव को समझाता है. लेकिन यही कारण है कि लंबे समय में इसका प्रदर्शन इतना मजबूत दिखता है.
सीधे शब्दों में, JM फ़्लेक्सीकैप मार्केट की रैलियों में तेज़ दौड़ता है, भले ही कभी-कभी गिरावट में थोड़ी चोट खा जाए.
क्या JM फ़्लेक्सीकैप फ़ंड में निवेश करना चाहिए?
JM फ़्लेक्सीकैप का लॉन्ग-टर्म रिकॉर्ड मज़बूत है. साथ ही, इसका एक्सपेंस रेशियो भी बेहद कम है - सिर्फ़ 0.54% (डायरेक्ट प्लान).
लेकिन हर समझदार निवेशक जानता है कि पिछला प्रदर्शन भविष्य की गारंटी नहीं होता. मार्केट हमेशा बदलता रहता है.
अगर फ़्लेक्सी-कैप कैटेगरी पर नज़र डाल रहे हैं, तो शुरुआत वैल्यू रिसर्च रेटिंग से करें. जो सिर्फ़ रिटर्न नहीं, बल्कि रिस्क-एडजस्टेड परफ़ॉर्मेंस के आधार पर तय होती हैं.
ये रेटिंग्स भरोसेमंद फ़ंड की पहचान करने के लिए एक अच्छी शुरुआत हैं..
और अगर निवेश को अपने लक्ष्यों और जोखिम झुकाव के हिसाब से दिशा देना चाहते हैं, तो वैल्यू रिसर्च फ़ंड एडवाइज़र ज़रूर एक्सप्लोर करें. ये सिर्फ़ अच्छे फ़ंड रेकमेंड नहीं करता बल्कि आपके लिए एक समझदार और संतुलित पोर्टफ़ोलियो तैयार करता है. जहां एक्सपर्ट्स की गाइडेंस से एलोकेशन, रिबैलेंसिंग और लॉन्ग-टर्म वेल्थ की योजना तय होती है.
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Disclaimer: यह कंटेंट सिर्फ़ जानकारी के लिए है और इसे निवेश सलाह या रेकमेंडेशन नहीं मानना चाहिए.
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