Aditya Roy/AI-Generated Image
95 साल के वॉरेन बफ़े ने शायद अपनी आख़िरी लंबी चिट्ठी बर्कशायर हैथवे के शेयरधारकों को लिखी है. ग्रेग एबेल को CEO की कमान सौंपने का ऐलान करने के बाद उन्होंने ओमाहा की यादों, अपनी परोपकारी योजनाओं और सात दशकों के निवेश अनुभव से मिली सीखों पर काफ़ी समय दिया. लेकिन सोच-समझकर लिखे गए इस विदाई संदेश में एक लाइन छिपी हुई थी, जिस पर हर निवेशक को रुककर सोचना चाहिए: "हमारे शेयर की क़ीमत बेमौके हिलेगी और कई बार लगभग 50 प्रतिशत तक गिर सकती है, जैसा कि मौजूदा प्रबंधन के 60 सालों के इतिहास में तीन बार हुआ है. हिम्मत मत हारिए; अमेरिका दोबारा उठेगा और बर्कशायर के शेयर भी." 60 साल में तीन बार. ये कोई अटकल नहीं है और न ही डर फैलाने की कोशिश. ये दुनिया की सबसे सफल कंपनियों में से एक का दस्तावेज़ी इतिहास है, जिसे शायद अब तक के सबसे बड़े निवेशक ने चलाया है. पहली बार 1973-74 की गिरावट में बर्कशायर का शेयर लगभग 59 प्रतिशत टूटा, जब तेल संकट और स्टैगफ्लेशन (stagflation) के कारण बाज़ार डूब गया था. दूसरी गिरावट 1998-2000 के डॉट-कॉम दौर में आई, जब बर्कशायर का शेयर 48 प्रतिशत फिसला. ये दौर इसलिए दिलचस्प था क्योंकि पूरा बाज़ार उछाल पर था, लेकिन
ये लेख पहली बार दिसंबर 01, 2025 को पब्लिश हुआ.
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