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क्या Nifty 500 में निवेश से पूरे बाज़ार में मिलता है एक्सपोज़र? जानिए हकीक़त

क्यों ये ब्रॉड-मार्केट इंडेक्स न तो स्पष्टता प्रदान करता है और न पूरी भागीदारी

क्या Nifty 500 में निवेश से पूरे बाज़ार में मिलता है एक्सपोज़र? जानिए हकीक़तAman Singhal/AI-Generated Image

सारांशः ये कहानी बताती है कि भले ही Nifty 500 पूरे बाज़ार का इंडेक्स दिखता है, पर असल में ये ज़्यादातर लार्ज-कैप से प्रभावित होता है. लेकिन ऐसा क्यों होता है, ये बात उन लोगों के लिए मायने रखती है जो सच में पूरे बाज़ार में एक्सपोज़र चाहते हैं.

कई निवेशकों को एक ही झटके में पूरे बाज़ार में निवेश करने का विचार पसंद आता है. Nifty 500 इसके लिए एकदम सही लगता है. आप इसमें SIP शुरू करते हैं और आपको लार्ज-कैप, मिड-कैप और स्मॉल-कैप सभी में एक्सपोज़र मिलता है. काग़ज़ पर ये भारत के पूरे इक्विटी बाज़ार में निवेश करने का आसान तरीक़ा लगता है.

लेकिन जैसे ही आप थोड़ा गहराई से देखते हैं, Nifty 500 एक थोड़े से सीमित लार्ज-कैप फ़ंड जैसा लगने लगता है. इससे ब्रॉड-मार्केट में भागीदारी का भरोसा मिलता है, पर इसका असली व्यवहार कुछ और ही कहानी बयां करता है.

नाम में ब्रॉड, पर असल में लार्ज-कैप का असर ज़्यादा

भले ही Nifty 500 में कई सेगमेंट की कंपनियां हैं, पर ज़्यादातर लार्ज-कैप ही इसका व्यवहार तय करती हैं. पिछले तीन साल में Nifty 500 में औसतन 73% हिस्सा लार्ज-कैप का रहा. मिड और स्मॉल-कैप मौजूद तो हैं, पर उनका असर इतना कम है कि इंडेक्स की दिशा बदलने में उनकी भूमिका बहुत छोटी है.

ये अपने आप में समस्या नहीं है. लेकिन अगर आप मिड और स्मॉल-कैप के अलग स्वभाव का फ़ायदा लेना चाहते हैं, तो Nifty 500 में इनका इतना कम हिस्सा काफ़ी नहीं है.

ये बात तब और साफ़ होती है जब आप इसकी तुलना उन पोर्टफ़ोलियो से करते हैं जहां लार्ज–मिड–स्मॉल का एलोकेशन सोचकर किया गया हो.

इसी अंतर को समझने के लिए हमने एक लॉन्ग-टर्म SIP की तुलना की. एक वर्ज़न में पूरा पैसा Nifty 500 में गया. बाकी वर्ज़न में वही SIP Nifty 100, Nifty Midcap 150 और Nifty Smallcap 250 में अलग-अलग रेशियो में बांटी गई. पहली टेबल - जो इस पैराग्राफ़ के नीचे है - इन रेशियो को लार्ज:मिड:स्मॉल के रूप में दिखाती है.

DIY पोर्टफ़ोलियो ने Nifty 500 से बेहतर किया

15 सालों में, खुद से बनाया हुआ लार्ज–मिड–स्मॉल मिक्स, Nifty 500 के भारी लार्ज-कैप झुकाव से ज़्यादा बेहतर निकला

निफ़्टी 500
65.2 14.2
DIY (50:25:25) 75.7 16% ज़्यादा 15.8
DIY (25:25:50) 80.6 24% ज़्यादा 16.4
DIY (25:50:25) 84.3 29% ज़्यादा 16.9
नोट: आखिरी कॉर्पस 13 नवंबर 2025 तक. DIY पोर्टफ़ोलियो में लार्ज, मिड और स्मॉल-कैप एक्सपोज़र के लिए Nifty 100, Nifty Midcap 150 और Nifty Smallcap 250 का इस्तेमाल किया गया. सभी इंडेक्स TRI आधार पर. जनवरी 2010 से ₹10,000 की मंथली SIP लागू है.

आपको नतीजे जानने के लिए हर आंकड़े को पढ़ने की ज़रूरत नहीं है. पैटर्न बिल्कुल साफ़ है. 15 साल की SIP में, हर सोच-समझकर बनाया मिक्स Nifty 500 से आगे रहा. जैसे ही मिड और स्मॉल-कैप को ठीक-ठाक वेट मिला, लंबे समय की ग्रोथ बेहतर दिखी.

जब बाज़ार टूटते हैं, तब DIY पोर्टफ़ोलियो कितना गिरते हैं?

किसी भी मिड और स्मॉल-कैप को लेकर सबसे बड़ा सवाल ये आता है - "ये सेगमेंट ज़्यादा उतार-चढ़ाव करते हैं, तो क्या मंदी के दौरान कस्टमाइज़्ड मिक्स का प्रदर्शन और भी बुरा नहीं होना चाहिए?

ये जानने के लिए, हमने 2010 के बाद की हर बड़ी गिरावट देखी - वो समय जब Nifty 500 में 15% या ज़्यादा गिरावट आई और देखा कि DIY मिक्स कैसा गिरा. दूसरी टेबल ऐसी ही गिरावट के दौर में हर पोर्टफ़ोलियो की गिरावट को दर्शाया है.

क्रैश टेस्ट में भी मामूली अंतर दिखाई दिया

पांच बड़ी गिरावटों में DIY पोर्टफ़ोलियो निफ़्टी 500 के मुक़ाबले सिर्फ़ 1% से 2.4% ज़्यादा गिरे (% में कॉर्पस में गिरावट)

गिरावट का समय
निफ़्टी 500 DIY (50:25:25) DIY (25:25:50) DIY (25:50:25)
मार्च '15 से फ़रवरी '16 -11.3 -10.3 -10.2 -9.4
अगस्त '18 से अक्तूबर '18 -14.7 -16.5 -18.1 -17.4
जनवरी '20 से मार्च '20 -35.9 -37.8 -38.9 -37.2
अक्तूबर '21 से जून '22 -16.5 -18.1 -19.8 -19.5
सितंबर '24 से फ़रवरी '25 -18.4 -19.9 -21.7 -20.6
नोट: 2010 के बाद Nifty 500 TRI में 15% या ज़्यादा गिरावट वाले समय में कॉर्पस में गिरावट के आधार पर डाउनसाइड का आकलन किया गया. कॉर्पस जनवरी 2010 से ₹10,000 की मंथली SIP पर आधारित.

भले ही, कस्टमाइज़्ड मिक्स में थोड़ी और गिरावट आई, लेकिन ये अंतर बहुत कम था. पहली टेबल में इन मिक्स द्वारा दिए गए लॉन्ग-टर्म फ़ायदे को देखते हुए ये गिरावट कोई बड़ी बात नहीं थी.

यही Nifty 500 की कमज़ोरी है, जिसे ज़्यादातर निवेशक तब तक नहीं देख पाते जब तक वे इसकी तुलना इस तरह से न करें.

हमारी राय

दोनों टेबल एक ही बात की ओर इशारा करती हैं कि Nifty 500 उतना अच्छा ऑल-कैप समाधान नहीं है जितना वो दिखता है. लार्ज-कैप का ज़्यादा हिस्सा होने से मिड और स्मॉल-कैप न तो रिटर्न में बड़ा योगदान दे पाते हैं, और न गिरावट में मदद कर पाते हैं.

इस वजह से इंडेक्स एक बीच की अटकी हुई स्थिति में आ जाता है, जो उतार-चढ़ाव के दौर में असहाय नज़र आता है, लेकिन उस उतार-चढ़ाव में ज़्यादा गिरने वाले सेगमेंट का फ़ायदा उठाने के लिए तैयार नहीं होता.

इसलिए, अगर आप सच में सभी हिस्सों में भागीदारी चाहते हैं, तो लार्ज:मिड:स्मॉल का हिस्सा खुद तय करना - जैसे पहली टेबल में - ज़्यादा अच्छा रहता है.

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ये लेख पहली बार नवंबर 18, 2025 को पब्लिश हुआ.

Disclaimer: यह कंटेंट सिर्फ़ जानकारी के लिए है और इसे निवेश सलाह या रेकमेंडेशन नहीं मानना चाहिए.

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