
सारांशः इस साल भले ही विदेशी पोर्टफ़ोलियो निवेशक (FPIs) लगातार बिक़वाली कर रहे हों, लेकिन कुछ चुनिंदा शेयर अब भी ग्लोबल दिग्गजों का भरोसा जीत रहे हैं. दो मिड-कैप शेयर ऐसे हैं जो Goldman Sachs और Nomura दोनों की ख़रीद लिस्ट में शामिल हैं. ये एक ऐसा संकेत है जो निवेशकों के लिए बेहद ज़रूरी हैं.
विदेशी निवेशक भले ही इस साल भारतीय इक्विटी मार्केट से पैसा निकाल रहे हों, लेकिन वो री तरह से इससे दूर नहीं जा रहे हैं. ऐसे समय में जब विदेशी पोर्टफ़ोलियो निवेशक (FPIs) ने ₹1.52 लाख करोड़ की बिक़वाली की है. पिछले 10 महीनों में से छह में वे नेट सेलर रहे हैं. इसके बावजूद दो ग्लोबल फ़ंड मैनेजर्स - Goldman Sachs और Nomura Asset Management - दो मिड-कैप शेयरों में भरोसा बनाए हुए हैं, जिनमें दोनों की हिस्सेदारी 1% से ज़्यादा है. ये जानकारी Finology Ticker के आंकड़ों से सामने आई है.
जब दो बड़े विदेशी निवेशक किसी कंपनी में एक साथ हिस्सेदारी रखते हैं, तो उस पर नज़र डालना ज़रूरी हो जाता है. आइए जानते हैं कौन-से ये दो मिड-कैप शेयर हैं जो दोनों की पसंद बने हुए हैं, और क्यों ये आपके वॉचलिस्ट में जगह पा सकते हैं.
1) Amber Enterprises: भारत की मैन्युफ़ैक्चरिंग कहानी
सितंबर 2025 (Q2 FY26) तक Goldman Sachs India Equity Portfolio के पास Amber Enterprises में 1.67% हिस्सेदारी थी - यानी 5.86 लाख शेयर जिनकी क़ीमत लगभग ₹411 करोड़ है. Nomura India Investment Fund ने हाल ही में इसमें एंट्री ली है, 1.07% हिस्सेदारी यानी 3.76 लाख शेयर ₹264 करोड़ के मूल्य पर खरीदे हैं.
Amber भारत की मैन्युफ़ैक्चरिंग ग्रोथ और बढ़ती कूलिंग डिमांड, दोनों ट्रेंड्स का हिस्सा है. कंपनी लगभग हर बड़ी एयर कंडीशनर ब्रांड के लिए एसी और उसके कंपोनेंट्स बनाती है. स्प्लिट और विंडो AC से लेकर कंप्रेसर, मोटर और हीट एक्सचेंजर तक - Amber भारत के रूम एसी मार्केट का लगभग 24% हिस्सा संभालती है.
समय के साथ कंपनी ने इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफ़ैक्चरिंग में भी प्रवेश किया है - ये कंज़्यूमर और इंडस्ट्रियल डिवाइसेज़ के लिए सर्किट बोर्ड असेंबल करती है और रेलवे व डिफ़ेंस सेक्टर को HVAC सिस्टम और पार्ट्स सप्लाई करती है. 30 फ़ैक्ट्रियों के साथ Amber का पैमाना और उत्पादन क्षमता इसे बढ़त देती है, ख़ासकर जब वैश्विक निर्माता भारत को “Make in India” हब के रूप में देख रहे हैं.
2) Five-Star Business Finance: छोटे उद्यमियों पर दांव
दूसरी कंपनी बिल्कुल अलग क्षेत्र की है. Goldman Sachs के पास चेन्नई-आधारित NBFC फाइव-स्टार बिज़नेस फ़ाइनांस में 1.18% हिस्सेदारी है - यानी 34.6 लाख शेयर, क़ीमत ₹219 करोड़. Nomura के पास 2.06% हिस्सेदारी यानी 60.5 लाख शेयर ₹383 करोड़ के मूल्य पर हैं.
इन दोनों के अलावा कंपनी के निवेशकों में Government Pension Fund of Norway (1.44%) और Fidelity India Focus Fund (2.61%) भी शामिल हैं, जिससे इसकी विदेशी निवेशकों के बीच बढ़ती लोकप्रियता का पता चलता है.
Five-Star Business Finance ऐसे ग्राहकों को लोन देती है जिन्हें पारंपरिक बैंकिंग सिस्टम अक्सर नज़रअंदाज़ करता है - छोटे दुकानदार, व्यापारी और सेमी-अर्बन या ग्रामीण इलाक़ों के स्वरोज़गार वाले लोग.
कंपनी के औसत लोन ₹3–4 लाख के आसपास होते हैं, जो ज़मीन या घर जैसी संपत्तियों के ज़रिए सिक्योर्ड किए जाते हैं. ₹25,000–40,000 महीने की कमाई वाले ग्राहकों के लिए ये पूंजी का एकमात्र स्रोत होता है.
ये फ़ोकस्ड मॉडल कंपनी को दक्षिण भारत के सबसे तेज़ी से बढ़ते लेंडर्स में से एक बनाता है. Q2 FY26 में इसका AUM (एसेट अंडर ) ₹12,850 करोड़ तक पहुंच गया, जो साल-दर-साल 18% की ग्रोथ है. मुनाफ़ा मज़बूत रहा है, हालांकि बुरे कर्ज़ (gross NPA) बढ़कर 2.64% हो गए हैं, जो एक साल पहले 1.47% थे.
ग्लोबल निवेशक भारत में क्या देख रहे हैं
Goldman Sachs और Nomura दोनों भारत को दुनिया के सबसे आकर्षक लंबे समय के बाज़ारों में से एक मानते हैं. Goldman को “छोटी और शुरुआती कंपनियों के सस्ते वैल्यूएशन” में संभावनाएं दिखती हैं, जबकि Nomura भारत को “एक बड़ी और तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था” मानता है, जहां बाज़ार की असमानता एक्टिव मैनेजर्स के लिए मौक़े पैदा करती है.
साधारण शब्दों में कहें, तो भारत की व्यापकता और तुलनात्मक रूप से असंतुलित बाज़ार संरचना उन निवेशकों के लिए बेहतर मौक़े देती है जो लंबे समय तक टिके रह सकते हैं और शुरुआती दौर में ही अच्छे बिज़नेस की पहचान कर पाते हैं.
Amber और Five-Star अलग-अलग क्षेत्रों में काम करती हैं, लेकिन दोनों एक साझा धारा से जुड़ी हैं - भारत की घरेलू ग्रोथ इंजन: मैन्युफ़ैक्चरिंग और स्मॉल बिज़नेस क्रेडिट.
निवेशकों के लिए संकेत
सिर्फ़ इसलिए कि कोई स्टॉक ग्लोबल फ़ंड मैनेजरों के पोर्टफ़ोलियो में शामिल है, इसका मतलब ये नहीं कि वो ऑटोमेटिक रूप से ‘बाय’ बन जाए. संस्थागत निवेशक अपने अलग उद्देश्यों, डाइवर्सिफ़िकेशन ज़रूरतों और समय सीमा के हिसाब से निवेश करते हैं.
इसलिए ऐसे नामों को एक संकेत के रूप में देखें, न कि रेकमेंडेशन के तौर पर. ये बताते हैं कि ग्लोबल स्मार्ट मनी भारत में कहां निवेश कर रही है लेकिन ये तय नहीं करते कि आपको क्या करना चाहिए.
कौन-से भारतीय म्यूचुअल फ़ंड्स के पास हैं ये शेयर?
अगर आप जानना चाहते हैं कि कौन-से भारतीय म्यूचुअल फ़ंड्स इन दोनों कंपनियों में निवेशित हैं, तो वैल्यू रिसर्च के इस स्टॉक में किन फ़ंड्स का निवेश है? टूल का इस्तेमाल करें. बस शेयर का नाम डालें और आपको उन सभी स्कीम्स की पूरी लिस्ट मिल जाएगी जिनके पास इन कंपनियों की हिस्सेदारी है.
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