Aman Singhal/AI-Generated Image
सारांशः “पहले शुरू करना चाहिए था” जैसी सलाह ज़्यादातर लोगों को आगे बढ़ाने के बजाय रोक देती है. यह स्टोरी एक 35 साल के व्यक्ति की है, जो उस पछतावे से गुज़रता है, हिसाब को नए सिरे से देखता है और समझता है कि सही बातों पर ध्यान दिया जाए, तो देर से शुरुआत भी काम कर सकती है.
“10 साल पहले शुरू करना चाहिए था.”
मेरे सहकर्मी आदित्य ने यह बात लंच के दौरान यूं ही कह दी, फोन पर अपना इन्वेस्टमेंट ऐप देखते हुए. उम्र 27 साल, पहली नौकरी से ही निवेश शुरू कर चुका था और कंपाउंडिंग की बातें किए बिना रुकता ही नहीं था. मेरी उम्र 35 साल थी, सेविंग्स अकाउंट में ठीक ₹1.5 लाख थे और ऐसा लग रहा था जैसे किसी ऐसी रेस में हार चुका हूं, जिसके बारे में पता ही नहीं था कि दौड़ रहा हूं.
उस रात मैंने वही किया, जो कोई भी बेचैन शख्स करता. गूगल पर खोजा, “क्या 35 की उम्र में निवेश शुरू करना बहुत देर हो चुकी है?” हर आर्टिकल, हर रेडिट थ्रेड, हर फ़ाइनेंशियल गुरु की सलाह एक जैसी थी. जल्दी शुरू करो. जितना जल्दी, उतना बेहतर. बेहतर तो यह होता कि कल ही शुरू कर दिया होता.
बहुत बढ़िया. काफ़ी मददगार.
वही हिसाब, जो सब सामने रखते हैं
यह वही उदाहरण है, जिसे सब पसंद करते हैं. अगर 25 की उम्र से हर महीने ₹5,000 निवेश किए जाएं, सालाना 12 प्रतिशत रिटर्न मानकर, तो 60 की उम्र तक क़रीब ₹2.8 करोड़ हो जाएंगे. वही निवेश 35 की उम्र से शुरू किया जाए? तब सिर्फ़ ₹85 लाख.
देखा? पहले ही ₹1.95 करोड़ गंवा चुके हैं. अब तो छोड़ ही देना चाहिए.
लेकिन असल ज़िंदगी ऐसे नहीं चलती.
मैंने अपनी दोस्त सुम्बुल को फ़ोन किया. वह लंबे समय से निवेश कर रही है और मेरे हर बहाने और हर पछतावे को सुन चुकी है. मैंने उससे कहा, “सब यही हिसाब दिखाते हैं. और सच कहूं, तो इससे शुरू करने का मन ही नहीं करता.”
उसने पूछा, “एक बात बताइए. 25 की उम्र में क्या हर महीने ₹5,000 सच में निवेश हो पाते?”
मैं हंस पड़ा. 25 की उम्र में लोन चल रहा था, दो लोगों के साथ घर शेयर करता था और मैगी को पूरा खाना मान लेता था. उस समय, “₹5,000 बचा पाना भी मुश्किल था.”
“बस. यही बात है. ये उदाहरण मान लेते हैं कि 25 की उम्र में आपके पास पैसा और अनुशासन दोनों थे. हालांकि, ज़्यादातर लोगों के पास नहीं होते.”
35 की उम्र में असल में क्या साथ होता है
सुम्बुल ने मुझे वह बताया, जिसे वह “35 की उम्र का फ़ायदा” कहती है. और सच कहूं, तो नज़रिया बदल गया.
उसने पूछा, “35 की उम्र में आमदनी 25 से ज़्यादा होती है, है न?”
हां. काफ़ी ज़्यादा.
“ख़ुद को बेहतर समझने लगे हैं. कुछ फ़ाइनेंशियल ग़लतियां हो चुकी हैं और उनसे सीख भी मिली है. अब बाज़ार 10 प्रतिशत गिरे और किसी दोस्त के दोस्त ने कुछ कह दिया, तो घबराकर बेचने वाले नहीं हैं. और सबसे अहम बात, अब वाक़ई निवेश करने लायक़ रक़म लगाई जा सकती है, सिर्फ़ नाम के लिए नहीं.”
उसकी बात में दम था. 25 की उम्र में ₹2,000 की SIP अच्छी बात है. लेकिन 35 की उम्र में ₹15,000, शायद ₹20,000 भी आराम से लग सकते हैं. समय का जो फ़ायदा छूटा, उसकी भरपाई रक़म से कुछ हद तक हो सकती है.
सुम्बुल ने कहा, “इसे इस तरह देखिए. रिटायरमेंट तक अब भी 25 साल हैं. यह कम वक़्त नहीं है. सवाल यह नहीं है कि पहले क्यों नहीं शुरू किया. वह तो करना ही चाहिए था. सवाल यह है कि आज सबसे सही फ़ैसला क्या है.”
वह योजना, जिसे मैंने असल में फ़ॉलो किया
मैंने ₹15,000 महीने से शुरुआत की. किसी कैलकुलेटर के कहने पर नहीं, बल्कि इसलिए कि इतनी रक़म बिना घुटन के लग सकती थी. इसे एक फ़्लेक्सी-कैप और एक मिड-कैप फ़ंड में बांट दिया. न कुछ अलग-सा, न ऐसा जिसे समझने के लिए फ़ाइनेंस की डिग्री चाहिए.
पहले छह महीने अजीब थे. बाज़ार ऊपर गया, फिर नीचे, फिर वहीं घूमता रहा. करेक्शन, बुल रन और वैल्यूएशन पर आर्टिकल पढ़ता रहा और सच कहूं, तो ज़्यादातर बातें ज्योतिष जैसी लगती थीं.
लेकिन एक बात दिखने लगी. हर महीने पोर्टफ़ोलियो बढ़ रहा था. ₹15,000 महीने की SIP एक साल में क़रीब ₹1.9 लाख बन गई. फिर सैलरी बढ़ी और हर साल SIP को 10 प्रतिशत बढ़ाने का फ़ैसला कर लिया.
तीन साल बाद, कॉर्पस क़रीब ₹6.5 लाख है. करोड़ों में नहीं है. लेकिन यह ₹6.5 लाख ज़्यादा है, उस ₹0 से, जो होता अगर ये तीन साल सिर्फ़ 20 की उम्र का अफ़सोस करते निकल जाते.
और अगर यही जारी रखा जाए, ₹15,000 महीने की SIP, हर साल 10 प्रतिशत बढ़ोतरी के साथ, तो 60 की उम्र तक क़रीब ₹5.9 करोड़ हो सकते हैं, सालाना 12 प्रतिशत रिटर्न मानें तो. किसी ऐसे व्यक्ति के लिए बुरा नहीं, जिसने “देर से” शुरुआत की.
वह बात, जो कोई नहीं बताता
एक सच्चाई है, जो एक्सेल शीट और कंपाउंडिंग कैलकुलेटर में नहीं दिखती. 35 की उम्र में शुरुआत का मतलब है ज़्यादा समझ के साथ शुरुआत.
ऐसे लोग देखे हैं, जिन्होंने 23 में निवेश शुरू किया, 25 में पहली बड़ी गिरावट आई, घबरा कर सब बेच दिया और 30 तक वापस नहीं आए. ऐसे भी देखे हैं, जिन्होंने टिप्स पर शेयर ख़रीदे, नुक़सान हुआ और इक्विटी से हमेशा के लिए दूरी बना ली.
35 की उम्र में यह सब करने का वक़्त नहीं होता. निवेश अपने आप चलता रहे, शोर से दूरी बनी रहे और ध्यान सिर्फ़ निरंतरता पर रहे. पोर्टफ़ोलियो वीडियो गेम नहीं बन सकता.
पिछले महीने वही आदित्य, जिसकी बात से यह सफ़र शुरू हुआ था, सलाह लेने आ गया. बाज़ार 8 प्रतिशत गिरा था और SIP रोकने का सोच रहा था.
मैंने कहा, “मत रोको. उम्र 30 है. 30 साल सामने हैं. यह तो ख़रीदने का सबसे अच्छा समय है.”
उसने मेरी तरफ़ आश्चर्य से देखा. “इतने समझदार तुम कब हो गए?”
मैं हंसा. “जब 25 होने की चाह छोड़ी और यह समझा कि इंतज़ार में नहीं अटका हूं.”
मुद्दा बराबरी का नहीं, शुरुआत का है
अगर उम्र 35 है और निवेश शुरू नहीं हुआ है, तो कोई आख़िरी नाव नहीं छूट गई है. एक नाव छूटी है. और कई नावें आ रही हैं.
असली ग़लती देर से शुरू करना नहीं है. असली ग़लती यह सोचकर कभी शुरू ही न करना है कि देर हो चुकी है.
10 साल बाद या तो बढ़ता हुआ पोर्टफ़ोलियो होगा, या फिर यही सोचा जाएगा कि काश आज शुरू किया होता. फ़ैसला अभी हाथ में है. और घड़ी किसी के ख़िलाफ़ नहीं, बल्कि साथ चल रही है.
हर दिन का इंतज़ार, संभावित रिटर्न का एक दिन छोड़ देना है. 25 साल वालों से मुक़ाबला नहीं है. मुक़ाबला अपने आने वाले कल से है.
भरोसा रखिए, भविष्य वाला ख़ुद शुक्रगुज़ार होगा.
और अगर शुरुआत कहां से हो, यह समझ नहीं आ रहा है, तो वैल्यू रिसर्च फ़ंड एडवाइज़र मदद कर सकता है. यहां ज़रूरत के मुताबिक़ चुने गए म्यूचुअल फ़ंड्स की एक शॉर्टलिस्ट मिलती है, ताकि हर फ़ैसले पर दोबारा सोचना न पड़े. पहली SIP हो या उसे बढ़ाना हो, यह साफ़ पता रहता है कि किन फ़ंड्स पर भरोसा किया जा सकता है.
ये भी पढ़ें: आपकी SIP अच्छा रिटर्न नहीं दे रही, तो क्या निवेश जारी रखना चाहिए?
ये लेख पहली बार जनवरी 23, 2026 को पब्लिश हुआ.
Disclaimer: यह कंटेंट सिर्फ़ जानकारी के लिए है और इसे निवेश सलाह या रेकमेंडेशन नहीं मानना चाहिए.
शिकायतों के लिए संपर्क करें: [email protected]