स्टॉक वायर

2025 में दिग्गज समूहों में टाटा का प्रदर्शन सबसे ख़राब क्यों रहा?

भारत के सबसे नामी ग्रुप को नीचे धकेलने वाली वजहों पर एक नज़र

2025 में बाज़ार के दिग्गजों में टाटा ग्रुप का प्रदर्शन सबसे कमज़ोर क्यों रहा

सारांशः यह लेख बताता है कि 2025 में टाटा ग्रुप कहां पिछड़ गया, किन बिज़नेस ने सबसे ज़्यादा दबाव बनाया और क्यों समूह के कुछ हिस्से अब भी मज़बूती दिखाते हैं.

2025 भारतीय इक्विटी बाज़ार के लिए एक और सुस्त साल रहा. बेंचमार्क सेंसेक्स ने लगभग 9 प्रतिशत की मामूली बढ़त दर्ज की, जो पिछले साल के आसपास ही रही. हालांकि, सेक्टर-दर-सेक्टर प्रदर्शन में बड़ा फ़र्क दिखा और उससे भी ज़्यादा फ़र्क़ देश के सबसे बड़े कारोबारी समूहों के प्रदर्शन में नज़र आया.

देश के सबसे बड़े ग्रुप्स में, वो कंपनियां जो मिलकर बाज़ार की दिशा, निवेशकों के सेंटिमेंट और इंडेक्स की चाल को तय करती हैं, कुछ ग्रुप्स ने मज़बूत मुनाफ़े के साथ अपना दबदबा बढ़ाया, जबकि दूसरे अपने साइज़ और पहचान के बावजूद लड़खड़ा गए. इन सबमें सबसे ज़्यादा चौंकाने वाली बात टाटा ग्रुप का ख़राब प्रदर्शन थी.

मार्केट कैपिटलाइज़ेशन के आधार पर भारत के 10 सबसे बड़े बिज़नेस हाउस में, टाटा ग्रुप साल के अंत में सबसे नीचे रहा.

Mint द्वारा जुटाए गए आंकड़ों के मुताबिक़, 26 दिसंबर 2025 तक देश की कुल ₹474 लाख करोड़ की मार्केट कैपिटलाइज़ेशन में टॉप 10 समूहों की हिस्सेदारी लगभग 24 प्रतिशत रही, जो पिछले साल के लगभग बराबर थी. लेकिन इस स्थिर तस्वीर के भीतर समूहों की किस्मत में बड़ा उलटफेर हुआ.

एक तरफ़ आदित्य बिड़ला ग्रुप रहा, जिसकी कुल मार्केट वैल्यू 26.2 प्रतिशत बढ़ी. इसके बाद बजाज ग्रुप (25.5 प्रतिशत) और रिलायंस इंडस्ट्रीज़ (24 प्रतिशत) रहे.

दूसरी तरफ़ टाटा ग्रुप रहा, जिसकी कुल मार्केट कैपिटलाइज़ेशन साल भर में 15 प्रतिशत घट गई. इससे यह भारत के बड़े कॉरपोरेट समूहों में सबसे कमज़ोर प्रदर्शन करने वाला समूह बन गया. रिपोर्ट के मुताबिक़, गॉदरेज ग्रुप 8 प्रतिशत गिरावट के साथ दूसरा सबसे कमज़ोर रहा.

सबसे बड़ा कारण

टाटा ग्रुप के कमज़ोर प्रदर्शन की सबसे बड़ी वजह उसका क्राउन ज्वेल यानी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज़ (TCS) रही. समूह की कुल मार्केट कैपिटलाइज़ेशन में लगभग 44 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाली TCS का शेयर अकेले 2025 में 22 प्रतिशत गिर गया. Moneycontrol के मुताबिक़, यह 2008 की वैश्विक वित्तीय संकट के बाद इसका सबसे ख़राब सालाना प्रदर्शन रहा, जब शेयर 56 प्रतिशत टूट गया था.

वैश्विक स्तर पर टेक्नोलॉजी ख़र्च में लंबे समय से जारी सुस्ती, ख़ासकर अमेरिका और यूरोप के बड़े क्लाइंट्स के बीच, रेवेन्यू ग्रोथ पर दबाव बनाए रही. आर्थिक उतार-चढ़ाव के चलते वैश्विक कंपनियों ने डिजिटल ट्रांसफ़ॉर्मेशन प्रोजेक्ट्स टाल दिए और डिस्क्रिशनरी IT बजट घटाए. बाज़ार एक्सपर्ट का मानना है कि डील जीतने की रफ़्तार धीमी पड़ना और मैनेजमेंट का सतर्क आउटलुक, शेयर के कमज़ोर प्रदर्शन की अहम वजह रहे.

कमज़ोर कड़ियां और भी थीं

TCS अकेली नहीं थी. टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स (पहले टाटा मोटर्स) और रिटेल दिग्गज ट्रेंट, दोनों की मार्केट कैप में हिस्सेदारी काफ़ी बड़ी है और दोनों में सबसे ज़्यादा गिरावट देखने को मिली. टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स का शेयर साल भर में लगभग 50 प्रतिशत टूट गया. इसकी वजह मांग में सुस्ती, इलेक्ट्रिक व्हीकल सेगमेंट में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और तेज़ विस्तार के बाद मार्जिन टिके रहने को लेकर चिंताएं रहीं.

ट्रेंट, जिसने आक्रामक स्टोर विस्तार और फ़ैशन रिटेल में मज़बूत ग्रोथ के दम पर कई सालों तक री-रेटिंग देखी थी, उसका शेयर भी लगभग 40 प्रतिशत गिर गया. वैल्यूएशन को लेकर चिंता कमाई की स्पष्टता पर भारी पड़ गई. निवेशकों ने एग्ज़ीक्यूशन रिस्क और डिस्क्रेशनरी खर्च में संभावित सुस्ती को दामों में गिनना शुरू कर दिया.

कुल मिलाकर, टाटा ग्रुप की 24 लिस्टेड कंपनियों में से 18 ने साल का अंत लाल निशान में किया.

जहां राहत दिखी

टाटा समूह में सब कुछ कमज़ोर नहीं रहा. कुछ कंपनियों ने बाज़ार से बेहतर प्रदर्शन किया और मुश्किल माहौल में भी मज़बूती दिखाई. टाटा स्टील, टाटा कंज़्यूमर प्रोडक्ट्स, टाइटन और इंडियन होटल्स ने बाज़ार को पछाड़ते हुए अच्छे रिटर्न दिए और गिरावट के असर को कुछ हद तक संभाला. हालांकि, इनकी बढ़त समूह की बड़ी कंपनियों से हुए नुक़सान की भरपाई के लिए काफ़ी नहीं रही.

टाटा ग्रुप इस साल कहां सफ़ल और असफ़ल रहा

कंपनी
मार्केट कैप (करोड़ ₹) 2025 रिटर्न (%)
Tata Steel 2,24,765 30.4
Tata Consumer Products 1,17,954 30.4
Titan Company 3,59,611 24.5
Benares Hotels 1,243 16.9
Tata Communications 52,003 7.1
Tata Investment Corporation 35,273 1.8
Tata Power 1,21,279 -3.3
Rallis India 5,443 -5.5
Indian Hotels Company 1,05,156 -15.7
Automobile Corporation of Goa 1,068 -18.3
Tata Consultancy Services 11,59,868 -21.8
Artson 524 -22.4
Tata Elxsi 32,637 -22.9
Voltas 45,020 -24.1
Automotive Stampings and Assemblies 765 -26.5
Tata Chemicals 19,499 -27.2
Tata Technologies 26,053 -28
TRF 328 -31.6
Tata Teleservices (Maharashtra) 9,694 -34.3
Trent 1,52,079 -39.9
Oriental Hotels 1,840 -40.7
Nelco 1,667 -42.2
Tata Motors Passenger Vehicles 1,35,326 -50.4
Tejas Networks 7,981 -62
सोर्स: ACE Equity

निवेशकों के लिए सबक साफ़ है. सबसे सम्मानित और बड़े कांग्लोमरेट्स को भी शेयर-दर-शेयर और साइकल-दर-साइकल ठंडे दिमाग से देखना ज़रूरी है. यह समझना कि कहां असल वैल्यू दोबारा बन रही है और कहां सिर्फ़ सस्ती दिख रही है, यही भरोसे और लापरवाही के बीच फ़र्क़ तय करता है.

यहीं पर वैल्यू रिसर्च स्टॉक एडवाइज़र काम आता है. हमारे एनालिस्ट सिर्फ़ ब्रांड नाम नहीं, बल्कि बिज़नेस की क्वालिटी, कमाई की स्थिरता और लॉन्ग-टर्म रिटर्न की क्षमता को हर स्टॉक के स्तर पर देखते हैं. हम आपको ऐसे बिज़नेस पहचानने में मदद करते हैं जिन्हें उतार-चढ़ाव के दौरान भी होल्ड किया जा सकता है, और जिन्हें तब तक नज़रअंदाज़ करना बेहतर है जब तक कि फ़ंडामेंटल बेहतर न हो जाएं.

स्टॉक एडवाइज़र आज़माइए

Disclaimer: यह कंटेंट सिर्फ़ जानकारी के लिए है और इसे निवेश सलाह या रेकमेंडेशन नहीं मानना चाहिए.

वैल्यू रिसर्च से पूछें aks value research information

कोई सवाल छोटा नहीं होता. पर्सनल फ़ाइनांस, म्यूचुअल फ़ंड्स, या फिर स्टॉक्स पर बेझिझक अपने सवाल पूछिए, और हम आसान भाषा में आपको जवाब देंगे.


टॉप पिक

इमरजेंसी फ़ंड की समस्या

पढ़ने का समय 5 मिनटअमेय सत्यवादी

20% रिटर्न, हर महीने ₹1 लाख: क्या ऐसी उम्मीद लगाना सही है?

पढ़ने का समय 6 मिनटअभिषेक राणा

मिडिल ईस्ट में युद्ध और असर आपकी जेब पर

पढ़ने का समय 6 मिनटउदयप्रकाश

क्या आपका म्यूचुअल फ़ंड सच में आपके लिए काम कर रहा है?

पढ़ने का समय 5 मिनटअमेय सत्यवादी

‘मेरे पोर्टफ़ोलियो में 25 फ़ंड हैं. शुरुआत कहां से करूं?’

पढ़ने का समय 5 मिनटउदयप्रकाश

स्टॉक पॉडकास्ट

updateनए एपिसोड हर शुक्रवार

फ्रॉड के शिकार लोगों के लिए दो नियम

फ्रॉड के शिकार लोगों के लिए दो नियम

जब ताक़तवर लोगों के साथ लूट होती है तो न्याय तेज़ी से मिलता है. बाक़ी लोगों के लिए, ऐसा नहीं है

दूसरी कैटेगरी