Aditya Roy/AI-Generated Image
एक छोटी-सी सच्चाई से शुरुआत करते हैं-हममें से ज़्यादातर लोगों के पास कोई “पोर्टफ़ोलियो” नहीं होता. हमारे पास होता है, “जो-जो सालों के दौरान ख़रीद लिया.” कहीं एक फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड, कहीं पुराना ELSS, किसी दोस्त का सुझाया स्मॉल-कैप, किसी सेक्टर फ़ंड में देशभक्ति के जोश में किया निवेश-और देखते ही देखते हमारे पास 11 म्यूचुअल फ़ंड और दो-तीन शेयर हो जाते हैं जिन्हें हम भावनात्मक कारणों से होल्ड रखते हैं. मज़ेदार बात ये है कि कई फ़ाइनेंशियल एडवाइज़र्स इस गड़बड़ी को नापसंद करते हैं-आपकी वजह से नहीं, बल्कि इसलिए कि इससे उन्हें कम उपयोगी दिखने का डर होता है. इसलिए वे अपनी “वैल्यू” दिखाने के लिए आपको बार-बार बेचने पर मजबूर करते हैं-“चलो, इसे बेच देते हैं”, “इसे रोटेट करते हैं”, “ये अलाइन्ड नहीं है.” सुनने में प्रोफ़ेशनल लगता है, सबको व्यस्त रखता है, लेकिन कंपाउंडिंग के लिए बहुत कम काम करता है. अब मैं इसका ठीक उल्टा कहूंगा.
ये लेख पहली बार नवंबर 03, 2025 को पब्लिश हुआ.
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